September 18, 2020
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लोक पर्व/त्योहार

अपनी थाती-माटी से आज भी जुड़े हैं रवांल्‍टे

अपने पारंपरिक व्‍यंजनों और संस्‍कृति को आज भी संजोए हुए हैं रवांई-जौनपुर एवं जौनसार-बावर के बांशिदे आशिता डोभाल जब आप कहीं भी जाते हैं तो आपको वहां के परिवेश में एक नयापन व अनोखापन देखने को मिलता है और आप में एक अलग तरह की अनुभूति महसूस होती है. जब आप वहां की प्राकृतिक सुंदरता, […]
साहित्यिक हलचल

विधवा नारी के उत्पीड़न की करुण कथा है उपन्यास ‘ओ इजा’

 (शम्भूदत्त सती का व्यक्तित्व व कृतित्व-1) डॉ. मोहन चन्द तिवारी कुमाउनी आंचलिक साहित्य के प्रतिष्ठाप्राप्त  रचनाकार शम्भूदत्त सती जी की रचनाधर्मिता से  पहाड़ के स्थानीय लोग प्रायः कम ही परिचित हैं, किन्तु पिछले तीन दशकों से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक कुमाउनी आंचलिक साहित्यकार के रूप में उभरे सती जी ने अपनी खास पहचान […]
किस्से/कहानियां

सिस्टम द्वारा की गई हत्या!

पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाओं, अस्पतालों व डॉक्टरों की अनुपलब्धता के कारण बहुत—सी गर्भवती महिलाएं असमय मृत्यु का शिकार हो जाती हैं. ऐसी ही पीड़ा को  उजागर करती है यह कहानी कमलेश चंद्र जोशी रुकमा आज बहुत खुश थी कि उसकी जिंदगी में एक नए मेहमान का आगमन होने वाला था और अब वह दो से […]
संस्मरण

ओ हरिये ईजा..कुड़ी मथपन आग ए गो रे

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—38 प्रकाश उप्रेती ‘ओ…हरिये ईजा ..ओ.. हरिये ईज… त्यूमर कुड़ी मथपन आग ए गो रे’ (हरीश की माँ… तुम्हारे घर के ऊपर तक आग पहुँच गई है). आज बात उसी- “जंगलों में लगने वाली आग” की. मई-जून का महीना था. पत्ते सूख के झड़ चुके थे. पेड़ कहीं से […]
ट्रैवलॉग

दीव से ओखा तक

गुजरात यात्रा – सोमनाथ से द्वारिकाधीश तक डॉ. हरेन्द्र सिंह असवाल  यात्रायें मनुष्य जीवन जीवन की आदिम अवस्था से जुड़ी हुई हैं. चरैवेति चरैवेति से लेकर अनन्त जिज्ञासायें मनुष्य को घेरे रहती हैं. इस बार दिल्ली की लंबी प्रदूषित अवधि ने मुझे बाहर निकलने के लिए इतना विवश किया कि बिना किसी योजना के मै […]
समसामयिक

राजनीति में अदला बदली

भाग—1 डॉ. रुद्रेश नारायण मिश्र राजनीति, जिसका संबंध समाज में शासन और उससे संबंधित नियम या नीति से है. यह नीति और नियम, राज करने वालों से लेकर समाज के विभिन्न वर्गों पर प्रभाव डालता है. परंतु सत्ता के कई संदर्भ में इसकी दिशा और दशा बदल जाती है, और तब यह सत्ता विशेष के […]
संस्मरण

“खाव” जब आबाद थे

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—37 प्रकाश उप्रेती पहाड़ में पानी समस्या भी है और समाधान भी. एक समय में हमारे यहाँ पानी ही पानी था. इतना पानी कि सरकार ने जगह-जगह सीमेंट की बड़ी-बड़ी टंकियाँ बना डाली थी. जब हमारी पीढ़ी सीमेंट की टंकियाँ देख रही थी तो ठीक उससे पहले वाली पीढ़ी […]
जल विज्ञान

कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ में कृषिमूलक जलप्रबन्धन और ‘वाटर हारवेस्टिंग’

भारत की जल संस्कृति-11 डॉ. मोहन चन्द तिवारी (7 फरवरी, 2013 को रामजस कालेज, ‘संस्कृत परिषद्’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘संस्कृत: वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य’ में मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य “कौटिल्य के अर्थशास्त्र में जलप्रबन्धन और वाटर हारवेस्टिंग” से सम्बद्ध लेख) वैदिक काल और बौद्ध काल तक कृषि व्यवस्था के विकास के साथ साथ राज्य के […]
उत्तराखंड

… जब दो लोगों की दुश्मनी दो गांवों में बदल गई!

सीतलू नाणसेऊ- खाटा ‘खशिया’ फकीरा सिहं चौहान स्नेही रुक जाओ! हक्कु, इन बेजुबान जानवरों को  इतनी क्रूरता से मत मारो. सीतलू हांफ्ता-हांफ्ता हक्कु के नजदीक पहुंचा. मगर हक्कु के आंखो पर तो  दुष्टता सवार थी. हक्कु भेड़ों तथा उनके नादान बच्चों पर  ताबड़तोड़ काथ के छिठे (डंडे) बरसा रहा था. सीतलू ने हक्कु का पंजा […]