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पेंटिंग की वैश्विक प्रदर्शनी में उत्तराखंड के तीन कलाकारों ने किया प्रतिनिधित्व

पेंटिंग की वैश्विक प्रदर्शनी में उत्तराखंड के तीन कलाकारों ने किया प्रतिनिधित्व
  • हिमाँतर डेस्‍क

उत्तराखंड के राजेश चंद्र की चित्रकला इनदिनों सुर्खियां बंटोर रही है. हाल ही में विश्व स्तर पर हुई एक प्रदर्शनी में उनकी पेंटिंग को खूब सराहा गया है. इस पेंटिंग में राजेश ने समुद्र बचाओ का संदेश दिया था. राजेश 24 साल के हैं और उनकी पेंटिंग्स को नमामि गंगे व जल शक्ति मंत्रालय भी सराह चुका है. राजेश की पेंटिंग की प्रदर्शनी यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड ओसन डे ऑर्गनाइजेशन के वैश्विक स्तर पर हुए ‘समुद्र बचाओ प्रदर्शनी’  में लगी थी. इस कार्यक्रम में उनके साथ ही विश्वभर के कई कलाकारों ने समुद्र बचाओ का संदेश दिया. राजेश के साथ ही इस प्रदर्शनी में उनके दो बाल कलाकारों शिवांश और मानव थापा की पेंटिंग भी प्रदर्शित की गई. इस वैश्विक प्रदर्शनी में भारत की तरफ से उत्तराखंड के तीन कलाकारों ने प्रतिनिधित्व किया.

शिवांश ग्यारह और मानव महज सात साल के हैं जिनकी पेंटिंग इस प्रदर्शनी में प्रदर्शित हुई. ये दोनों ही राजेश के विद्यार्थी हैं और कुछ वक्त पहले इन दोनों बाल कलाकारों की पेंटिंग को भारत सरकारी तरफ से भी सराहना मिली थी. केंद्र सरकार के जल संरक्षण अभियान नमामि गंगे व जल शक्ति मंत्रालय ने शिवांश, हर्षिता, अन्वेषा और मानव की ‘सेव ओसन’ पेटिंग्स को सराहा था. राजेश की पेंटिंग “कुड़े का रंगीन पिंजरा” शिवांश की पेंटिंग “प्लास्टिक जानलेवा है” और मानव की पेंटिंग “समुद्र को साफ रखो” को यूनाइडेट नेशन वर्ल्ड ओसन डे ऑर्गनाइजेशन ने सोशल मीडिया अकाउंट व अपने आधिकारिक पोर्टल में प्रकशित किया था.

इन चित्रकारी में इन कलाकारों ने प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में बताया था. चित्रकारी के जरिए प्लास्टिक किस तरह धरती के लिए नुकसानदायक है इस बारे में जानकारी दी गी थी. राजेश ने अपनी पेंटिंग में दर्शाया था कि कैसे भारत मे केले के पत्ते में खाना खाने के रिवाज के जरिए प्लास्टिक व डिस्पोजल प्लेट्स से होने वाले कुड़े को खत्म किया जा सकता है.

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Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास

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