Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
देशभर में  200 से ज्यादा स्थानों पर मनाया जायेगा हिमालय दिवस!

देशभर में  200 से ज्यादा स्थानों पर मनाया जायेगा हिमालय दिवस!

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनहर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 9 सितंबर को हिमालय दिवस देश भर में मनाया जायेगा. इस दिवस को मनाए जाने के पीछे मुख्य कारण हिमालय को श्रद्धांजलि देने के साथ—साथ उन तमाम मुद्दे जो हिमालय because के आज तक बिखरे हुए और नकारे हुए हैं उनके प्रति देश—दुनिया का ध्यान खींचना है.ज्योतिष इस बार के हिमालय दिवस का विषय ही हिमालय ज्ञान— विज्ञान पर केन्द्रित है. यह भी स्वीकारना पड़ेगा कि हिमालय देश में ज्ञान— विज्ञान का केन्द्र और श्रोत रहा है. वो चाहे आध्यात्म से जुड़ी हों, आस्था और संस्कृति संस्कार से, देश दुनिया को हिमालय ने ही परोसे हैं. इतना ही नहीं दुनिया भर में  प्रसिद्ध बड़ी नदियां गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र यह because सब हिमालय की ही देेन है जो करीब 1,9 बिलियन लोगों को पाल रही हैं. हवा, मिट्टी भी हिमालय की ही देन है जो देश को कई तरह के लाभ देती है और उनमें से हरित क्रांति...
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया मुख्यमंत्री ‘गढ़भोज’ व ‘बीजबम’ पुस्तक का लोकार्पण

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया मुख्यमंत्री ‘गढ़भोज’ व ‘बीजबम’ पुस्तक का लोकार्पण

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री आवास स्थित गढ़भोज व बीजबम नामक पुस्तक का लोकार्पण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया. उन्होंने कहा कि इन दोनों पुस्तक की सामग्री लोक समाज से जुड़ी हुई है. because इसलिए इन पुस्तकों का महत्व है. इस सामग्री को शिक्षण संस्थाएं भी अध्ययन का पार्ट बनाये. उन्होंने कहा कि गढ़भोज सच मे बाजार का रूप ले तो एक तरफ यह हमारे राज्य की पहचान बनाएगा और दूसरी तरफ लोगो के हाथों स्वरोजगार होगा. जबकि बीजबम पुस्तिका में सम्मलित सामग्री जता रही है कि इस अभियान की सफलता यही है कि बढ़ते मानव व वन्य जीवों के संघर्ष पर स्वस्फूर्त रोक लग जायेगी. ज्योतिष उन्होंने पुस्तक के बीजबम पुस्तक के लेखक डॉ. अरविंद दरमोडा, गढ़भोज पुस्तक के लेखक द्वारिका प्रसाद सेमवाल को बधाई देते कहा कि यह सामग्री लेखकों ने काल्पनिक तौर पर एकत्रित because नही की है यह गढ़भोज और बीजबम अभियान की सफलता का परि...
इटलेश्वर महादेव : जालली क्षेत्र का सिद्ध स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग

इटलेश्वर महादेव : जालली क्षेत्र का सिद्ध स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग

लोक पर्व-त्योहार
डॉ. मोहन चंद तिवारीजब भी मुझे अपने पैतृक निवास ग्राम जोयूं में जाने का अवसर मिलता है तो अपने गांव से 4 कि.मी. की दूरी पर जालली स्थित इटलेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन अवश्य करता हूं. संयोग से तीन वर्ष पूर्व जब सितंबर के महीने में अपने गांव गया था तो उस मौके पर जालली क्षेत्र में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भी बहुत धूमधाम से because मनाया जा रहा है. स्थानीय क्षेत्रवासियों के द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर राधाकृष्ण को डोली में बिठाकर शोभायात्रा निकाली जा रही थी. इसी समय जब मेरा इटलेश्वर महादेव के मंदिर में दर्शनार्थ जाना हुआ तो संयोग से उसी समय राधाकृष्ण जी की डोली का भी मंदिर प्रांगण में प्रवेश हो रहा था और प्रभुकृपा से मुझे इटलेश्वर मंदिर में ही भगवान शिव के साथ साथ राधा कृष्ण जी के दर्शनों का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ. ज्योतिष यह हमारे देश की उदात्त परम्परा रही है कि जन्माष्टमी ...
इतिहास के पन्नों से आज भी गायब हैं उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के कुछ मेले

इतिहास के पन्नों से आज भी गायब हैं उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के कुछ मेले

लोक पर्व-त्योहार
हरियाली पर्व के उपलक्ष्य में लगने वाला नगदूण कीजातर/ जातोर (मेला) (जखोल गांव नगदूण का मेला)चैन सिंह रावत उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के सुदूरवर्ती विकास खंड मोरी के जखोल गांव में सावन महीने की संक्रांति 15-16 अगस्त के मध्य मनाए जाने वाला एक प्राचीन औषधीय मेला नगदूण मेले के नाम से जाना जाता है, इस मेले का आयोजन पंजगायींपट्टी के आठ गांव जखोल, धारा,सावनी, सटुडी, सुनकुण्डी सिरगा पाँवतल्ला पाँवमल्ला एवं बाहर से आए हुए आगंतुक जो कि सावन महीने में अपनी बहनों की ढोकरी/कंडी (मायके पक्ष से बेटी के ससुराल में लिया जाना वाला यादगार खाद्य सामग्री) लेकर आते हैं इस मेले के एक दिन पहले ही आ जाते हैं तथा मेले में सम्मिलित होते हैं.नगदूण मेले का आयोजन 1 दिन पहले 8 गांव के लोगों एवं बाहर से आए आगंतुक गण नगदूण के लिए जंगल की छनियों मे (जहां पशुचारक अल्पकाल के लिए निवास करते हैं) अपने साथ प्राथम...
आज महाभारत में शकुनि हैं दुर्योधन हैं पर न कृष्ण हैं, न अर्जुन

आज महाभारत में शकुनि हैं दुर्योधन हैं पर न कृष्ण हैं, न अर्जुन

लोक पर्व-त्योहार
कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेषडॉ. मोहन चंद तिवारीआज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व समूचे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है.आज के ही दिन भगवान् कृष्ण ने द्वापर युग में दुराचारी कंस के अत्याचार और आतंक से मुक्ति दिलाने तथा धर्म की पुनर्स्थापना के लिए जन्म लिया था. गीता में भगवान् कृष्ण स्वयं कहते हैं कि "जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म की वृद्धि होती है तो मैं धर्म की स्थापना के लिए हर युग में अवतार लेता हूं- “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत. अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् . धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ॥" -गीता‚ 4.7-8 ज्योतिष गीता में धर्म की अवधारणा सज्जन के संरक्षण और दुर्जन के विनाश से जुड़ी है तो वहीं आधुनिक संदर्भ में ‘धर्म’ से तात्पर्य है समाज व्यवस्था को युगानुसारी मानवीय मूल्यों की दृष्टि से पुन...
कृष्ण को पाने के लिए हमें कृष्ण ही होना होगा!

कृष्ण को पाने के लिए हमें कृष्ण ही होना होगा!

लोक पर्व-त्योहार
कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेषसुनीता भट्ट पैन्यूली ऐसा क्यों है कि बहुत सारे लोग मुझे जान नहीं पाते हैं? भगवदगीता में श्री कृष्ण ने कहा है. ऐसा इसलिए है शायद हम अपनी भौतिकता में इतने रत हैं कि स्वयं से परिचित होने के लिए कभी समय ही नहीं निकाला है हमने स्वयं के लिए. जीवन में आत्म तत्व का दर्शन बहुत साधारण सी परिभाषा है कृष्ण होने की. ज्योतिष जैसे मक्खन परिष्कृत उपादान है दूध का उसी तरह आत्मा का विशुद्ध रूप ही कृष्ण होना है अथार्त जिस तरह दूध से दही व दही को बिलोकर, मथकर मक्खन  ऊपरी सतह पर पहुंच जाता है गडमड,संघर्ष करते हुए उसी तरह जीवन प्रक्रिया में धक्के खाकर तूफानी व पथरीले संघर्ष से गुज़र कर  आत्मा के परिष्कृत स्वरुप में पहुंचने कि प्रकिया ही कृष्ण होना है. ज्योतिष कृष्ण बनने के लिए गूढ़ होना अपरिहार्य नहीं है कृष्ण यानी  भौतिकता और अध्यात्म के मध्य वह समतल ज़मीन का संतुलन जहां व्यक्...
 सबके और सबसे परे: अतिक्रामी श्रीकृष्ण

 सबके और सबसे परे: अतिक्रामी श्रीकृष्ण

लोक पर्व-त्योहार
जन्माष्टमी (30 अगस्त) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  भारतीय जीवन में आस्था के सजीव आधार because भगवान श्रीकृष्ण के जितने नाम और रूप हैं वे मनुष्य की कल्पना की परीक्षा लेते से लगते हैं. देवकीसुत, यदुनंदन, माधव, मुकुंद, केशव, श्याम, गोपाल, गोपिका-वल्लभ, गोविन्द, अच्युत, दामोदर, मोहन, यशोदानंदन, वासुदेव, राधावर, मधुसूदन, गोवर्धनधारी, कन्हैया, नन्द-नंदन, मुरारी, लीला-पुरुषोत्तम, बांके-बिहारी, मुरलीधर, लालबिहारी, वनमाली, वृन्दावन-विहारी आदि सभी नाम ख़ास-ख़ास देश-काल से जुड़े हुए हैं और उनके साथ-साथ जुडीं हुई हैं अनेक रोचक और मर्मस्पर्शी कथाएँ जो श्रीकृष्ण की अनेकानेक छवियों की सुधियों में सराबोर करती चलती हैं.संसाधनों पूरे भारत में साहित्य, लोक-कला, संगीत, नृत्य, चित्र-कला, तथा स्थापत्य सभी क्षेत्रों में श्रीकृष्ण की अमिट छाप देखी जा सकती है. चित्रों में माखन चोर बाल श्रीकृष्ण, मोर पंख, क...
शारदा, मैं अपना जीवन अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता  के लिए त्याग कर रहा हूँ!

शारदा, मैं अपना जीवन अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता  के लिए त्याग कर रहा हूँ!

स्मृति-शेष
जेपी मैठाणीदेश की आजादी के लिए फांसी के फंदे पर झूलने वाले महान क्रांतिकारी शहीद मेजर दुर्गामल्ल को शत शत नमन. शहीद मेजर दुर्गा मल्ल मूल रूप से देहरादून जिले के डोईवाला के रहने वाले थे. महान क्रांतिकारी दुर्गामल्ल का जन्म एक जुलाई  1913  को गोरखा राइफल के नायब सूबेदार गंगाराम मल्ल के घर हुआ था. माताजी का नाम श्रीमती पार्वती देवी था. बचपन से ही दुर्गा मल्ल अपने साथ के बालकों में सबसे अधिक प्रतिभावान और बहादुर थे. गोरखा मिलिट्री मिडिल स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा हासिल की, जिसे अब गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज के नाम से जाना जाता है. देहरादून के विख्यात गांधीवादी स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर चन्दन सिंह, बीर खड़क बहादुर सिंह बिष्ट, पंडित ईश्वरानंद गोरखा  और अमर सिंह थापा से प्रेरित होकर दुर्गा मल्ल ने् स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया. कवि और समाज सुधारक  मेजर  बहादुर सिंह बराल  और संगीत...
उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति ने शहीद मेजर दुर्गामल का 77वां श्रद्धांजलि दिवस मनाया

उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति ने शहीद मेजर दुर्गामल का 77वां श्रद्धांजलि दिवस मनाया

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादून उत्तराखंड राज्य नेपाली भाषा समिति एवं सहयोगी संस्थाओं के तत्वावधान में आज भारत स्वतंत्रता आंदोलन में उत्तराखंड के प्रथम शहीद मेजर दुर्गा मल्ल (आजाद हिंद फौज) के बलिदान के स्मरण में 77वां श्रद्धांजलि दिवस, शहीद मेजर दुर्गा मल्ल पार्क गढ़ी कैंट में मनाया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी,गोर्खाली सुधार सभा अध्यक्ष पदम सिंह थापा एवं समिति अध्यक्ष बालकृष्ण बराल द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया. तत्पश्चात शहीद मेजर दुर्गा मल्ल जी की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं अतिथियों द्वारा किया गया. मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने शहीद को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि भविष्य ऐसे कार्यक्रमों को बड़े स्तर पर किया जाएगा, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी वीर सपूतों को ह...
सालम के क्रांतिकारी शहीदों को नहीं भुलाया जा सकता

सालम के क्रांतिकारी शहीदों को नहीं भुलाया जा सकता

स्मृति-शेष
शहीदी दिवस (25 अगस्त) पर विशेष  डॉ. मोहन चंद तिवारीआज के ही के दिन 25 अगस्त,1942 को जैंती तहसील के धामद्यो में देश की आजादी के लिए शांतिपूर्ण आन्दोलन कर रहे सालम के निहत्थे लोगों पर अंग्रेज सैनिकों द्वारा जिस बर्बरता से because गोलियां चलाई गईं,उसमें चौकुना गांव के नर सिंह धानक और कांडे निवासी टीका सिंह कन्याल शहीद हो गये थे. नैनीताल भारत छोड़ो’ आंदोलन में कुमाऊं के because जनपद अल्मोड़ा में स्थित सालम पट्टी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.अल्मोड़ा जनपद के पूर्वी छोर पर बसे सालम क्षेत्र को पनार नदी दो हिस्सों में बांटती है. यहां की 25 अगस्त 1942 की अविस्मरणीय घटना इतिहास के पन्नों में ‘सालम की जनक्रांति’ के नाम से जानी जाती है. नैनीतालकिंतु देश इन सालम के क्रांतिकारियों के बारे में कितना जानता है? वह तो दूर की बात है,उत्तराखंड के बहुत कम लोगों को ही यह मालूम है कि देश की आजादी...