
कृष्ण को पाने के लिए हमें कृष्ण ही होना होगा!
कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेषसुनीता भट्ट पैन्यूली
ऐसा क्यों है कि बहुत सारे लोग मुझे जान नहीं पाते हैं? भगवदगीता में श्री कृष्ण ने कहा है. ऐसा इसलिए है शायद हम अपनी भौतिकता में इतने रत हैं कि स्वयं से परिचित होने के लिए कभी समय ही नहीं निकाला है हमने स्वयं के लिए. जीवन में आत्म तत्व का दर्शन बहुत साधारण सी परिभाषा है कृष्ण होने की.
ज्योतिष
जैसे मक्खन परिष्कृत उपादान है दूध का उसी तरह आत्मा का विशुद्ध रूप ही कृष्ण होना है अथार्त जिस तरह दूध से दही व दही को बिलोकर, मथकर मक्खन ऊपरी सतह पर पहुंच जाता है गडमड,संघर्ष करते हुए उसी तरह जीवन प्रक्रिया में धक्के खाकर तूफानी व पथरीले संघर्ष से गुज़र कर आत्मा के परिष्कृत स्वरुप में पहुंचने कि प्रकिया ही कृष्ण होना है.
ज्योतिष
कृष्ण बनने के लिए गूढ़ होना अपरिहार्य नहीं है कृष्ण यानी भौतिकता और अध्यात्म के मध्य वह समतल ज़मीन का संतुलन जहां व्यक्...









