November 28, 2020
समसामयिक

चुनाव के बहाने वजूद तलाशते प्रवासी पहाड़ी!

  • शशि मोहन रावत ‘रवांल्‍टा’

आज लॉक डाउन के लगभग सात माह बाद अपने पुराने साथी से मुलाकात हुई. रात साढ़े ग्यारह बजे चाय पी गई और उसके बाद वो दूसरे रूम में सोने चला गया, क्योंकि सात माह से गांव में रहने के कारण जल्दी सोना उसकी आदत में शुमार हो गया है. मैं चाय पी लेता हूं तो नींद तकरीबन 1 घंटे बाद ही आती है. 12 बजे करीब बिस्तरbecause पर लेटा ही था कि— मेरे फोन की घंटी बजी. मैं चौंका. इतनी रात किसका फोन आया होगा? अचानक से दिमाग में कई तरह के ख्याल आने लगे. चूंकि नंबर नया था इसलिए और समय भी अधिक हो चुका था तो फोन उठाना भी जरूरी समझा.

फोन

फोन उठाते ही— हैलो, कौन?

हां भाई प्रवासी क्या हाल हैं?

अनयास ही मुंह के निकाला, तू बता भाई because घरवासी. अबे… तू इतनी रात को कैसे फोन कर रहा है ? और वो भी नए नंबर से?

फोन

यही वो फोटो है जिसके पोस्ट होने के बाद कॉल आया…

बोला, फेसबुक पर तेरी because पोस्ट देखी तो समझ गया कि तू अभी सोया नहीं होगा.

फोन

हां बोल. क्या हुआ, because सब ठीक है न? इतनी रात को तुझे क्या हो गया.

हां भाई सब ठीक है.

फोन

तुम प्रवासी समझते क्या हो खुद because को? पूरा जीवन महानगरों में बिताओ, अच्छा खाओ, अच्छा पहनो, अपने बच्चों को कॉनवेंट स्कूलों में पढ़ाओ और जैसे ही तुम पर कोई मुसीबत आती है या तुम नौकरी छोड़ देते हो तो पहाड़ भाग आते हो? क्यों?

फोन

तो फिर इतनी रात फोन क्यों किया? बस मेरा इतना कहना ही था कि वह फट पड़ा.

अबे तुम प्रवासी समझते क्या हो खुद को? becauseपूरा जीवन महानगरों में बिताओ, अच्छा खाओ, अच्छा पहनो, अपने बच्चों को कॉनवेंट स्कूलों में पढ़ाओ और जैसे ही तुम पर कोई मुसीबत आती है या तुम नौकरी छोड़ देते हो तो पहाड़ भाग आते हो? क्यों?

फोन

मैं कुछ जवाब दे पाता कि इससे पहले ही बोल पड़ा.

पढ़ें— संकट में है becauseआज हिमालय पर्यावरण

सुन! एक बात बता? जब तुमने पूरी जिंदगी because महानगर में बीता दी तो लास्ट में घर क्यों आते हो? और यदि आते भी तो हो यहां शेखियां बघारने के सिवा कुछ काम नहीं करते.

मैं कुछ समझा नहीं, मैंने कहा.

फोन

हां, तेरी समझ में क्यों आएगा. तू प्रवासी जो है. becauseपहाड़ का दु:ख—दर्द तेरे समझ से परे है.

अरे भाई, मैं भी वहीं पैदा हुआ हूं, मैं पहाड़ because को अच्छी तरह समझता हूं. आखिर हुआ क्या? सीधे—सीधे बता, मैंने सवाल किया.

फोन

अरे बताना क्या है? तुम लोग खुद तो पलायन becauseकर गए और हम लोग यदि थोड़ा बहुत कमाकर अपने बच्चों को देहरादून या हल्द्वानी जैसे शहरों में पढ़ाने भेजते हैं तो तुम पलायन रोकने के नाम पर हमको भाषण देने लगते हो.

भाई मैंने ऐसा क्या कहा, because जो तू इतना उखड़ रहा है.

अरे, मैं उखड़ रहा हूं. because तुम लोग महानगरों से हमारे पहाड़ों में आते हो और पलायन के नाम पर बड़े लंबे—चौड़े भाषण देते हो और अगले दिन दूसरी गाड़ी से वापस निकल जाते हो. आखिर से because‘थॉट पॉल्यूशन’ फैलाने तुम पहाड़ क्यों आते हो बे?

फोन

मैंने कहा, भाई हमने ऐसा कौन—सा पॉल्यूशन फैला दिया. becauseअच्छा सुन, चल अब सो जा मैं भी सोता हूं.

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मैंने फोन कट कर दिया.

फोन

करीब 2 मिनट बात फिर फोन की घंटी बजी.

एक बार सोचा की फोन न उठाऊं लेकिन because लगा कि कहीं कुछ तो है तो दूबारा फोन आया.

हां, बोल. अब क्या हुआ?

अरे असली बात तो रही ही गई. भाई अब क्या रह because गया, कल सुबह बात करते हैं न मैंने कहा.

फोन

नहीं—नहीं कल सुबह तक मैं भूल गया तो. because हम तुम्हारी तरह खाली नहीं रहते. असोज का महीना चल रहा है आजकल, सुबह—सुबह काम करने जाना पड़ता है.

अच्छा मेरे प्रभु, बोल.

तुम प्रवासी ना! पहाड़ में अपने वजूद को because तलाशने आते हो. पूरी जिदंगी महानगरों में ​बिताओ और लास्ट में पहाड़ को दौड़ो.

अरे भाई ठीक है. चल because सारी बात मान ली, अब तो सो जा.

बिल्कुल नहीं, सोने कौन because देगा तुझे आज. आज तू सुन.

ओके. बोल.

अरे देख नहीं रहा है पहाड़ में because अब आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी और तू फेसबुक पर केजरीवाल का वीडियो देख ही रहा है कि पहाड़ के बहुत से आदमी मेरे पास आए कि तुम अपनी पार्टी को पहाड़ चढ़ाओ.

आजकल तू देख रहा है, because पहाड़ में आम आदमी खास हो गया है.

क्या मतलब? मैंने पूछा.

फोन

अरे देख नहीं रहा है पहाड़ में अब आम because आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी और तू फेसबुक पर केजरीवाल का वीडियो देख ही रहा है कि पहाड़ के बहुत से आदमी मेरे पास आए कि तुम अपनी पार्टी को पहाड़ चढ़ाओ.

पढ़ें— तार-तार होती गांवों की परंपरा, घर-घर पैदा हो रहे नेता

तो इसमें बुराई क्या है? मैंने झीड़कते हुए कहा.

फोन

बुराई इसमें नहीं है, कि कोई पार्टी पहाड़ because चढ़े या पहाड़ से रड़े. लेकिन जिन लोगों ने पूरा जीवन महानगरों में खपाया वो आज पहाड़ आ के अपने वजूद को तलाश रहे हैं. यहां से विधायक बनने का सपना देख रहे हैं.

हमने जिन्होंने पूरा ​जीवन यहां राजनीति में because खफा दिया है और हमको प्रधानी के चुनाव तक का टिकट नहीं मिल रहा है और वो जो कल ही दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों से आ रहे हैं और चार दिन पार्टी ज्वाइन किए हुए नहीं हो रहे हैं उनको वो सीधे टिकट ले आ रहे हैं.

तो सपना देखना कहां बुरा है. जिसमें because कूबत होगी, वो तो चुनाव लड़ेगा ही ना.

तू समझ ही नहीं रहा है. हमने जिन्होंने पूरा ​जीवन यहां राजनीति में खफा दिया है और हमको प्रधानी के चुनाव तक का टिकट नहीं मिल रहा है और वो जो कल ही दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों से आ रहे हैं because और चार दिन पार्टी ज्वाइन किए हुए नहीं हो रहे हैं उनको वो सीधे टिकट ले आ रहे हैं.

फोन

ओह! अच्छा तो ये बात है. तो सीधे because बोल न कि तुझे टिकट नहीं मिला तो इतना बिलबिलाया हुआ है.

बस मेरा इतना कहना भर ही था कि वो एकदम से आग बबुला हो उठा.

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फोन

हद है यार. कुछ भी बोले जा रहे हो. हम तो पार्टी के कायकर्ता हैं पार्टी जैसा कहेगी हम वैसा करेंगे.

यार ऐसा है तो फिर सारी बात because ही खत्म हो जाती है. क्यों बेवजह बखेड़ा खड़ा कर रहा है.

फोन

कमाल करते हो यार, उसने कहा, because अच्छा सुन एक बात बता कि जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पार्टी के लिए लगा दी है और कल को कोई पैराशूट उम्मीदवार आए टिकट लेकर तो, कैसा लगेगा, तू ही बता.

मुझे राजनीति की ज्यादा समझ because नहीं है यार, लेकिन तेरा दर्द समझ सकता हूं कि तुझे टिकट नहीं मिला होगा तो ऐसा कह रहा है.

फोन

उधर से जैसे ही गालियों की because बौछार शुरू हुई मैंने फोन को सीधे फाइट मोड पर डाल दिया.

क्रमश:

(लेखक पांचजन्य एवं आर्गेनाइजर पत्रिका में आर्ट डायरेक्टर हैं)

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