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साहित्‍य-संस्कृति

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हिंदी का विश्व और विश्व की हिंदी

विश्व हिन्दी दिवस (10 जनवरी) पर विशेष  प्रो. गिरीश्वर मिश्र  वाक् या वाणी की शक्ति किसी से भी छिपी नहीं है. ऋग्वेद के दसवें मंडल के वाक सूक्त में वाक् को राष्ट्र को धारण करने और समस्त सम्पदा देने वाले देव तत्व के रूप में चित्रित करते हुए बड़े ही सुन्दर ढंग से कहा गया […]
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नए साल का जन एजेंडा क्या कहता है

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  नया ‘रमणीय’ अर्थात मनोरम कहा जाता है. नवीनता अस्तित्व में बदलाव को इंगित करती है और हर किसी के लिए आकर्षक होती है. अज्ञात और अदृष्ट को लेकर हर कोई ज्यादा ही उत्सुक और कदाचित भयभीत भी रहता है. यह आकर्षण तब अतिरिक्त महत्व अर्जित कर लेता है जब कोविड जैसी लम्बी […]
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सनातन हिन्दू धर्म की आत्मा है गीता : महात्मा गांधी

डॉ. मोहन चंद तिवारी हिन्दू-धर्म का अध्ययन करने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक हिन्दू के लिए यह गीता एकमात्र सुलभ ग्रंथ है और यदि अन्य सभी धर्मशास्त्र जलकर भस्म हो जाये तब भी इस अमर ग्रंथ के because सात सौ श्लोक यह बताने के लिए पर्याप्त होंगे कि हिन्दू-धर्म क्या है? और उसे जीवन में […]
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गीता से प्रेरित था ‘भारतराष्ट्र’ के स्वतन्त्रता आंदोलन का इतिहास

गीता जयंती ( 14 दिसंबर) पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी  प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष महीने की शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी को गीता जयंती मनाई जाती है. इस बार गीता जयंती 14 दिसंबर को मनाई जा रही है. मान्यता है कि इसी दिन because मार्गशीर्ष मास में शुक्लपक्ष की एकादशी को गीता ग्रंथ का प्रादुर्भाव […]
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स्वदेशी से स्वाधीनता और सामर्थ्य का आवाहन  

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  ‘देश’ एक विलक्षण शब्द है. एक ओर तो वह स्थान को बताता है तो दूसरी ओर दिशा का भी बोध कराता है और गंतव्य लक्ष्य की ओर भी संकेत करता है. देश धरती भी है जिसे वैदिक काल में because मातृभूमि कहा गया और पृथ्वी सूक्त में ‘माता भूमि: पुत्रोहं पृथिव्या:’ की […]
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हिन्दी बने व्यवहार और ज्ञान की भाषा

प्रो. गिरीश्वर मिश्र  अक्सर भाषा को संचार और अभिव्यक्ति के एक प्रतीकात्मक माध्यम के रूप ग्रहण किया जाता है.  यह स्वाभाविक भी है. हम अपने विचार, सुख-दुख के भाव और दृष्टिकोण दूसरों तक मुख्यत: भाषा द्वारा ही पहुंचाते हैं और संवाद संभव होता है. निश्चय ही यह भाषा की बड़ी भूमिका है परंतु इससे भाषा […]
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बाल साहित्य का स्पेस ‘मोबाइल’ की ‘स्क्रीन’ ने भर दिया

बाल दिवस पर विशेष प्रकाश उप्रेती पिछले कुछ समय से हमारी दुनिया बहुत तेजी से बदली है. इस बदलाव में एक पीढ़ी जहाँ बहुत पीछे रह गई तो वहीं दूसरी पीढ़ी बहुत आगे निकल गई है. इस बदलाव में जिसने because अहम भूमिका निभाई वह मोबाइल की स्क्रीन और एक क्लिक पर सबकुछ खोज लेना […]
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उत्तराखंड का परंपरागत रेशा शिल्प

चन्द्रशेखर तिवारी प्राचीन समय में समस्त उत्तराखण्ड में परम्परागत तौर पर विभिन्न पादप प्रजातियों के because तनों से प्राप्त रेशे से मोटे कपड़े अथवा खेती-बाड़ी व पशुपालन में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों का निर्माण किया जाता था. पहाड़ में आज से आठ-दस दशक पूर्व भी स्थानीय संसाधनों से कपड़ा बुनने का कार्य होता था. […]
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सम्प्रेषण की अद्भूत क्षमता रखते हैं कुमाउंनी लोकभाषा के समयबोधक शब्द

भुवन चन्द्र पन्त शब्द अथवा शब्दों के समुच्चय से कोई भाव या विचार बनता है. यदि मात्र एक शब्द से ही हम किसी भाव को अभिव्यक्त करने मे समर्थ हों, तो यह भाषा की बेहतरीन खूबी है. इस दिशा में दूसरी because भाषाओं की अपेक्षा लोक भाषाओं का शब्द भण्डार ज्यादा समृद्ध दिखता है. एक […]
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मानसिक स्वास्थ्य का संरक्षण आवश्यक है 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्तूबर) पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र  आयुर्वेद के अनुसार यदि आत्मा , मन और इंद्रियाँ प्रसन्न रहें तो आदमी को स्वस्थ कहते हैं. ऐसा स्वस्थ आदमी ही सक्रिय हो कर उत्पादक कार्यों को पूरा करते हुए न केवल अपने लक्ष्यों की पूर्ति कर पाता है बल्कि समाज और देश की […]