Tag: Manglesh Dabral ki Kavita

वरिष्ठ कवि व पत्रकार मंगलेश डबराल की स्मृति में

वरिष्ठ कवि व पत्रकार मंगलेश डबराल की स्मृति में

साहित्यिक-हलचल
कमलेश चंद्र जोशी वरिष्ठ कवि व साहित्यकार मंगलेश डबराल भौतिक रूप से अब हमारे बीच नहीं रहे लेकिन अपनी कविताओं, साहित्यिक रचनाओं व गंभीर पत्रकारिता के माध्यम से जिस लालटेन को वह जलता हुआ छोड़ गए हैं उसे जलाए रखने और रोशनी बिखेरने का काम वर्तमान व भविष्य की पीढ़ियों के हाथ में है. मंगलेश जी की स्मृति को अमूमन because सभी पत्रकारों, कवियों व साहित्य प्रेमियों ने सोशल, इलैक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के माध्यम से याद किया. कथाकारों, लेखकों व पत्रकारों द्वारा मंगलेश जी के साथ बिताए समय के बहुत से संस्मरण फेसबुक के माध्यम से पढ़ने को मिले जिससे यह समझ में आया कि वह किस कदर जमीन से जुड़े व्यक्ति थे और हमेशा पहाड़ और उसके रौशन होने के सपने को साथ लिये चलते रहे. पत्रकारिता देवेंद्र मेवाड़ी बताते हैं कि दिल्ली में जनसत्ता में नौकरी करते हुए मंगलेश जी बड़े परेशान रहा करते थे. कहते थे दिल्ली महानग...
बुझ गई पहाड़ पर लालटेन…

बुझ गई पहाड़ पर लालटेन…

स्मृति-शेष
अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि : प्रसिद्ध कवि और लेखक मंगलेश डबराल का निधन   चारु तिवारी बहुत विचलित करने वाली खबर आ रही है. हमारे अग्रज, प्रिय कवि, जनसरोकारों के लिये प्रतिबद्ध मंगलेश डबराल जी जिंदगी की जंग हार गये हैं. पिछले दिनों वे बीमार हुये तो लगातार हालत बिगड़ती गई. बीच में थोड़ा उम्मीद बढ़ी थी लेकिन आज ऐसी खबर मिली जिसे हम सुनना नहीं चाहते. उनका निधन हम सबके लिये आघात है. मंगलेश डबराल जी को विनम्र श्रद्धांजलि. बीमार यह 1998 की बात है. वे मुझे अचानक भरी बस में मिल गये. नोएडा से दिल्ली आते वक्त. उन दिनों शाहदरा से नोएडा के लिये एक बस लगती थी. इसे शायद एक नंबर बस कहते थे. यह हमेशा खचाखच भरी रहती थी. पांव रखने की जगह नहीं होती. शाम के समय तो बिल्कुल नहीं. मैं जहां से बस लगती थी, वहीं से बैठ गया था. दो-तीन स्टॉप के बाद वो भी बस में चढ़े. मेरी सीट के बगल में लोगों से पिसकर खड़े हो गय...