समसामयिक

चारधाम परियोजना पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते चारधाम घाटियों के लोग

चारधाम परियोजना पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते चारधाम घाटियों के लोग

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एकजुट राज्य चारधाम हाई पावर कमेटी ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर खुशी जताईहिमांतर ब्‍यूरोएकजुट राज्य चारधाम हाई पावर कमेटी एवं उत्तराखंड की आम जनता, विशेषकर प्रांत के ग्रामीण निवासी और चारधाम परियोजना सड़क चौड़ीकरण के पर्यावरणीय और सामाजिक सरोकारों को लेकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 8 सितम्बर, 2020 के इस विषय में आए निर्णय का स्वागत करते हैं. परियोजना के अन्तर्गत प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई रोड ट्रांसपोर्ट so अपने खुद के 5.5 मीटर सड़क के पैमाने को ताक पर रख कर 12मीटर (डबल लेंन पेव शोल्डर) के मानक पर तूल देते हुए जिस तरह अंधाधुन पहाड़ खोद रहे थे, उस पर न्यायलय द्वारा रोक लगाते हुए, MoRTH के खुद के मानक को स्वीकारने का और सही मानक के आधार पर पहाड़ काटने का फैसला बहुत सराहनीय है.ज्ञात ज्ञात हो कि केंद्र व राज्य सरकार पहाडी मानकों के विपरीत अपने मनमाने तरीके से इस परि...
माता सुंदरी कॉलेज में संकाय संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन

माता सुंदरी कॉलेज में संकाय संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन

समसामयिक
15 सितंबर  को होगा  ‘सूचना एवं संप्रेषण तकनीक (ICT) आधारित ई-शिक्षण और ई-अधिगम का नव परिप्रेक्ष्य: डिजिटल शिक्षाशास्त्र’ का आयोजन हिमांतर ब्यूरोमाता सुंदरी कॉलेज और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पंडित मदनमोहन मालवीय राष्ट्रीय शिक्षक एवं शिक्षण मिशन, शिक्षक अध्ययन केंद्र, रामानुज कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान but में आगामी 15 सितंबर से ‘सूचना एवं संप्रेषण तकनीक (ICT) आधारित ई-शिक्षण और ई-अधिगम का नव परिप्रेक्ष्य: डिजिटल शिक्षाशास्त्र’ विषय पर द्विसाप्ताहिक संकाय संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. डिजिटल दरअसल कोविड-19 वैश्विक महामारी ने पारंपरिक भारतीय शिक्षा-व्यवस्था को काफी प्रभावित किया है. महामारी के चलते शिक्षण-व्यवस्था में काफी बदलाव हुए हैं और शिक्षा व्यवस्था ने डिजिटल शिक्षण पद्धति को अपनाया है. डिजिटल शिक्षण पद्धति का उपयोग इलेक्ट्रोनिक प्रौद्योगिकी शिक्षण और शिक्...
सोनू सूद ने साझा तो बियर ग्रिल्स ने सराहया राजेश के बनाए पोस्टर

सोनू सूद ने साझा तो बियर ग्रिल्स ने सराहया राजेश के बनाए पोस्टर

समसामयिक
हिमांतर डेस्‍कऋषिकेश के प्रसिद्ध चित्रकार राजेश चन्द्र ने कोरोना काल के महानायक सुपरस्टार सोनू सूद का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें समर्पित एक पोस्टर बना के उन्हें ट्वीट किया, जिसे सोनू सूद ने खुद 2 बार पसन्द कर शेयर किया है. पोस्टर ट्विट होते ही वायरल हो चुका है और सोशल मीडिया में लोग उसे खूब शेयर कर रहे है. राजेश ने ट्वीट करते हुए लिखा कि “सोनू सर मैंने अपनी माता जी को आपके बारे में बताया है कि किस तरह से आप इस समय आमजन की मुसीबतो में मदद कर रहे हैं. आप एक मसीहा से कम नही हैं. ईश्वर हर माँ को आप जैसा बेटा दे.” आपने अपने कर्मों से दिखा दिया कि क्यों मानव को ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति कहा जाता है. राजेश ने बताया कि सोनू सर के पोस्टर शेयर करने पर वह बहुत खुश हैं क्योंकि जब कोई व्यक्ति नि:स्‍वार्थ भाव से समाज की सेवा करता है तो उन्हें यह बताना बहुत जरूरी होता है कि लोग उनसे कितना प्यार करते...
यूसर्क द्वारा एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार

यूसर्क द्वारा एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेबिनार

समसामयिक
हिमांतर ब्‍योरोउत्तराखण्ड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) एवं अखिल भारतीय आयुर्वेदिक संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के संयुक्त तत्वाधान में “Psychological Well-being among Youth” विषय पर एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन गया. अन्तर्राष्ट्रीय वेबीनार के मुख्य अतिथि प्रो. एन. के. जोशी, कुलपति, कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल ने अपने सम्बोधन में वेबिनार के आयोजन को महत्वपूर्ण बताया एवं वर्तमान में काविड-19 से युवाओं पर पड़ने वाले विपरीत प्रभाव के बारे में विस्तार से समझाया एवं विषय को समय की आवश्यकता बताया. वेबिनार के संरक्षक एम्स के निदेशक पदमश्री प्रो. रविकान्त एवं यूसर्क के निदेशक प्रो. दुर्गेश पंत के द्वारा सभी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का स्वागत एवं आभार प्रकट किया गया. वेबिनार में यूनाइटेड किंगडम के प्रख्यात सलाहकार एवं मनोचिकत्सक डॉ. मोहन चावला के द्वारा मानसिक स्वास्थ्...
गगनचुंबी इमारतों से सोसायटी तो बन गई पर पुस्तकालय क्यों नहीं बन रहे?

गगनचुंबी इमारतों से सोसायटी तो बन गई पर पुस्तकालय क्यों नहीं बन रहे?

समसामयिक
हिमांतर ब्‍यूरोनोएडा एक्सटेंशन के एस एस्पायर सोसायटी में रविवार को लघु पुस्तकालय का उद्घाटन हुआ. सोसायटी के वरिष्ठ जनों, युवाओं और महिलाओं की उपस्थिति में विधिवत सरस्वती पूजन के जरिए पुस्तकालय को सोसायटी के निवासियों के लिए खोला गया. हिंदी और अंग्रेजी की ढ़ाई सौ से ज्यादा किताबों के जरिए सोसायटी में पुस्तकालय की नींव पड़ी और अन्य सोसायटी के निवासियों को भी अपने-अपने यहां पुस्तकालय खोलने का संदेश दिया गया. सोसायटी के निवासियों के साथ ही अन्य मुख्य अतिथियों की मौजूदगी में सामूहिक विमर्श के जरिए पुस्तकों के महत्व पर प्रकाश डाला गया. मंच का संचालन करते हुए अमर उजाला के चीफ सब एडिटर ललित फुलारा ने कहा कि पुस्तकों के जरिए ही हम एक बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं. पुस्तकें, उसी तरह से हैं, जैसे हमारे घर के बुजुर्ग. जिस तरह से घर के बुजुर्गों की छांव में हमें सबल मिलता है और हमारा चारित्रिक...
‘वन्दे मातरम्’: जन-गण-मन के आंदोलन का राष्ट्रगीत  

‘वन्दे मातरम्’: जन-गण-मन के आंदोलन का राष्ट्रगीत  

समसामयिक
डॉ. मोहन चंद तिवारीदेश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की 74वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है. हर देश का स्वतंत्रता प्राप्ति के आंदोलन से जुड़ा एक संघर्षपूर्ण इतिहास होता है. भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का भी एक क्रांतिकारी और देशभक्ति पूर्ण इतिहास है, जिसकी जानकारी प्रत्येक भारतवासी को होनी चाहिए. हमें अपने संविधान सम्मत राष्ट्रगान, 'जन गण मन' राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्’ और तिरंगे झंडे के इतिहास के बारे में भी यह तथ्यात्मक जानकारी होनी चाहिए कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में इन राष्ट्रीय प्रतीकों की कितनी अहम भूमिका रही थी? यह इसलिए भी आवश्यक होना चाहिए जैसे हम हर वर्ष 15 अगस्त को लालकिले पर राष्ट्र ध्वज तिरंगा फहराना राष्ट्रीय महोत्सव के रूप में मनाते हैं, उसी तरह स्वन्त्रता आंदोलन को प्रेरित करने वाले राष्ट्रगान 'जन गण मन', राष्ट्रगीत 'वन्दे मातरम्’ तथा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बारे में जानकारी ...
आखन देखी

आखन देखी

समसामयिक
ललित फुलाराजब मैं यह लिख रहा हूं.. जुलाई बीत चुका है. फुटपाथ, सड़कें, गली-मोहल्ले कोरोना से निर्भय हैं! जीवन की गतिशीलता निर्बाध चल रही है. लोगों के चेहरों पर मास्क ज़रूर हैं, पर भीतर का डर धीरे-धीरे कम होने लगा है. रोज़मर्रा के कामकाज़ पर लौटे व्यक्तियों ने आशावादी रवैये से विषाणु के भय को भीतर से परास्त कर दिया है. घर के अंदर बैठे व्यक्तियों की चिंता ज्यादा है, बाहर निकलने वाले जनों ने सारी चीजें नियति पर छोड़ दी हैं. वैसे ही जैसे असहाय, अगले पल की चिंता, दु:ख, भय और परेशानी ईश्वर पर छोड़ देता है.दरअसल, पेट की भूख दुनिया की हर महामारी से बड़ी होती है. पेट की भूख के चलते ही तीन महीने पहले तक जो सड़कें भयग्रसित हो गईं थी, अब वहां हलचल है एवं स्थितियां सामान्य होने लगी हैं. मास्क व सैनिटाइज़र को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाते हुए लोग अपने कर्म पर लौट चले हैं. गली-मोहल्लों में कुल्फि...
राजनीति में अदला बदली

राजनीति में अदला बदली

समसामयिक
भाग—2डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र राजनीति में परिवर्तन आंतरिक अंतर्विरोध के कारण भी होता है. यह अंतर्विरोध पार्टी विशेष कम होकर व्यक्तिगत रूप में ज्यादा दिखता है, जब एक प्रभावशाली नेता अपनी ही पार्टी से संबंध विच्छेद कर दूसरी पार्टी में शामिल हो जाता है. उस वक्त नेता के समर्थक जितने भी सांसद/विधायक होते हैं, वह भी विरोधी हो जाते हैं. ऐसे में राजनीति की परिवर्तनशील प्रक्रिया चरित्रहीन हो जाता है. जिससे स्थिति अस्थिर हो जाती है और यह अस्थिरता राजनीति के उन सवालों को खड़ा करता है, जिसे देखने की कोशिश कभी संवैधानिक रूप में हुई ही नहीं. इसके कई उदाहरण अलग-अलग राज्यों के राजनीतिक उतार-चढ़ाव में मिल जाता है. इसलिए जिस राजनीति में आत्ममंथन की जरूरत है, कारणों की समीक्षा की जरूरत है, वहां सिर्फ राजनीतिक आलोचनाओं के अलावा कुछ नहीं है.आरोप-प्रत्यारोप के बीच राजनीतिक नैतिकता खत्म होती नजर ...
संकट में है आज विश्वमैत्री का प्रतीक हिमालय पुष्प ‘ब्रह्मकमल’

संकट में है आज विश्वमैत्री का प्रतीक हिमालय पुष्प ‘ब्रह्मकमल’

समसामयिक
2 अगस्त विश्वमैत्री दिवस पर विशेषडॉ. मोहन चन्द तिवारीआज 2अगस्त प्रथम रविवार के दिन को अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस अवसर पर मैं विश्वमैत्री का संदेश देने वाले संजीवनी तुल्य हिमालय के दुर्लभ पुष्प ‘ब्रह्मकमल’ के सम्बंध में सभी पर्यावरण प्रेमी मित्रों को बताना चाहता हूं कि खलजनों की मित्रता के समान भारतराष्ट्र की अस्मिता का प्रतीक यह उत्तराखंड का राज्यपुष्प 'ब्रह्मकमल’ आज संकट के दौर में है. ‘ब्रह्मकमल’ ऊँचाई वाले क्षेत्रों का एक दुर्लभ पुष्प है जो कि सिर्फ हिमालय,उत्तरी बर्मा और दक्षिण-पश्चिम चीन में पाया जाता है.वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से ‘ब्रह्मकमल’ एस्टेरेसी कुल का पौधा है. इसका वैज्ञानिक वानस्पतिक नाम ‘सोसेरिया ओबोवेलाटा’ Saussurea obvallata है.सामान्य तौर पर ‘ब्रह्मकमल’ हिमालय की पहाड़ी ढलानों या 3000-5000 मीटर की ऊँचाई में पाया जाता है. वर्त...
राजनीति में अदला बदली

राजनीति में अदला बदली

समसामयिक
भाग—1डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्रराजनीति, जिसका संबंध समाज में शासन और उससे संबंधित नियम या नीति से है. यह नीति और नियम, राज करने वालों से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों पर प्रभाव डालता है. परंतु सत्ता के कई संदर्भ में इसकी दिशा और दशा बदल जाती है, और तब यह सत्ता विशेष के हाथों की कठपुतली मात्र बनकर रह जाती है. यहीं से राजनीति की अदला बदली का खेल शुरू होता है.सत्ता पाने के लिए और अपने अनुसार समाज में नीति का निर्माण करने के लिए वैश्विक इतिहास में कई संघर्षों को देखा जा सकता है. साथ ही, इन संघर्षों में नीति बनाने वालों की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि नीति निर्माता समय काल और स्थिति को समझता है और उसी के अनुरूप अपने विचारों को व्यक्त करता है. कुछ राजनीति के विचारक स्वतंत्र रूप में अपने विचारों को सभी के समक्ष प्रस्तुत करते दिखते हैं, जिससे उन्हें कई परेशानियों का सामना भ...