• हिमांतर ब्यूरो, देहरादून

मुख्यमंत्री आवास स्थित गढ़भोज व बीजबम नामक पुस्तक का लोकार्पण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया. उन्होंने कहा कि इन दोनों पुस्तक की सामग्री लोक समाज से जुड़ी हुई है. because इसलिए इन पुस्तकों का महत्व है. इस सामग्री को शिक्षण संस्थाएं भी अध्ययन का पार्ट बनाये. उन्होंने कहा कि गढ़भोज सच मे बाजार का रूप ले तो एक तरफ यह हमारे राज्य की पहचान बनाएगा और दूसरी तरफ लोगो के हाथों स्वरोजगार होगा. जबकि बीजबम पुस्तिका में सम्मलित सामग्री जता रही है कि इस अभियान की सफलता यही है कि बढ़ते मानव व वन्य जीवों के संघर्ष पर स्वस्फूर्त रोक लग जायेगी.

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उन्होंने पुस्तक के बीजबम पुस्तक के लेखक डॉ. अरविंद दरमोडा, गढ़भोज पुस्तक के लेखक द्वारिका प्रसाद सेमवाल को बधाई देते कहा कि यह सामग्री लेखकों ने काल्पनिक तौर पर एकत्रित because नही की है यह गढ़भोज और बीजबम अभियान की सफलता का परिणाम है. ऐसी पुस्तको की आज नितांत आवश्यकता है जो समाज को दिशा दे, समाज मे रचनात्मक माहौल बनाये.

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इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. मोहन सिंह रावत गांववासी, सेवानिवृत वरिष्ठ आईएएस डॉ. कमल टावरी, समाजसेवी व उद्योगपति हरिदत्त शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किये. because सुनाम धन्य पूर्व IAS डॉक्टर – कमल टावरी जी ने बताया की – जो अ सरकारी है वही असरकारी है. यानी उसी का असर होता है. उन्होंने राज्य स्तर पर वोलंटरी action सेल बनाने का आग्रह किया. पूर्व सचिव एवं आईएएस तवारी जी ने 40 से अधिक किताबें भी लिखी हैं.

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कार्यक्रम में HNB गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय because श्रीनगर गढ़वाल में भूगोल विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. मोहन पंवार, डॉ. अरविंद दरमोडा, रंगकर्मी व लेखक प्रेम पंचोली, डॉ. प्रणव पॉल, मुख्यमंत्री आवास समन्वयक किशोर भट्ट, नरेश नौटियाल, जेपी मैठाणी, आदि ने अपने विचार व्यक्त किये.

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गढ़भोज पुस्तिका के लेखक द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि इन पुस्तको में जन अभियानों के छोटे छोटे परिणामो की कहानियां है. उन्होंने कहा कि बीजबम अभियान और गढ़भोज अभियान because एक लोक अभियान है जिसमे लोक जीवन से जुड़ी बातें है. आजीविका की बाते है, लोक संसाधनों को कैसे आजीविका का साधन बनाये ऐसे कई प्रयोग इन पुस्तको की सामग्री है. उन्होंने कहा कि पारिस्थितकी तत्रं की पुनर्बहाली, स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार, वन्यजीव व मानव में बढ़ते संघर्ष को खत्म करने के लिए बीजबम अभियान और गढ़भोज अभियान सफल कार्यक्रम है.

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कार्यक्रम का सञ्चालन करते हुए डॉ. अरविन्द दरमोड़ा जी ने मुख्य मंत्री जी के सहज स्वीकृति – जो कार्यों की सीमा से जुडी थी उसको ध्यान में रखते हुए आग्रह किया की आगे – because इस तरह के नए प्रयास हर सरकार के समय में जारी रहने चाहिए. कार्यक्रम में लम्बे इंतज़ार के दौरान – गोवंश, बद्री गाय, कूड़ा करकट प्रबंधन, आल वेदर रोड से हो रही दिक्कतें, पलायन- स्वास्थ्य और शिक्षा के बाद – स्वरोजगार पर बेहद सार्थक चर्चा रही. पहाड़े उत्पादों के विपणन के साथ – उत्पादन कैसे बढ़ाएं इस पर चर्चा को जमीनी हकीकतों के साथ आगे बढाने के प्रयास पर जोर दिया.

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हमने पीपलकोटी के ग्रोथ सेंटर की बनी रिंगाल की टोकरी में तुलसी का पौधा दिया मुख्यमंत्री जी को भेंट दी गयी. आज की यह चर्चा लगभग दो घंटे चली. और आशा है आगे अच्छे because परिणाम आयेंगे. कार्यक्रम का संचालन पुस्तक के लेखक/संपादक व पर्वतीय शोधकेन्द्र HNB गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर गढ़वाल के नोडल अधिकारी डॉ. अरविंद दरमोडा ने किया. इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के सामाजिक, सांस्कृतिक व साहित्यिक कार्यकर्ता आदि सम्मिलित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केबिनेट मंत्री श्री मोहन सिंह रावत गांववासी जी ने की. श्री किशोर चन्द्र भट्ट ने कार्यक्रम की पृष्ठ भूमि से माने मुख्यमंत्री जी को अभिमुख करवाया.

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मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने बचपन के भोजन और जीवन में सात्विकता के महत्व पर बात कही. उन्होंने कहा- पद- प्रतिष्ठा और माँ सम्मान – समय के साथ बदलता रहता है- लेकिन जो हम भविष्य की पीढ़ियों के लिए छोड़कर जाते हैं वही असल जीवन है, इसलिए बीज बम अभियान एक शानदार कार्य है. उन्होंने ये भी because कहा की पेड़ पौधो का महत्व- कोरोना के दौरान सबकी समझ में आया है जब एक एक ऑक्सीजन सिलेंडर के लिये लोगों को भटकना पड़ा है .उन्होंने बीज बम अभियान को जन अभियान बनाने का आग्रह  भी किया और – फलदार पौधों के रोपण पर जोर दिया. ये खेल खेल में पर्यवरण संरक्षण की अनूठी पहल है.

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आज के इस कार्यक्रम में डॉ मोहन पंवार, डॉ अरविन्द दरमोड़ा, नरेश नौटियाल, कैलाश नेगी, प्रेम पंचोली, कमलेश गुरूरानी, पूर्व सचिव उमेश चन्द्र, विकास पन्त, अभिषेक भट्ट, because अभिषेक थपलियाल, अरुण राणा, मेजर सुम्मी सबरवाल, रक्षित शर्मा, भवान सिंह, विनीता जोशी, कासा के राज्य समन्वयक श्री सुरेश सतपथी जी, अमित कार्मिक, माधवेन्द्र रावत, संजय पंवार, रामचंद्र चमोली, उद्योगपति श्री हरी दत्त शर्मा, पूर्णिमा, श्री संदीप उनियाल, रक्षित शर्मा, डॉक्टर प्रणव पाल, प्रेम कश्यप, डॉ. यतीश वशिष्ठ, पत्रकार ब्रिज भूषण दुबे आदि उपस्थित थे.

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एक महत्वपूर्ण अवलोकन- कार्यक्रम के समापन पर श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने जाते हुए श्री मोहन सिंह रावत गांववासी जी के पाँव छुए- ये उनके व्यवहार और सहजपन को दर्शाता है. because एक तरफ वो इतने सरल हैं- दूसरी ओर उन्होंने इस राज्य के सबसे भ्रष्ट अफसर मुख्य सचिव को 72 घंटे में बाहर कर दिया. ये एक बड़ा साहस है. ये काम बड़े-बड़े सूरमा मुख्यमंत्री नहीं कर पाए थे.

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Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास

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