उत्तरकाशी

विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

विलुप्त होती परंपरा: जांदरा-घराट अब बन रहे यादों का हिस्सा

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  ग्रामीण जीवन की पहचान रही हस्तचालित चक्की और पनचक्की पर संकटनीरज उत्तराखंडीपहाड़ के गांवों में कभी हर घर की धड़कन रही हस्तचालित चक्की (जांदरा/जांजो) और जलधारा से संचालित पनचक्की (घराट) आज विलुप्ति की कगार पर हैं। आधुनिक तकनीक, बदलती जीवनशैली और तेजी से हो रहे पलायन के बीच ये पारंपरिक साधन अब बुजुर्गों की यादों और पुराने घरों के कोनों तक सीमित होकर रह गए हैं।संस्कृति और सामूहिक जीवन का केंद्रग्रामीण क्षेत्रों में जांदरा केवल अनाज पीसने का साधन नहीं था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अहम हिस्सा हुआ करता था। महिलाएं सुबह-शाम जांदरे पर काम करते हुए लोकगीत गाती थीं, जिससे न केवल श्रम सहज होता था बल्कि आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता था।वहीं घराट, पहाड़ों की नदियों और गाड़-गदेरों के पानी से चलने वाली पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण था। बिना बिजली के आटा पीसन...
मोरी उत्तरकाशी में आकाशीय बिजली का कहर: एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत

मोरी उत्तरकाशी में आकाशीय बिजली का कहर: एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, मोरी (उत्तरकाशी)विकासखण्ड मोरी के सला गांव के जंगलों में शनिवार को आकाशीय बिजली गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस प्राकृतिक आपदा में एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरियों की मौत हो गई, जिससे स्थानीय पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार को क्षेत्र में अचानक मौसम ने करवट ली और तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने लगी। उसी दौरान ग्राम कासला के पशुपालक—चैन सिंह (पुत्र जोत सिंह), संदीप (पुत्र चैन सिंह), नारायण सिंह (पुत्र चैन सिंह) और विक्रम सिंह (पुत्र जोत सिंह)—की भेड़-बकरियां सला गांव के जंगलों में चर रही थीं। अचानक गिरी बिजली की चपेट में आने से मौके पर ही एक दर्जन से अधिक पशुओं की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि इन दिनों कासला गांव के पशुपालक अपने मवेशियों को चरान-चुगान के लिए मोरी क्षेत्र के सला गांव के जंगलों में ले जाते हैं...
विलुप्त होती परंपरा: खत्म होने की कगार पर ‘घुत्तू’ से कपड़े धोने की संस्कृति

विलुप्त होती परंपरा: खत्म होने की कगार पर ‘घुत्तू’ से कपड़े धोने की संस्कृति

उत्तरकाशी
  रीठा और क्वार पात थे कभी पहाड़ का प्राकृतिक सर्फ, आधुनिकता की दौड़ में गुम होती विरासतनीरज उत्तराखंडीपहाड़ों की पारंपरिक जीवनशैली आत्मनिर्भरता और प्रकृति के साथ संतुलन की अनूठी मिसाल रही है. इसी जीवन पद्धति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था ‘घुत्तू’—कपड़े धोने का एक देसी और पर्यावरण अनुकूल तरीका, जो आज आधुनिक वाशिंग मशीनों और रासायनिक डिटर्जेंट के बीच धीरे-धीरे विलुप्ति की कगार पर पहुंच गया है.क्या होता था ‘घुत्तू’?‘घुत्तू’ लकड़ी या पत्थर से बना एक पारंपरिक उपकरण होता था, जिसमें कपड़ों को पानी में भिगोकर डंडों या हाथों से पीट-पीटकर साफ किया जाता था. यह तरीका न केवल प्रभावी था, बल्कि पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल भी माना जाता था.रीठा और क्वार पात: प्राकृतिक सर्फआज जहां बाजार में केमिकल डिटर्जेंट का बोलबाला है, वहीं पहले कपड़े धोने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेम...
ओलावृष्टि से उत्तरकाशी की यमुना घाटी में फसलों को भारी नुकसान, गंगोत्री-हर्षिल में बर्फबारी

ओलावृष्टि से उत्तरकाशी की यमुना घाटी में फसलों को भारी नुकसान, गंगोत्री-हर्षिल में बर्फबारी

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, नौगांव, उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी में सोमवार शाम मौसम ने अचानक करवट ले ली. तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने यमुना घाटी के कई क्षेत्रों में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया. आराकोट, मोरी, नौगांव, पुरोला और बड़कोट क्षेत्र में करीब आधे घंटे तक हुई तेज ओलावृष्टि से नकदी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है. वहीं ऊंचाई वाले इलाकों में ठंड बढ़ गई है और गंगोत्री व हर्षिल घाटी में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई. यमुना घाटी के नौगांव क्षेत्र की स्योंरी फल पट्टी, पुरोला के भंकोली और बड़कोट के धारी-कलोगी, मोरी के आराकोट बंगाण क्षेत्र सहित कई गांवों में अचानक ओले गिरने से खेतों में खड़ी मटर, गेहूं और सब्जियों की फसलें प्रभावित हुई हैं. ओलों की मार से खासकर मटर की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. कई जगहों पर मटर की बेलें टूट गईं और तैयार फसल खेतों में बिछ गई. किसानों के अनुसार टम...
उत्तरकाशी नौगांव में जर्जर स्कूल में पढ़ाई: अनफिट भवन में बैठने को मजबूर बच्चे, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

उत्तरकाशी नौगांव में जर्जर स्कूल में पढ़ाई: अनफिट भवन में बैठने को मजबूर बच्चे, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, नौगांव, उत्तरकाशीउत्तरकाशी जनपद के विकासखंड नौगांव के अंतर्गत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय बिंगसी में शिक्षा व्यवस्था भय और असुरक्षा के साए में संचालित हो रही है. करीब पांच दशक पहले बने इस विद्यालय भवन को वर्ष 2023 में ही तकनीकी संस्था लोनिवि बड़कोट द्वारा निष्प्रयोज्य (अनफिट) घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद यहां नन्हे बच्चों को उसी जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर किया जा रहा है. विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक है. छत से टपकते पानी से बचाव के लिए ऊपर काली तिरपाल बिछाई गई है. टिन की चादरों को सहारा देने के लिए लगाए गए तख्ते और लकड़ी की बल्लियां भी सड़ चुकी हैं. भवन की एक दीवार में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और वह तिरछी हो गई है, जिससे किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है. कमरों में फैली नमी (सीलन) के कारण बच्चों के बीमार पड़ने का खतरा भी लगातार बना ...
कंडियाल गांव में आज भी जीवित है शेर-भालू का पौराणिक नृत्य

कंडियाल गांव में आज भी जीवित है शेर-भालू का पौराणिक नृत्य

उत्तरकाशी
  मुखौटे पहनकर जीवंत होती लोककथा ढोल-दमाऊ की थाप पर पीढ़ियों से निभाई जा रही अनूठी परंपरा, लोकसंस्कृति को सहेज रहे ग्रामीणनीरज उत्तराखंडी, पुरोला/उत्तरकाशीरवांई घाटी की समृद्ध लोकसंस्कृति आज भी अनेक प्राचीन परंपराओं के माध्यम से जीवंत दिखाई देती है. विकासखंड पुरोला के कंडियाल गांव में आज भी मुखौटे पहनकर शेर और भालू का पौराणिक लोकनृत्य प्रस्तुत किया जाता है. यह अनूठा नृत्य गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है और पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को ग्रामीण आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं. गांव में विशेष अवसरों, पारंपरिक उत्सवों और सामुदायिक आयोजनों के दौरान युवक शेर और भालू के रूप में सजे विशेष मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं. ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर होने वाला यह नृत्य पूरे वातावरण को उत्साह और रोमांच से भर देता है. नृत्य के दौरान कलाकार शेर ...
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजुली बत्रा को “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026”, संस्कृति और शिक्षा में योगदान की सराहना

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राजुली बत्रा को “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026”, संस्कृति और शिक्षा में योगदान की सराहना

उत्तरकाशी
 नीरजउत्तराखंडी, पुरोला/उत्तरकाशीउत्तरकाशी जनपद के पुरोला क्षेत्र की लोक गायिका, कवयित्री और मैक्रम डिजाइन प्रशिक्षिका राजुली बत्रा आज क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें “विज्ञान प्रयोगधर्मी महिला सम्मान 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लंबे संघर्ष, सामाजिक योगदान और सांस्कृतिक संरक्षण के कार्यों की महत्वपूर्ण पहचान है। मटियानी (दुडोनी) में जन्मी और मंजियाली (नौगांव) में ससुराल होने के बावजूद राजुली बत्रा ने अपने जीवन में अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है।बचपन से ही संस्कृति के संरक्षण का संकल्प राजुली बत्रा ने वर्ष 2001 में मटियाली छानी में छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर रामलीला का आयोजन शुरू करवाया। इस राम...
सीमांत क्षेत्र के बुनकरों की आजीविका पर संकट, घट रही पारम्परिक कताई-बुनाई की परंपरा

सीमांत क्षेत्र के बुनकरों की आजीविका पर संकट, घट रही पारम्परिक कताई-बुनाई की परंपरा

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, मोरी/पुरोला/उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी के सीमांत क्षेत्रों मोरी, सरबडियार, हर्षिल और डुंडा में सदियों पुरानी पारम्परिक कताई-बुनाई की कला आज संकट के दौर से गुजर रही है। भेड़-बकरी पालन से प्राप्त ऊन पर आधारित यह कुटीर उद्योग कभी स्थानीय लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन हुआ करता था, लेकिन बदलते समय, बाजार की कमी और आधुनिक उत्पादों की प्रतिस्पर्धा के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले लगभग हर गांव में कई घरों में चरखा और करघा चलता था, लेकिन आज गिने-चुने परिवार ही इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।इन क्षेत्रों में विशेषकर महिलाएं घरों में चरखे से ऊन कातकर हाथकरघे पर शॉल, थुलमा, टोपी, मफलर और अन्य ऊनी वस्त्र तैयार करती रही हैं। यह शिल्प स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।भेड़-बकरी पालन से...
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने 38 वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित, बोले- पहाड़ की असली ताकत मातृशक्ति

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर CM पुष्कर सिंह धामी ने 38 वरिष्ठ महिलाओं को किया सम्मानित, बोले- पहाड़ की असली ताकत मातृशक्ति

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनअंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (International Women's Day) के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने रविवार को मुख्य सेवक सदन, देहरादून में आयोजित “नारी तू नारायणी” कार्यक्रम में प्रतिभाग किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षा, समाज सेवा, उद्यमिता, पर्यावरण संरक्षण, कृषि, संस्कृति और जल संरक्षण सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली राज्यभर की 38 वरिष्ठ महिलाओं को सम्मानित किया. सभी को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज उन महिलाओं का सम्मान किया जा रहा है, जिनके त्याग, संघर्ष, स्नेह और संस्कारों ने परिवार, समाज और राष्ट्र की नींव को मजबूत किया है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के स्नेह, त्याग और आशीर्वाद से पीढ़ियाँ आगे बढ़ती हैं और समाज निरंतर प्रगति करता है. महिलाएँ माँ के रूप मे...
उत्तरकाशी के ऋषभ और आशुतोष नौटियाल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की, जौनसार-बावर की आस्था चौहान का पहले प्रयास में चयन

उत्तरकाशी के ऋषभ और आशुतोष नौटियाल ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास की, जौनसार-बावर की आस्था चौहान का पहले प्रयास में चयन

उत्तरकाशी, उत्तराखंड हलचल
  जौनसार-बावर की आस्था चौहान का प्रथम प्रयास में चयन, मुहम्मद उमर हाशमी को AIR 549 रैंक नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीशुक्रवार को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा के घोषित परिणाम में उत्तराखंड के युवाओं ने शानदार सफलता हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।जनपद उत्तरकाशी के दो होनहार युवाओं ऋषभ नौटियाल और आशुतोष नौटियाल ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त की है।वहीं जौनसार-बावर क्षेत्र की आस्था चौहान ने अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी में चयन हासिल कर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी मिसाल पेश की है।इसके अलावा AIMIM उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष नय्यर काजमी के भतीजे मुहम्मद उमर हाशमी ने भी सिविल सेवा परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 549 प्राप्त कर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उत्तरकाशी के दो युवाओं ने बढ़ाया जिले का मान जनपद उत्तरकाशी के ऋषभ नौटियाल,...