उत्तरकाशी

सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी: ट्रेक ऑफ द ईयर 2024, पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद

सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी: ट्रेक ऑफ द ईयर 2024, पर्यटन और रोजगार की नई उम्मीद

उत्तरकाशी
  पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे सर बडियारनीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशी उत्तरकाशी जनपद के विकासखंड पुरोला अंतर्गत सीमांत उच्च हिमालयी क्षेत्र सर बडियार में स्थित सरुताल ट्रेक पर्यटन एवं रोजगार की अपार संभावनाएं समेटे हुए है। यह ट्रेक न केवल साहसिक पर्यटन का केंद्र बन सकता है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों के लिए आजीविका का मजबूत स्रोत भी साबित हो सकता है। उत्तराखंड सरकार द्वारा इसे 2024 में ट्रेक ऑफ द ईयर घोषित किए जाने के बाद अब इसकी प्रसिद्धि बढ़ रही है और विकास की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। आवश्यकता है इसे पूर्ण रूप से पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की, ताकि पर्यटन को नए पंख लगें और दूरस्थ गांवों में आर्थिक उन्नति हो। सरुताल ट्रेक उत्तरकाशी के सर बडियार क्षेत्र (सरनौल-सोतरी या आसपास के गांवों से शुरू) एक अद्वितीय हिमालयी पदयात्रा है, जो लगभग 40+ किलोमीटर लंबा है और सामान्यतः 5 स...
पिज़्ज़ा-बर्गर के दौर में लुप्त हो रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’, सांस्कृतिक पहचान पर संकट

पिज़्ज़ा-बर्गर के दौर में लुप्त हो रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’, सांस्कृतिक पहचान पर संकट

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडीहिमालयी क्षेत्रों की समृद्ध पाक परंपरा का अहम हिस्सा रहे पारम्परिक पहाड़ी व्यंजन ‘सिड़ा–असका’ आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं. कभी त्योहारों, मेलों और विशेष अवसरों की शान माने जाने वाले ये व्यंजन अब धीरे-धीरे पहाड़ी रसोई से गायब होते जा रहे हैं.बदलती जीवनशैली का असरविशेषज्ञों का मानना है कि फास्ट फूड की बढ़ती लोकप्रियता, शहरीकरण और नई पीढ़ी की बदलती खान-पान आदतों ने पारम्परिक व्यंजनों को पीछे धकेल दिया है. पहले जहां घरों में गेहूं या मंडुए के आटे से सिड़ा (भाप में पका व्यंजन) और असका (स्थानीय शैली की रोटी/पकवान) बनाए जाते थे, वहीं अब उनकी जगह बाजारू खाद्य पदार्थों ने ले ली है.मेहनत और समय की मांगग्रामीण महिलाओं के अनुसार, सिड़ा–असका बनाने की प्रक्रिया समय और धैर्य की मांग करती है. आटे को विशेष तरीके से गूंथना, उसे खमीर उठाने देना और पारम्पर...
सौड़-सांकरी का देवगोत मेला: देव आस्था, मैती-धियाणी मिलन और लोक संस्कृति का भव्य संगम

सौड़-सांकरी का देवगोत मेला: देव आस्था, मैती-धियाणी मिलन और लोक संस्कृति का भव्य संगम

उत्तरकाशी
  देव आस्था, रिश्तों की गरमाहट और लोक संस्कृति का संगम नीरज उत्तराखंडीसौड़-सांकरी (मोरी),  उत्तरकाशी   हिमालय की शांत वादियों में जब ढोल-दमाऊ की थाप गूंजती है और रणसिंघा की ध्वनि देवदार के जंगलों से टकराकर लौटती है, तब समझ लीजिए कि पहाड़ में कोई बड़ा लोक उत्सव आकार ले चुका है. सीमांत विकासखंड मोरी के सौड़-सांकरी गांव में आयोजित देवगोत मेला और मैती-धियाणी मिलन कार्यक्रम ने इस बार भी आस्था, परंपरा और भावनाओं को एक सूत्र में पिरो दिया.लोक देवता सोमेश्वर महादेव के सानिध्य में सजे इस मेले की शुरुआत विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना और देवडोली के स्वागत के साथ हुई. मंदिर परिसर में उमड़े श्रद्धालुओं की भीड़, जयकारों की अनुगूंज और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर थाप ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया. श्रद्धालुओं ने भगवान सोमेश्वर महादेव के श्रीचरणों में नमन कर क्षेत्र की सुख-सम...
 भेड़-बकरी पालन से आत्मनिर्भर बन रहे पहाड़ के गांव, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

 भेड़-बकरी पालन से आत्मनिर्भर बन रहे पहाड़ के गांव, महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

उत्तरकाशी
पर्वतीय क्षेत्रों में आजीविका की रीढ़ बना भेड़-बकरी पालन, हजारों परिवारों को मिल रहा सहारानीरज उत्तराखंडी, पुरोलापर्वतीय क्षेत्रों में खेती की सीमित जमीन, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और रोजगार के सीमित अवसरों के बीच भेड़-बकरी पालन पहाड़ की आर्थिकी और आजीविका की मजबूत रीढ़ बनकर उभरा है. सर बड़ियार क्षेत्र के दुर्गम गांवों में हजारों परिवार इस पारंपरिक व्यवसाय से सीधे जुड़े हुए हैं.आय और आत्मनिर्भरता का आधार विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ में छोटे और सीमांत किसानों के लिए भेड़-बकरी पालन कम लागत और शीघ्र आमदनी देने वाला व्यवसाय है.बकरी का दूध, मांस और खाद स्थानीय बाजार में आसानी से बिक जाते हैं. भेड़ों से ऊन का उत्पादन होता है, जो हस्तशिल्प और वस्त्र उद्योग में उपयोगी है. प्राकृतिक चरागाहों की उपलब्धता से चारे की लागत अपेक्षाकृत कम रहती है.महिलाओं की बढ़ती भागीदारी...
उत्तराखंड में विलुप्त होती काष्ठ तकली और कंघी: पारंपरिक शिल्पकार देख रहे संरक्षण की राह

उत्तराखंड में विलुप्त होती काष्ठ तकली और कंघी: पारंपरिक शिल्पकार देख रहे संरक्षण की राह

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोलापारंपरिक काष्ठ शिल्प की एक अनमोल धरोहर आज गुमनामी की कगार पर है। बाज़ार में काष्ठ निर्मित तकली और कंघी बेचते हुए श्रीकोट (पुरोला) निवासी केशवानंद, पुत्र जीतराम, मिले—जो वर्षों से इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं।जिज्ञासावश जब उनसे पूछा गया कि ये तकली किस लकड़ी की बनी है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि तकली चुल्लू के पेड़ की लकड़ी से तैयार की जाती है, जबकि कंघी मोल यानी कैंथ की लकड़ी से बनाई जाती है। उनके अनुसार इन दोनों वस्तुओं को तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता है। लकड़ी का चयन करना, उसे सुखाना, तराशना और फिर महीन घिसाई कर उपयोगी आकार देना—पूरी प्रक्रिया अत्यंत श्रमसाध्य होती है।केशवानंद बताते हैं कि पहले गांव-गांव में काष्ठ से बनी तकली और कंघियों की अच्छी मांग रहती थी, लेकिन अब प्लास्टिक और मशीन निर्मित वस्तुओं ने इन पारंपरिक ...
पुरोला में बीमार महिला को डंडी-कंडी से सड़क तक पहुंचाया, 108 से दून अस्पताल रेफर

पुरोला में बीमार महिला को डंडी-कंडी से सड़क तक पहुंचाया, 108 से दून अस्पताल रेफर

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोला  उत्तराखंड के जनपद उत्तरकाशी के पुरोला विकासखंड स्थित सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत सांखाल में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव की एक मार्मिक घटना सामने आई है. गांव की निवासी इन्द्री देवी का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर ग्रामीणों को उन्हें डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ा. सड़क सुविधा के अभाव में पैदल ले जानी पड़ी मरीज सांखाल गांव में मोटर मार्ग न होने के कारण परिजन और ग्रामीण इन्द्री देवी को डंडी-कंडी के सहारे घेडिया बैंड तक लेकर पहुंचे. ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और संकरी पगडंडियों के बीच यह सफर जोखिम भरा रहा. ग्रामीणों ने बारी-बारी से डंडी संभालते हुए मरीज को सुरक्षित सड़क मार्ग तक पहुंचाया.स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर यह प्रयास नहीं किया जाता तो मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती थी. निजी वाहन से बर्निगाड़, फिर 108 एम्बुले...
62 की उम्र में भी जोश बरकरार: पुरोला के वृजमोहन ने बर्फ से रचा रोजगार

62 की उम्र में भी जोश बरकरार: पुरोला के वृजमोहन ने बर्फ से रचा रोजगार

उत्तरकाशी
  20 रुपये की कटोरी, हजारों की आमदनी: पुरोला के बुजुर्ग की मिसालनीरज उत्तराखंडी, पुरोला उत्तरकाशीपुरोला के महरगांव निवासी 62 वर्षीय वृजमोहन सिंह रावत ने यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति में कुछ करने की लगन और स्वावलंबन के संस्कार हों, तो उम्र कभी भी बाधा नहीं बनती. जब एक ओर पुरोला में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन चल रहा था, वहीं दूसरी ओर बाजार में सड़क किनारे परात में प्राकृतिक बर्फ को जायकेदार बनाकर बेचते वृजमोहन सिंह रावत लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे. वे न केवल स्वाद परोस रहे हैं, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश भी दे रहे हैं.जिज्ञासा वश पूछने पर उन्होंने बताया कि वे पुरोला में लगने वाले मेला-जातर में बर्फ बेचकर अच्छा खासा मुनाफा कमा चुके हैं. बर्फ लाना भले ही कठिन होता है, लेकिन मेहनत रंग लाती है. “शाम तक एक हजार से दो से ढाई हजार रुपये की बिक्री हो जात...
पगडंडी के सहरे विकास का सफर तय करने को मजबूर पोखरी गांववासी

पगडंडी के सहरे विकास का सफर तय करने को मजबूर पोखरी गांववासी

उत्तरकाशी
  पोखरी गांव नहीं पहुंचे सड़क सुविधा के पांवनीरज उत्तराखंडी, मोरी उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी के सीमांत विकास खंड मोरी के पोखरी गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित है. ग्रामीण दुर्गम पंगड़ी के सहारे सफर करने को मजबूर हैं. यही वजह है कि बीते वीरवार को गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने की मांग को ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी मुकेश रमोला माध्यम से मुखमंत्री को ज्ञापन भेजा है, जिसमें ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सड़क स्वीकृत नहीं किए जाने पर आआंदोलन की चेतावनी दी है. ज्ञापन में कहा गया है कि मोरी क्षेत्र के दूरदराज क्षेत्र के अधिकांश गांव सड़क मार्च से जुड़ गए है. लेकिन तहसील मुख्यालय मोरी से महज 16 किमी दूरी पर स्थित 470 आबादी वाला पोखरी गांव आज तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से बंचित है. जिससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ज्ञापन में कहा गया है कि पड़ो...
 ‘बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ से सम्मानित हुए साहित्यकार महावीर रवांल्टा

 ‘बलदेव मल्ल सम्मान-2025’ से सम्मानित हुए साहित्यकार महावीर रवांल्टा

उत्तरकाशी, देश—विदेश
 नीरज उत्तराखंडीलखनऊ. हिन्दी साहित्य की गद्य विधा में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रख्यात साहित्यकार महावीर रवांल्टा को वर्ष 2025 का प्रतिष्ठित ‘बलदेव मल्ल सम्मान’ प्रदान किया गया. यह सम्मान बी.एम.एन. सेवा संस्थान, लखनऊ द्वारा उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के निराला सभागार, हजरतगंज, लखनऊ में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया. समारोह में विधानसभा सदस्य पवन सिंह चौहान, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह, आईएएसए महामहिम राज्यपाल के विशेष सचिव श्रीप्रकाश गुप्त तथा प्रभुनाथ राय सहित देशभर से पधारे साहित्य, कला और संस्कृति के साधकों की गरिमामयी उपस्थिति रही.साहित्य साधना की चार दशक लंबी यात्रा 10 मई 1966 को सुदूरवर्ती सरनौल गांव में जन्मे महावीर रवांल्टा वर्तमान में महरगांव में निवास कर रहे हैं. उन्होंने अस्सी के दशक में लेखन की शुरुआत की और तब से अब तक साहित...
 उत्तरकाशी: जट्टा–कोटियालगांव में SHGs री-पैकेजिंग यूनिट और नौगांव में युवा हिमालय आउटलेट का उद्घाटन, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

 उत्तरकाशी: जट्टा–कोटियालगांव में SHGs री-पैकेजिंग यूनिट और नौगांव में युवा हिमालय आउटलेट का उद्घाटन, महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा

उत्तरकाशी
 आशिता डोभाल, नौगांव उत्तरकाशीउत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक उद्यमिता को नई गति देते हुए युवा हिमालय द्वारा दो महत्वपूर्ण पहलें शुरू की गईं। जट्टा–कोटियालगांव में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की री-पैकेजिंग यूनिट तथा नौगांव बाज़ार में युवा हिमालय के नए रिटेल आउटलेट का विधिवत उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रुचि भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा, उत्तराखंड रहीं। इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री डॉ. हिमानी वैष्णव डिमरी, प्रदेश मंत्री डॉ. नेहा शर्मा, प्रदेश मीडिया संयोजक डॉ. दिव्या नेगी, प्रदेश प्रवक्ता लक्ष्मी अग्रवाल, प्रदेश कार्यालय प्रभारी शकुंतला देवलाल, प्रदेश कार्यालय सह-प्रभारी बबली चौहान, गढ़वाल संयोजक रेखा डंगवाल, अमिता परमार (मंडल अध्यक्ष, नौगांव), चंडी प्रसाद बेलवाल (प्रदेश मंत्री, ओबीसी मोर्चा – भाज...