हिमालयी संस्कृति के संरक्षण हेतु लेखक गाँव और IGNCA ने किया समझौता

IGNCA & Writer Village Lekhak Gaon

 

देश के पहले लेखक गाँव और आईजीएनसीए, नई दिल्ली के बीच सांस्कृतिक एवं शोध सहयोग हेतु एमओयू पर हस्ताक्षर

  • हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्ली

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में हिमालय की सांस्कृतिक चेतना, साहित्य, कला और लोकविरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्यरत देश के पहले लेखक गाँव, देहरादून तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के मध्य सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं शोध संबंधी सहयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल को भारतीय संस्कृति, साहित्य, कला और विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। आईजीएनसीए के डीन (प्रशासन) प्रो. रमेश गौड़ ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का वास्तविक स्वरूप उसकी लोक परंपराओं, साहित्य और सामुदायिक स्मृतियों में निहित है। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में लेखक गाँव द्वारा किए जा रहे कार्य भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

IGNCA & Lekhak Gaon

अपने संबोधन में आईजीएनसीए के सदस्य सचिव प्रो. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी विविधता, परंपराओं और ज्ञान-संपदा में निहित है। उन्होंने कहा कि हिमालय भारतीय सभ्यता की आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है और वहाँ की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। लेखक गाँव की अभिनव पहल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास भारतीय संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

लेखक गाँव की निदेशक विदुषी निशंक ने अपने वक्तव्य में कहा कि लेखक गाँव केवल एक भौतिक परिसर नहीं, बल्कि साहित्य, संस्कृति, कला, ज्ञान और सृजन का जीवंत केंद्र है। उन्होंने कहा कि लेखक गाँव का उद्देश्य हिमालय की लोक परंपराओं, लोकभाषाओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हुए उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सहयोग से इस दिशा में नए आयाम स्थापित होंगे तथा हिमालयी क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और शोध कार्यों को नई गति मिलेगी।

Arushi Nishank

इस अवसर पर लेखक गाँव पर आधारित एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन किया गया। वृत्तचित्र में हिमालय की गोद में स्थापित लेखक गाँव की संकल्पना, उसके उद्देश्य तथा साहित्य, संस्कृति, ज्ञान और सृजन के क्षेत्र में उसके योगदान को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। वृत्तचित्र ने उपस्थित विद्वानों और अतिथियों को लेखक गाँव की विशिष्ट अवधारणा तथा उसकी राष्ट्रीय भूमिका से परिचित कराया।

इसके उपरांत दोनों संस्थानों के प्रतिनिधियों के मध्य सार्थक चर्चा एवं विचार-विमर्श हुआ। बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा, लोकविरासत, सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण, युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा हिमालयी सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से संवाद किया गया।

समारोह के अंतिम चरण में देश के पहले लेखक गाँव, उत्तराखण्ड एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के मध्य सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों संस्थानों ने भविष्य में संयुक्त रूप से शोध, दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, साहित्यिक गतिविधियों तथा हिमालयी विरासत के संरक्षण से जुड़े विविध आयामों पर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इस अवसर पर लेखक गाँव की ओर से डॉ. सर्वेश उनियाल, डॉ. बेचैन कंडियाल, डॉ. वेद प्रकाश, प्रो. श्रीनिवास त्यागी, डॉ. अल्का सिंह, डॉ. दर्शनी प्रिया, डॉ. नमिता जैन तथा डॉ. साधना अग्रवाल सहित अनेक विद्वान उपस्थित रहे। वहीं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की ओर से प्रो. रिचा नेगी, प्रो. अनिल कुमार, डॉ. दिलीप, डॉ. नवीन और डॉ. जसवीर सहित अनेक अधिकारी, विद्वान एवं गणमान्य अतिथि समारोह में उपस्थित रहे।

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