Tag: किन्नौर

एक ‘खामोश नायक’ का ‘जीवंत किवदंती’ बनने का जीवनीय सफ़र

एक ‘खामोश नायक’ का ‘जीवंत किवदंती’ बनने का जीवनीय सफ़र

स्मृति-शेष
डॉ. अरुण कुकसाल ‘श्री नलनीधर जयाल आज किन्नौर की खूबसूरत वादियों में एक ‘जिंदा कहानी’ के तौर पर लोगों के दिल-दिमागों, वहां के बाग-बगीचों, खेत-खलिहानों, स्कूलों, लोगों के शानदार रोजगारों और प्राकृतिक एवं मानवीय समृद्धि के अनेकों रंग-रूपों में रचे-बसे हैं. वह किन्नौर में एक ‘जीवंत किवदंती’ हैं. किसी भी इंसान के जीवन में सफलता का इससे सुंदर और क्या मुकाम हो सकता है, कि वह अपने कामों और नेक-नियत के बदौलत लोगों के दिल-दिमागों में एक जीवंत किवदंती ही बन जाए.’ (कुसुम रावत, पृष्ठ-130) जांबाज फाइटर पाइलट से लोकप्रिय पर्यावरणविद बनने के जीवनीय सफर के दौरान श्री जयाल काबिल नौकरशाह, साहसी पर्वतारोही, शानदार फोटोग्राफर, चर्चित लेखक, कुशल प्रशिक्षक, अग्रणी सामाजिक कार्यकर्ता, जिज्ञासू अघ्येता, और दूरदर्शी चिंतक रहे. उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के और भी आयाम हैं. परन्तु यह भी सच है कि उनका व्यक्तित्व प...
किन्नौर का कायाकल्प करने वाला डिप्टी कमिश्नर

किन्नौर का कायाकल्प करने वाला डिप्टी कमिश्नर

संस्मरण, हिमाचल-प्रदेश
कुसुम रावत मेरी मां कहती थी कि किसी की शक्ल देखकर आप उस ‘पंछी’ में छिपे गुणों का अंदाजा नहीं लगा सकते। यह बात टिहरी रियासत के दीवान परिवार के दून स्कूल से पढ़े मगर सामाजिक सरोकारों हेतु समर्पित प्रकृतिप्रेमी पर्वतारोही, पंडित नेहरू जैसी हस्तियों को हवाई सैर कराने वाले और एवरेस्ट की चोटी की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने लाने वाले एअरफोर्स पायलट, किन्नौर की खुशहाली की कहानी लिखने वाले और देश में पर्यावरण के विकास का खाका खींचने वाले वाले दूरदर्शी नौकरशाह नलनी धर जयाल पर खरी बैठती है। देश के तीन प्रधानमंत्रियों के साथ काम करने वाले इस ताकतवर नौकरशाह ने हमेशा अपनी क्षमताओं से एक मील आगे चलने की हिम्मत दिखाई जिस वजह से वह भीड़ में दूर से दिखते हैं। जीवन मूल्यों के प्रति ईमानदारी, प्रतिबद्वता व संजीदगी से जीने का सलीका इस बेजोड़ 94 वर्षीय नौकरशाह की पहचान है। यह कहानी एक रोचक संस्मरण है ...