उत्तरकाशी

चारधाम यात्रा 2026: यमुनोत्री पैदल मार्ग का निरीक्षण, प्रशासन ने तेज की तैयारियां

चारधाम यात्रा 2026: यमुनोत्री पैदल मार्ग का निरीक्षण, प्रशासन ने तेज की तैयारियां

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, बड़कोट/यमुनोत्री/ उत्तरकाशीआगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट खुलने से पूर्व जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है. यात्रा को सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रहा है. जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशों के क्रम में शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी जय भारत सिंह ने जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक लगभग 6 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग का स्थलीय निरीक्षण किया. इस दौरान यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे. निरीक्षण के दौरान पेयजल, शौचालय, विद्युत आपूर्ति, रेन शेल्टर और रेलिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया गया. सीडीओ ने साफ-सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सुलभ इंटरनेशनल और जिला पंचायत को यात्रा मार्ग एवं शौचालयों में...
दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत: ‘संकल्प संवाद’ पोर्टल से अब घर बैठे समाधान

दूरस्थ क्षेत्रों के लिए बड़ी राहत: ‘संकल्प संवाद’ पोर्टल से अब घर बैठे समाधान

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, उत्तरकाशीजनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा. जिलाधिकारी प्रशांत आर्य द्वारा ‘दक्ष उत्तरकाशी मॉडल’ के तहत शुरू किया गया ‘संकल्प संवाद’ पोर्टल (www.sankalpsanwad.com) अब आमजन के लिए राहत भरी पहल बनकर सामने आया है. इस पोर्टल का विधिवत संचालन 9 अप्रैल से शुरू होगा.इस अभिनव व्यवस्था के तहत नागरिक अब घर बैठे ही प्रशासन से सीधे जुड़ सकेंगे और अपनी समस्याएं, सुझाव एवं शिकायतें दर्ज करा सकेंगे. अब तक दूरस्थ इलाकों के लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में समय और धन दोनों खर्च करना पड़ता था, लेकिन इस पोर्टल के माध्यम से यह प्रक्रिया आसान और सुलभ हो जाएगी.प्रशासन द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार—प्रत्येक मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे से 2:00 बजे तक जिलाधिकारी (DM) स्वयं संवाद करेंगे....
फ़िताड़ी अग्निकांड: कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने पीड़ितों का जाना हाल, हर संभव मदद का दिया भरोसा

फ़िताड़ी अग्निकांड: कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने पीड़ितों का जाना हाल, हर संभव मदद का दिया भरोसा

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, मोरी/उत्तरकाशीउत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं जिला प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा ने रविवार को फ़िताड़ी गांव पहुंचकर हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड से प्रभावित परिवारों से मुलाक़ात की। इस दौरान उन्होंने पीड़ितों का हालचाल जाना और उन्हें हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। कैबिनेट मंत्री ने प्रभावित परिवारों के घरों का निरीक्षण किया और आग से हुए नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।इस दौरान मंत्री ने अग्निकांड से प्रभावित 14 परिवारों को गोट वैली प्रोजेक्ट से जोड़ने की घोषणा की। उन्होंने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि बकरियों के वितरण की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए, ताकि प्रभावित परिवारों की आजीविका को मजबूत किया जा सके और उन्हें ...
सूखा और ओलावृष्टि से तबाही: यमुना घाटी के किसानों ने प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा को सौंपा ज्ञापन

सूखा और ओलावृष्टि से तबाही: यमुना घाटी के किसानों ने प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा को सौंपा ज्ञापन

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, यमुनाघाटी/उत्तरकाशीयमुना घाटी क्षेत्र में लंबे समय से जारी भीषण सूखे और हाल ही में हुई अचानक अति ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में खड़ी फसलें और बाग-बगीचों में लगे फलदार पेड़—सेब, नाशपाती, आड़ू व प्लम—लगभग पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने क्षेत्र के किसानों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। किसानों का कहना है कि वर्षभर की मेहनत, बीज, खाद और सिंचाई पर किया गया भारी निवेश एक झटके में बर्बाद हो गया है। इस नुकसान से अन्नदाता गहरी चिंता और हताशा में डूबा हुआ है।इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तरकाशी के प्रभारी मंत्री सौरभ बहुगुणा के यमुना घाटी आगमन के दौरान किसानों एवं जनप्रतिनिधियों ने उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सूखा और ओलावृष्टि से हुई भारी क्षति का उल्लेख करते हुए प्रभावित किसानों को ...
‘शैलेश मटियानी’ राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित होंगे पुरोला के शिक्षक पृथ्वी सिंह रावत

‘शैलेश मटियानी’ राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित होंगे पुरोला के शिक्षक पृथ्वी सिंह रावत

उत्तरकाशी, देहरादून
 नीरजउत्तराखंडी, देहरादून/पुरोलाउत्तराखंड सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 19 शिक्षकों के नाम ‘शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार’ के लिए घोषित कर दिए हैं। यह प्रतिष्ठित सम्मान शिक्षकों के नवाचार, समर्पण और शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदान किया जाता है। घोषित सूची में जनपद उत्तरकाशी के पुरोला ब्लॉक स्थित आदर्श प्राथमिक विद्यालय, उदकोटी के प्रधानाध्यापक पृथ्वी सिंह रावत का नाम भी शामिल है। उन्हें विद्यालयी शिक्षा में सुधार, नवाचारपूर्ण शिक्षण पद्धतियों के प्रयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए चयनित किया गया है।शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता का सम्मान राज्य सरकार द्वारा दिया जाने वाला यह पुरस्कार प्रख्यात साहित्यकार शैलेश मटियानी की स्मृति में प्रदान किया जाता है। ...
विलुप्ति की कगार पर पहाड़ की पारंपरिक आभूषण संस्कृति: ‘बुलाक’ से ‘खगाली’ तक खोती विरासत

विलुप्ति की कगार पर पहाड़ की पारंपरिक आभूषण संस्कृति: ‘बुलाक’ से ‘खगाली’ तक खोती विरासत

उत्तरकाशी, साहित्‍य-संस्कृति
नीरजउत्तराखंडी, पुरोला, उत्तरकाशीहिमालयी क्षेत्रों- विशेषकर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों की पारंपरिक आभूषण संस्कृति आज धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंचती जा रही है. कभी महिलाओं की पहचान और सामाजिक स्थिति का प्रतीक रहे ये आभूषण अब आधुनिकता की चकाचौंध में अपनी चमक खोते नजर आ रहे हैं. परंपरा में बसती थी पहचान पहाड़ों में आभूषण केवल सजावट नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं. ‘बुलाक’ (नाक का आभूषण), ‘मुर्की’ (कानों का छोटा गहना), ‘लाबी’ और ‘खगाली’ जैसे आभूषण पीढ़ी-दर-पीढ़ी विरासत के रूप में संजोए जाते थे. इन गहनों का संबंध केवल सौंदर्य से ही नहीं, बल्कि जीवन के विभिन्न संस्कारों—जैसे विवाह, त्योहार और पारिवारिक आयोजनों से भी गहराई से जुड़ा रहा है. कई आभूषण वैवाहिक स्थिति और आर्थिक सम्पन्नता के प्रतीक माने जाते थे.‘बुलाक’ से ‘मु...
न्याय विभाग से साहित्य तक: अनोज सिंह बनाली को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’

न्याय विभाग से साहित्य तक: अनोज सिंह बनाली को मिलेगा ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’

उत्तरकाशी
इला चंद्र जोशी पुरस्कार के तहत ₹50,000 नगद, सम्मान-पत्र, स्मृति-चिन्ह और अंगवस्त्र से होगा सम्मानितहिमांतर ब्यूरो, नौगांव-बड़कोटसीमांत जनपद उत्तरकाशी ग्राम बिरगाड़ी से निकली एक सशक्त आवाज़ आज पूरे उत्तराखंड में गूंज रही है। अनोज सिंह ‘बनाली’, जो वर्तमान में उत्तराखंड के न्याय विभाग में कार्यरत हैं, को वर्ष 2025 के प्रतिष्ठित उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान (इला चंद्र जोशी पुरस्कार) के लिए चयनित किया गया है। यह सम्मान उनके साहित्यिक योगदान के साथ-साथ उनके सामाजिक सरोकारों की भी बड़ी पहचान है।कविताओं में जीवंत होता गांव और समाज अनोज सिंह ‘बनाली’ की कविताएं केवल साहित्यिक रचनाएं नहीं, बल्कि गांव और समाज का जीवंत दस्तावेज़ हैं। उनके शब्दों में सास-बहू के रिश्तों की जटिलता, बेटी-बेटे की भावनाएं, माता-पिता की उम्मीदें, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और सरकारी सेवकों की जिम्मेदारियां- सभी ...
विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

उत्तरकाशी
  ग्रामीण जीवन की पहचान रही हस्तचालित चक्की और पनचक्की पर संकटनीरज उत्तराखंडीपहाड़ के गांवों में कभी हर घर की धड़कन रही हस्तचालित चक्की (जांदरा/जांजो) और जलधारा से संचालित पनचक्की (घराट) आज विलुप्ति की कगार पर हैं। आधुनिक तकनीक, बदलती जीवनशैली और तेजी से हो रहे पलायन के बीच ये पारंपरिक साधन अब बुजुर्गों की यादों और पुराने घरों के कोनों तक सीमित होकर रह गए हैं।संस्कृति और सामूहिक जीवन का केंद्रग्रामीण क्षेत्रों में जांदरा केवल अनाज पीसने का साधन नहीं था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था। महिलाएं सुबह-शाम जांदरे पर काम करते हुए लोकगीत गाती थीं, जिससे न केवल श्रम सहज होता था बल्कि आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता था।वहीं घराट, पहाड़ों की नदियों और गाड़-गदेरों के पानी से चलने वाली पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण था। बिना बिजली के आटा पीसन...
मोरी उत्तरकाशी में आकाशीय बिजली का कहर: एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत

मोरी उत्तरकाशी में आकाशीय बिजली का कहर: एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, मोरी (उत्तरकाशी)विकासखण्ड मोरी के सला गांव के जंगलों में शनिवार को आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस प्राकृतिक आपदा में एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई, जिससे स्थानीय पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को क्षेत्र में अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने लगी। उसी दौरान ग्राम कासला के पशुपालक—चैन सिंह (पुत्र जोत सिंह), संदीप (पुत्र चैन सिंह), नारायण सिंह (पुत्र चैन सिंह) और विक्रम सिंह (पुत्र जोत सिंह)—की भेड़-बकरियां सला गांव के जंगलों में चर रही थीं। अचानक गिरी बिजली की चपेट में आने से मौके पर ही एक दर्जन से अधिक पशुओं की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इन दिनों कासला गांव के पशुपालक अपने मवेशियों को चरान-चुगान के लिए मोरी क्षेत्र के सला गांव के जंगलों में ले जाते हैं...
विलुप्त होती परंपरा: खत्म होने की कगार पर ‘घुत्तू’ से कपड़े धोने की संस्कृति

विलुप्त होती परंपरा: खत्म होने की कगार पर ‘घुत्तू’ से कपड़े धोने की संस्कृति

उत्तरकाशी
  रीठा और क्वार पात थे कभी पहाड़ का प्राकृतिक सर्फ, आधुनिकता की दौड़ में गुम होती विरासतनीरज उत्तराखंडीपहाड़ों की पारंपरिक जीवनशैली आत्मनिर्भरता और प्रकृति के साथ संतुलन की अनूठी मिसाल रही है. इसी जीवन पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था ‘घुत्तू’—कपड़े धोने का एक देसी और पर्यावरण अनुकूल तरीका, जो आज आधुनिक वाशिंग मशीनों और रासायनिक डिटर्जेंट के बीच धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया है.क्या होता था ‘घुत्तू’?‘घुत्तू’ लकड़ी या पत्थर से बना एक पारंपरिक उपकरण होता था, जिसमें कपड़ों को पानी में भिगोकर डंडों या हाथों से पीट-पीटकर साफ किया जाता था. यह तरीका न केवल प्रभावी था, बल्कि पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता था.रीठा और क्वार पात: प्राकृतिक सर्फआज जहां बाजार में केमिकल डिटर्जेंट का बोलबाला है, वहीं पहले कपड़े धोने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेम...