November 30, 2020
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स्मृति शेष

…जरा याद करो कुर्बानी

कारगिल विजय दिवस (26 जुलाई) पर विशेष डॉ. मोहन चन्द तिवारी आज पूरे देश में कारगिल विजय दिवस की 21वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.आज के ही दिन 26 जुलाई,1999 को जम्मू और कश्मीर राज्य में नियंत्रण रेखा से लगी कारगिल की पहाड़ियों पर कब्ज़ा जमाए आतंकियों और उनके वेश में घुस आए पाकिस्तानी सैनिकों […]
जल विज्ञान

आज भी प्रासंगिक हैं वैदिक जल विज्ञान के सिद्धात

भारत की जल संस्कृति-8 डॉ. मोहन चन्द तिवारी देश में इस समय वर्षा ऋतु का काल चल रहा है.भारतीय प्रायद्वीप में आषाढ मास से इसकी शुरुआत  हो जाती है और सावन भादो तक इसका प्रभाव रहता है.आधुनिक मौसम विज्ञान की दृष्टि से इसे ‘दक्षिण-पश्चिमी मानसूनों’ के आगमन का काल कहते है,जिसे भारतीय ऋतुविज्ञान में ‘चातुर्मास’ […]
समाज/संस्कृति

वेदों के ‘इंद्र-वृत्र युद्ध’ मिथक का जल वैज्ञानिक तात्पर्य    

भारत की जल संस्कृति-7 डॉ. मोहन चन्द तिवारी भारतवर्ष प्राचीनकाल से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है. कृषि की आवश्यकताओं को देखते हुए ही यहां समानांतर रूप से वृष्टिविज्ञान, मेघविज्ञान और मौसम विज्ञान की मान्यताओं का भी उत्तरोत्तर विकास हुआ. वैदिक काल में इन्हीं मानसूनी वर्षा के सन्दर्भ में अनेक देवताओं को सम्बोधित करते […]
समाज/संस्कृति

उत्तराखंड के पहाड़ों से शुरू होता है वैदिक जल प्रबंधन व कृषि प्रबन्धन का स्वर्णिम इतिहास

भारत की जल संस्कृति-6 डॉ. मोहन चन्द तिवारी मैंने अपने पिछले लेख में वैदिक जलविज्ञान के प्राचीन इतिहास के बारे में बताया है कि वेदों के मंत्रद्रष्टा ऋषियों में ‘सिन्धुद्वीप’ सबसे पहले जलविज्ञान के आविष्कारक ऋषि हुए हैं, जिन्होंने जल के प्रकृति वैज्ञानिक‚ औषधि वैज्ञानिक, मानसून वैज्ञानिक और कृषिवैज्ञानिक महत्त्व को वैदिक संहिताओं के काल […]