
- नीरज उत्तराखंडी, त्यूणी (देहरादून)
जौनसार-बावर क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक विस्सू पर्व इस वर्ष भी पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया. त्यूणी क्षेत्र के राइगी स्थित चार महासू देवताओं के वजीर माने जाने वाले शूलाखंडी शेडकुड़िया महाराज के मंदिर में आयोजित विस्सू मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया.
मेले का मुख्य आकर्षण पारंपरिक ठोठा (ठोडा) नृत्य और निशानाबाजी रहा, जिसमें दोनों पक्षों के युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में वीरता और कौशल का अद्भुत प्रदर्शन किया. ढोल-दमाऊं की थाप पर हुए इस आयोजन ने मेले में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
वहीं, क्षेत्र की महिलाओं—ध्यानटुड़ी और रंईणटुड़ियों—ने पारंपरिक परिधान में तांदी नृत्य प्रस्तुत कर सांस्कृतिक रंग को और भी प्रखर बना दिया. लोकगीतों और नृत्यों के माध्यम से महिलाओं ने अपनी समृद्ध लोक संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया.
इस दौरान मंदिर से शेडकुड़िया महाराज की डोली विधिवत रूप से श्रद्धालुओं के दर्शनों के लिए बाहर निकाली गई. श्रद्धालुओं ने डोली और देव चिह्नों के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की.
देव प्रांगण में पाड़व और देवता पसवाओं में अवतरित हुए, जहां उन्होंने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया. इस दौरान श्रद्धालुओं ने अपनी समस्याएं और मनोकामनाएं देवताओं के समक्ष रखीं और समाधान की प्रार्थना की.
पूरे आयोजन के दौरान क्षेत्र में आस्था, उत्साह और भाईचारे का अद्भुत संगम देखने को मिला. विस्सू मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जौनसार-बावर की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का भी एक सशक्त माध्यम है.
