Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
भद्रज मंदिर मानो बांज की सरणी से चमकती मणि

भद्रज मंदिर मानो बांज की सरणी से चमकती मणि

ट्रैवलॉग
भद्रज मंदिर: यात्रा वृत्तांतसुनीता भट्ट पैन्यूली जिज्ञासा से था आकुल मन वह मिट्टी, हुई कब तन्मय मैं, विश्वास मांगती थी प्रतिक्षण आधार पा गयी निश्चय मैं! बाधा-विरोध अनुकूल बने अंतर्चेतन अरूणोदय में, पर भूल विहंस मृदु फूल बने मैं विजयी प्रिय,तेरी जय में. -सुमित्रा नंदन पंत जिस चरम पर पहुंचकर आकांक्षाओं की पूर्ति तो हो जाती है, किंतु जिज्ञासायें नये स्वरूप में जन्म लेकर मन को और विस्मित कर देती हैं,ऐसी भावनाओं को शब्दों में कैसे अभिव्यक्त किया जाये ? जब अंतर्मन में  प्रश्न उठते हैं. हम यहां क्यों आये हैं?कौन सी अदृश्य शक्ति हमें यहां खींच लायी है? हम नहीं आते तो क्या उस सर्वशक्तिमान की अनूस्यूत सत्ता को महसूस करने से हम वंचित न रह जाते? क्यों विराजती है यह सर्वोच्चमान शक्ति मानवीय पहुंच से इतनी दूर? शायद धार्मिक यात्राओं के दौरान मानव की इस चित्तवृत्ति  हेतु कि हम कहां जा रहे है...
हिमाचल: करसोग में दिखाए गए विलुप्त होते पुराने अनाजों के बीज और खिलाए गए व्यंजन

हिमाचल: करसोग में दिखाए गए विलुप्त होते पुराने अनाजों के बीज और खिलाए गए व्यंजन

हिमाचल-प्रदेश
करसोग में बनाया जाएगा जैविक कृषि के लिए बाजार बनेगा फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशनहिमांतर, करसोगएक समय था जब हमारे देश में अनाज की कमी हो गई थी. उस समय सरकारों ने अपने देशी बीजों को विकसित करने की बजाए विदेशी हाइब्रिड बीजों को तवज्जो दी गई. इन बीजों से अनाज की कमी तो पूरी हो गई लेकिन इन बीजों के कारण हमारे देश की खेती विदेशी कंपनियों के हाथों का खिलौना बन गई. बाहर से जो बीज आए उनके लिए भरी मात्रा में रासायनिक खाद और दवाइयों का इस्तेमाल भी किया गया. अत्यधिक पानी का दोहन किया गया। इसका दुष्परिणाम ये हुआ कि हमारे देश की मिट्टी बर्बाद हो गई, इंसानों में कई किस्म की बीमारियों को बढ़ावा मिला. इन सबके बुरे परिणाम हुए उनको ठीक करने की कोशिश के तहत पर्वतीय टिकाऊ खेती अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश द्वारा पूरे प्रदेश में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. महिला मंडलों के साथ मिलकर पुराने अनाजो...
हाथी स्वांग के साथ नौ दिवसीय पांडव मंडाण का समापन

हाथी स्वांग के साथ नौ दिवसीय पांडव मंडाण का समापन

उत्तरकाशी
अंतिम दिवस पर पांडव मंडाण के साथ ही हाथी नृत्य कर किया समापननीरज उत्तराखंडीविकासखण्ड के कमल सिराईं पट्टी के करड़ा गांव में नौ दिवसीय पांडव नवरात्रों का सोमबार सांय को पांडव मंडाण लगाकर हाथी स्वांग के साथ पांडव नवरात्रों का पूजा अर्चना के because साथ समापन किया गया. मंगशीर की दीपावली के दूसरे दिन बलिराज से सुरु हुए पांडव नवरात्रों का सोमबार देर सांय तक चले हाथी स्वांग, पांडव मंडाण व हवन पूजन कर गांव की सुख, समृद्धि की मंगल कामनाओं के साथ समापन किया गया. ज्योतिष बताते चले कि रवांई घाटी के नौगांव व पुरोला विकासखण्ड में मुख्यतः सभी गांवों में थात पूजन के साथ साथ पांडव नवरात्रों की भी एक धार्मिक व अनूठी लोक परम्परा सदियों से चली because आ रही है. क्षेत्र में लगभग सभी गांवों में मुख्यतः पांडव नवरात्रों का आयोजन मंगशीर माह में होने वाली बग्वाल व देवलांग पर्व के बाद बलिराज के दिन से शुर...
नम आंखों से पूरा देश दे रहा सीडीएस जनरल रावत को अंतिम विदाई, श्रद्धांजलि देने पहुंची कई हस्तियां

नम आंखों से पूरा देश दे रहा सीडीएस जनरल रावत को अंतिम विदाई, श्रद्धांजलि देने पहुंची कई हस्तियां

देश—विदेश
हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीभारत अपने पंसदीदा शीर्ष सैन्य अधिकारी सीडीएस जनरल बिपिन रावत को नम आंखों से अंतिम विदाई दे रहा है. दिल्ली स्थिति उनके आधिकारिक निवास 3, कामराज मार्ग पर जानी मानी शख्सियतें और बड़ी संख्या में आम लोग उन्हें आखिरी सलामी देने पहुंचे.ज्योतिषकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, एनएसए अजीत डोभाल, राहुल गांधी, उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन कौशिक, पूर्व because मुख्यमंत्री हरीश रावत, हरियाणा के सीएम मनोजर खट्टर, एनसीपी चीफ शरद पवार, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल समेत तमाम राजनीतिक शख्सियतें और तीनों सेनाओं के बड़े अफसर सीडीएस जनरल बिपिन रावत because और उनकी पत्नी मधुलिका रावत को पार्थिव शरीर पर श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे हैं. उन्‍हें श्रद्धांजलि देने वालों में विदेशी राजनयिक भी शामिल हैं. यहां प...
रवांई की संस्कृति, परम्पराओं व आस्था का अनूठा मेल है थाती माता पूजन

रवांई की संस्कृति, परम्पराओं व आस्था का अनूठा मेल है थाती माता पूजन

उत्तरकाशी
पुरोला गांव में पांडव मंडाण के साथ धूमधाम से मनाई गई मंगशीर बग्वाल, गांव में 9 दिवसीय थात पूजन समारोह शुरूनीरज उत्तराखंडीनगर पंचायत क्षेत्र के पुरोला गांव में शनिवार रातभर मंगशीर बग्वाल के साथ ही 9दिवसीय थात माता पूजन में पांडव मंडाण धूमधाम से मनाया गया. गांव में चल रहे 9 दिवसीय थात (जाग) माता की विशेष पूजा अर्चना का भी इन दिनों आयोजन किया जा रहा है. ज्योतिष थात माता की यह विशेष पूजा अर्चना हर पांच वर्षों में गांव की शुख-शांति,समृद्धि के लिए 9 दिनों तक की जाती है. रात-भर हवन पूजा अर्चना पांडव मंडाण रवांई की संस्कृति आस्था व परम्पराओं का because नजारा देखने को मिलता है. 9 दिवसीय पूजा के अंतिम दिन गांव व क्षेत्र की सुख-समृद्वि व बूरी आत्माओं से बचानें को क्षेत्र के ईष्ट ओडारू जखंडी देवताओं की पालकी के साथ विद्वान पंडित कच्चे सूत का धागा, सात प्रकार के अनाज (सतनजा), कद्दू आदि की...
डा. मनमोहन सिंह चौहान की अगुवाई में एनडीआरआई करनाल देश बना का शीर्ष कृषि संस्थान

डा. मनमोहन सिंह चौहान की अगुवाई में एनडीआरआई करनाल देश बना का शीर्ष कृषि संस्थान

देश—विदेश
वाई एस बिष्टएनडीआरआई के निदेशक डा. चौहान की गिनती देश के शीर्ष पशु विज्ञानियों में होती है. इससे पहले, केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा के निदेशक रहे डा. मनमोहन सिंह चैहान भारत में जानवरों की क्लोनिंग के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं. उन्हें कृषि और दुग्ध पालन के क्षेत्र में इनोवेटिव पहल के लिए जाना जाता है. राष्ट्रीय डेरी because अनुसंधान संस्थान ने देश के प्रमुख डेरी अनुसंधान संस्थान के रूप में पिछले पांच दशकों से डेरी उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रबंधन और मानव संसाधन विकास के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम कर रहा है और इनमें इसको विशेषज्ञता हासिल हुई है.ज्योतिष डा. मनमोहन सिंह चौहान ने एक बार फिर देवभूमि को गौरवान्वित किया है. उनकी अगुवाई में लगातार दूसरी बार करनाल स्थित राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान - एनडीआरआई को देश because में सबसे बेहतर कृषि संस्थान आंका गया है. भारतीय ...
कीवी मेन! विक्रम बिष्ट के स्वरोजगार मॉ​डल नें पलायन को दिखाया आईना, पहाड़ में रोजगार सृजन की जगा रहे हैं अलख

कीवी मेन! विक्रम बिष्ट के स्वरोजगार मॉ​डल नें पलायन को दिखाया आईना, पहाड़ में रोजगार सृजन की जगा रहे हैं अलख

खेती-बाड़ी
ग्राउंड जीरो से संजय चौहान कुछ लोगों को पहाड़ आज भी पहाड़ नजर आता है. वहीं दूसरी ओर हमारे बीच कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने बिना किसी शोर शराबे के चुपचाप अपनी मेहनत और हौंसलों से पहाड़ की परिभाषा because ही बदल कर रख दी है. ऐसे लोग आज पलायन की पीडा से कराह रहे पहाड़ के लिए उम्मीद की किरण नजर आ रहे हैं. आज ऐसे ही पहाडी के बारें में आपको रूबरू करवाते हैं जिन्होंने पहाड़ में स्वरोजगार का मॉ​डल तैयार करके एक उदाहरण प्रस्तुत किया है. लोग उन्हें कीवी मेन के नाम से भी जानते हैं.ज्योतिष सीमांत जनपद चमोली के कर्णप्रयाग ब्लाक की सिदोली पट्टी में गौचर से 20 किमी की दूरी पर स्थित मुल्या गांव (ग्वाड) निवासी 48 वर्षीय विक्रम सिंह बिष्ट आज लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बनें हुये हैं. उनका स्वरोजगार मॉ​डल लोगों को बेहद पसंद आ रहा है, जिस कारण लोग स्वरोजगार के लिए अपने गांव वापस लौट रहें हैं. बहुमुखी प्रत...
ग्लासगो के संकल्प हिमालय को बर्बाद कर देंगे?

ग्लासगो के संकल्प हिमालय को बर्बाद कर देंगे?

पर्यावरण
गगनदीप सिंहस्काटलैंड के शहर ग्लासगो में सीओपी26 (कान्फ्रेंस ऑफ पार्टिस 26) का आयोजन 1 नवंबर से शुरु हुआ था. भारत का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें शामिल होते हुए जिन समझौतों और संकल्पों पर हस्ताक्षर किए हैं इससे न केवल भारत पर अमेरिका, ब्रिटेन जैसे साम्राज्यवादी देशों को शिकंजा बुरी तरह से कसा जाएगा बल्कि यह पूरे देश सहित because हिमालय क्षेत्र के लिए बुरे नतीजे निकलने वाले हैं. नेट जिरो 2070, गो ग्रीन गो 2030, वन ग्रीड वन सोलर, कार्बन उत्सर्जन में कटौती, नवीकरणीय उर्जा जैसे जो नारे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बहुत आकर्षित और सुंदर लग रहे हैं लेकिन इससे उतर भारत में जल संकट, बाढ़ और पूरे because पर्यावरण के लिए खतरा पैदा होगा. इन समझौतों से भारत में जलवायु वित्त के नाम से विदेशी निवेश के बढ़ावे से देश के जल-जंगल-जमीन जैसे मूलभूत संसाधन ज्यादा से ज्यादा विदेशी कंपनियों के हाथों...
सरकारों को वोट से प्रिय कुछ नहीं!

सरकारों को वोट से प्रिय कुछ नहीं!

देहरादून
सरकार का फिर एक फैसला वापसप्रकाश उप्रेती उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार ने देवस्थानम बोर्ड को भंग कर दिया है. देवस्थानम बोर्ड एक्ट मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार ने बनाया था. इस बोर्ड के तहत केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री because और यमुनोत्री से जुड़े 51 मंदिरों की देखरेख का प्रावधान था. इसके गठन से ही पुरोहित बोर्ड का विरोध कर रहे थे. उनका मानना था कि इस बोर्ड से मंदिरों के परंपरागत अधिकार खत्म हो जाएंगे.ज्योतिष इसी के चलते कुछ समय पहले केदारनाथ धाम में दर्शन करने गए त्रिवेंद्र रावत का पुरोहितों ने भारी विरोध किया था. because इस विरोध प्रदर्शन के कारण वे दर्शन भी नहीं कर पाए और बिना दर्शन के ही वापस लौट आए थे. जब से इस बोर्ड का गठन किया तब से ही पुरोहित इसका विरोध कर रहे थे और एक तरह से आंदोलनरत थे.ज्योतिष इस मामले के राजनैतिक प्रभाव को समझते और पुरोहितों के व...
सुकेत रियासत के राजा के सामंती शोषण के खिलाफ लड़ने वाले दो क्रांतिकारी विद्रोही, जिनको भूल चुकी है सरकार

सुकेत रियासत के राजा के सामंती शोषण के खिलाफ लड़ने वाले दो क्रांतिकारी विद्रोही, जिनको भूल चुकी है सरकार

हिमाचल-प्रदेश
मनदीप कुमारहिमाचल प्रदेश की सुकेत रियासत के राजाओं का शासन बेहद क्रूर और आम जनता का शोषण करने वाला रहा है. 8वीं शताब्दी में बंगाल से आए सेन वंशी राजाओं ने यहां पर निवास because करने वाली डूंगर जाति नरसंहार कर अपनी रियासत की स्थापना की थी. स्थानीय राजाओं, ठाकुरों को उन्होंने आपसी फूट के कारण हरा दिया था. लगभग 1300 सालों सुकेत रियासत में राजाओं का शासन रहा. इसके खिलाफ बहुत सारे लोग लड़े, इन्हीं में सो दो विद्रोही क्रांतिकारी हुए हैं भनेरा गांव के तांती राम और न्हारू राम, जिनका जिक्र न तो हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा जारी पुस्तक में है न उनको कभी स्वतंत्रता सेनानी होने का प्रमाण पत्र मिला.ज्योतिष क्रांतिकारी तांती राम, गांव भनेरा इस बात में कोई संदेह नहीं है कि because राजाओं के शासन काल में आम जनता पर खूब अत्याचार होते थे. इन अत्याचारों में राजाओं के कारकुन, प्यादे, चौधरी, नंबरदार आद...