Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
आदित्य चौहान ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर रवांई घाटी का नाम किया रोशन 

आदित्य चौहान ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर रवांई घाटी का नाम किया रोशन 

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी विकासखंड मोरी आराकोट बंगाण क्षेत्र के किरोली गांव निवासी because आदित्य चौहान ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर जिला व रवांई घाटी का नाम रोशन किया है. उन्होंने 315 रैंक हासिल की है.बंगाण क्षेत्र के किरोली गांव निवासी गब्बर सिंह चौहान के बेटे आदित्य सिंह चौहान ने इस because वर्ष यूपीएससी की परीक्षा पास की है. आदित्य ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई दिल्ली से की है. आदित्य सिंह चौहान की ऑल इंडिया में 315 रैंक प्राप्त की है. कम्प्यूटर सांइस में किया बीटेक ज्योतिष आदित्य चौहान ने इस वर्ष यूपीएससी की परीक्षा पास की है. आदित्य ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई दिल्ली से की है. इसके बाद उन्होंने 2016 में गोविन्द बल्लभ पंत विश्व विद्यालय पंतनगर से कम्प्यूटर सांइस में बीटेक किया है. उनकी इस सफलता पर because रवांई घाटी में खुशी का माहौल है. आदित्य के पिता गब्बर सिं...
‘द्वितीयं ब्रह्मचारिणी’ : देवी का सच्चिदानन्दमयी स्वरूप

‘द्वितीयं ब्रह्मचारिणी’ : देवी का सच्चिदानन्दमयी स्वरूप

लोक पर्व-त्योहार
नवरात्र चर्चा - 2  डॉ. मोहन चंद तिवारीकल नवरात्र के प्रथम दिन ‘शैलपुत्री’ देवी के पर्यावरण because वैज्ञानिक स्वरूप पर प्रकाश डाला गया जो प्रकृति परमेश्वरीका प्रधान वात्सल्यमयी रूप होने के कारण पहला रूप है. आज नवरात्र के दूसरे दिन देवी के ‘ब्रह्मचारिणी’ रूप की पूजा-अर्चनाकी जा रही है.ज्योतिष देवी के इस दूसरे ‘ब्रह्मचारिणी’ because स्वरूप को प्रकृति के सच्चिदानन्दमय ब्रह्मस्वरूप के रूप में निरूपित किया जा सकता है. ऋग्वेद के ‘देवीसूक्त’ में अम्भृण ऋषि की पुत्री वाग्देवी ब्रह्मस्वरूपा होकर समस्त जगत को ज्ञानमय बनाती है और रुद्रबाण से अज्ञान का विनाश करती है -ज्योतिष  “अहं रुद्राय धनुरा तनोमि ब्रह्मद्विषे because शरवे हन्तवा उ.ज्योतिष अहं जनाय because समदं कृष्णोम्यहं द्यावापृथिवी because आ विवेश..” -(ऋ.10.125.6) ‘देव्यथर्वशीर्ष’ में भगवती देवों से अपने because स्व...
‘प्रथमं शैलपुत्री च’ : हिमालय पर्यावरण की रक्षिका देवी

‘प्रथमं शैलपुत्री च’ : हिमालय पर्यावरण की रक्षिका देवी

लोक पर्व-त्योहार
डॉ. मोहन चंद तिवारीशारदीय नवरात्र-1       आज शारदीय नवरात्र का पहला दिन है. आज नवदुर्गाओं में से देवी के पहले स्वरूप 'शैलपुत्री' की समाराधना की जाती है. पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से पर्वतराज हिमालय की प्रधान भूमिका है.because यह पर्वत मौसम नियंता होने के साथ-साथ विश्व पर्यावरण को नियंत्रित करने का भी केन्द्रीय संस्थान है. हिमालय क्षेत्र के इसी राष्ट्रीय महत्त्व को उजागर करने के लिए देवी के नौ रूपों में हिमालय प्रकृति को ‘शैलपुत्री’ के रूप में सर्वप्रथम स्थान दिया गया है. नवरात्र के पहले दिन अर्थात् प्रतिपदा की तिथि को ‘शैलपुत्री’ की विशेष पूजा-अर्चना इसलिए भी की जाती क्योंकि हिमालय क्षेत्र शैलपुत्री की क्रीड़ाभूमि व तपोभूमि दोनों है. दक्षपुत्री सती ने पार्वती के रूप में हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया तो इसी स्थान पर आदिदेव शिव के साथ उनका विवाह हुआ.ज्योतिष प्रतिमा विज्ञान क...
शारदीय नवरात्र : नव शक्तियों के साथ सायुज्य का पर्व

शारदीय नवरात्र : नव शक्तियों के साथ सायुज्य का पर्व

लोक पर्व-त्योहार
डॉ. मोहन चंद तिवारी पितृ पक्ष के समाप्त होते ही कल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 7 अक्टूबर 2021 से शारदीय नवरात्र नवरात्र शुरू हो रहे हैं. नवरात्रों के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है. because इस बार नवरात्र में चतुर्थी तिथि का क्षय होने से शारदीय नवरात्र आठ दिन के ही होंगे. इन नौ दिनों में  नवदुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और सभी कष्टों का निवारण होता है.ज्योतिष नवरात्र 2021 की तिथियां घटस्थापना तिथि          :    7 अक्टूबर 2021 द्वितीया तिथि                :    8 अक्टूबर 2021 तृतीया व चतुर्थी तिथि   :    9 अक्टूबर 2021 पंचमी तिथि                  :    10 अक्टूबर 2021 षष्ठी तिथि                     :    11 अक्टूबर 2021 सप्तमी तिथि                :    12 अक्टूबर 2021 अष्टमी तिथि          ...
क्या है रेशम मार्ग?

क्या है रेशम मार्ग?

ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-21मंजू कालावोल्गा से लेकर गंगा तक  के प्राणी ने अपनी जरूरतों के लिए हजारों मीलों का सफर तय  किया  है! कभी उसने शिकार की खोज में यात्रा की, तो  कभी आशियाने के लिए वह भटकता रहा है!  शनै-शनै जब  उसमें थोड़ी चेतना  की सुगबुगाहट हुई तो उसने  व्यापार के लिए  भी यात्राएं  आरंभ कर दी!   इन  because यात्राओं मेंअपने मवेशियों को ही उसने अपना सहचर बनाया! पुराने  समय  में कच्चे पक्के रास्तों पर चलने के लिए  पासपोर्ट और वीजा की जगह  हौसलों की जरूरत होती थी.  टेढे-  मेढे  रास्ते, मौसम की अनिश्चितता, जंगली जानवरों और लुटेरों का हर सफर करने वाले को सामना करना पड़ता था. ऐसा ही एक मार्ग हुआ करता था #रेशम_मार्ग या #सिल्क_रूट. यह मार्ग ईसा से लगभग दो सौ साल पहले से ईसा की दूसरी सदी तक बहुत फला-फूला. उस समय चीन के हान वंश का शासन हुआ करता था. चीन से मध्य एशिया होते हुए यूरोप से bec...
मृत्यु तक स्वयं से जूझती रही वह

मृत्यु तक स्वयं से जूझती रही वह

किस्से-कहानियां
त्याग: सत्य घटना पर आधारित कहानीप्रभा पाण्डेय आज से पन्द्रह-बीस साल पहले तक हमारे पहाड़ की महिलाओं की स्थिति बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं थी क्योंकि मैंने अपने ही गांव में अनेक महिलाओं को इन परिस्थितियों की भेंट चढ़ते देखा. रामदेव नाम के एक व्यक्ति का सबसे बड़ा एक बेटा और चार छोटी बेटियां थी, बहुत कम पढ़ा-लिखा और स्वभाव से कुछ अहंकारी होने के because कारण रामदेव बेकार था. परन्तु समय ने उसे ऐसा सबक सिखाया कि उसने पण्डिताई का काम शुरू कर दिया.इस काम में उसे अधिकतर घर से बाहर रहना पड़ता. चारों तेज तर्रार बेटियां, तेज तर्रार माँ के साथ अपनी  थोड़ी बहुत पुश्तैनी खेती के साथ-साथ दूसरों के खेतों में मजदूरी कर  अपना गुजारा कर लेते थे जैसे-तैसे दो बड़ी बेटियों का विवाह भी हो गया.ज्योतिष एक दिन रामदेव का छोटा भाई अपने बच्चों व पत्नी सहित पुश्तैनी घर आ गया. वह  भी भाबर क्षेत्र में रहकर पण्डिताई ...
गाँधी जयंती के अवसर पर चित्रकला प्रतियोगिता

गाँधी जयंती के अवसर पर चित्रकला प्रतियोगिता

देहरादून
हिमांतर डेस्क, देहरादूनगाँधी जयंती के पावन अवसर गोर्खाली सुधार सभा द्वारा चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राओं एवम् सामाजिक संस्थाओं के बच्चों ने प्रतिभाग किया. मुख्य अतिथि उत्तराखंड की स्वर कोकिला, गूँज सामाजिक संस्था की अध्‍यक्षा, कर्मठ समाजसेवी मातृशक्‍ति डा. सोनिया आनंद रावत, विशिष्ट अतिथि श्रीमती विनिता बैनर्जी, गोर्खाली सुधार सभा के अध्‍यक्ष श्री पदम सिंह थापाजी उपाध्यक्ष सुश्री पूजा सुब्बा ने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधीजी की प्रतिमा के आगे दीप प्रज्वलित करते हुए, श्रद्धा सुमन अर्पित किये. अध्यक्ष जी ने सभी प्रतिभागियों का मनोबल बढा़ते हुए कहा कि सभा सदैव शिक्षा के क्षेत्र में मेघावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्तियाँ भी प्रदान करती है. आज भी हमने इन प्रतिभावान कलाकारो को मंच प्रदान करने का प्रयास किया है. मुख्य अतिथि डा. सोनिया आनंद ने आ...
मुख्यमंत्री ने राज्य आन्दोलनकारियों को मुज्जफरनगर शहीद स्मारक में दी श्रद्धाजंलि

मुख्यमंत्री ने राज्य आन्दोलनकारियों को मुज्जफरनगर शहीद स्मारक में दी श्रद्धाजंलि

देहरादून
राज्य आन्दोलनकारियों को राजकीय मेडिकल कालेजों में मिलेगी मुफ्त उपचार की सुविधा : मुख्यमंत्री हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार शहीदों के सपनों और राज्य आन्दोलनकारियों की भावनाओं के अनुरूप उत्तराखंड को हर क्षेत्र में आगे बढ़ायेगी. जनता सरकार के भाव को समझे. यह बात उन्होंने उत्तराखंड शहीद स्मारक रामपुर तिराहा, मुजफ्फरनगर में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी शहीदों की पुण्य स्मृति पर because उन्हें श्रद्धाजलि अर्पित करते हुए कही. उन्होंने राज्य आन्दोलनकारियों के हित में कई घोषणायें कीं, जिनमें राज्य आन्दोलनकारियों को सरकारी अस्पतालों की तर्ज पर राजकीय मेडिकल कालेजों में मुफ्त उपचार उपलब्ध करवाने, उद्योग धंधों में राज्य आन्दोलकारियों और उनके परिजनों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और विभिन्न विभागों में सेवारत राज्य आन्दोलनकारियों को हटाये जाने ...
केवल ग्यारह मिनट की दूरी कम करने के लिए 11,000 पेड़ों पर चलेगी आरी!

केवल ग्यारह मिनट की दूरी कम करने के लिए 11,000 पेड़ों पर चलेगी आरी!

देहरादून
हिमांतर ब्यूरो, देहरादूनहरे भरे पेड़ों की अपेक्षा यदि सोने और चांदी से लदे पेड़ हों तो क्या जीवन जीने के योग्य भी रह जायेगा? इस यक्ष प्रश्न का उत्तर हम सभी जानने के बावजूद इसे अनदेखा कर रहे हैं. वनों पर आधारित because वन्य जीवन के बिना पृथ्वी पर जीवन अकल्पनीय है. वन न केवल हमारी भूमि के लिए फेफड़े का काम करते हैं बल्कि वे भूमि की रक्षा एवं पृथ्वी पर विभिन्न प्रकार के जीवन के सृजन में भी सहायक होते हैं. बंजर भूमि को मनुष्य जीवन के लिए अनुकूल बनाते हैं, साथ ही वायु को शुद्ध कर जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि  करते हैं.ज्योतिष यदि सरल शब्दों में प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को समझाया जाए तो इतना ही समझना है कि पेड़ों पर घोंसला बनाने वाले पक्षी मवेशियों के कीट कीटाणु को खा कर नष्ट करते हैं, जिससे वे रोग मुक्त रहते हैं. वृक्षों पर आरी चलाने से इसका सीधा असर जीवन श्रृंखला की प्रक्रिया पर पड़ेगा...
क्या सच में गाँधी तुम घटते जा रहे हो!..

क्या सच में गाँधी तुम घटते जा रहे हो!..

साहित्‍य-संस्कृति
गांधी जयंती (2 अक्टूबर) पर विशेषप्रकाश उप्रेती देखो गाँधी तुम्हारे चेले कितनी मौज में हैं. because तुम हाड़-मांस की काया के भीतर थे लेकिन तुम्हारे चेले उसके बाहर हैं. इस देश में सबसे आसान और सबसे कठिन गाँधीवादी बनना है. अगर गाँधी का मतलब नैतिक बल, स्वयं को संशोधित करना, आचरण की शुद्धता और अभ्यास है तो वो सबसे मुश्किल है लेकिन अगर कुर्ता, पजामा, टोपी, झोला और कोल्हापुरी चप्पलों का अर्थ ही गाँधीवादी होना है तो सबसे आसान है. because मुझे पता है गाँधी तुम भी अब इस दूसरी जमात वाले लोगों को ही चाहते हो.ज्योतिष आज तुम्हारे चेले इसी जमात के तो हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो वो वहाँ नज़र आते जहाँ किसान आंदोलन कर रहे हैं, जहाँ एक माँ अपनी बेटी के लिए आँचल फैला रही है, जहाँ because भात-भात कहते हुए एक लड़की प्राण त्याग देती है, जहाँ सैकडों मजदूर सड़कों पर थे, जहाँ महामारी में इलाज के लिए लोग तड़प रहे...