
3 मई 1945: जौनसार-बावर के वीर शहीद केसरी चंद का बलिदान दिवस, 24 साल की उम्र में हंसते-हंसते फांसी पर चढ़े
नीरज उत्तराखंडी, बड़कोट/चकरातादेश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले जौनसार-बावर के वीर सपूत, शहीद केसरी चंद का बलिदान दिवस आज श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जा रहा है। मात्र 24 वर्ष 6 माह की आयु में देशभक्ति की अद्वितीय मिसाल पेश करने वाले केसरी चंद ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी और इतिहास में अमर हो गए।
जौनसार-बावर क्षेत्र के क्यावा गांव में 1 नवंबर 1920 को जन्मे केसरी चंद बचपन से ही प्रतिभाशाली और साहसी स्वभाव के थे। उनके पिता पंडित शिवदत्त और माता रायबेली थीं। जन्म के छह माह बाद ही उनकी माता का निधन हो गया, जिसके बाद पिता ने ही उनका पालन-पोषण किया। प्रारंभिक शिक्षा विकासनगर में प्राप्त करने के बाद उन्होंने डीएवी कॉलेज, देहरादून से आगे की पढ़ाई की। खेलों में उनकी विशेष रुचि थी और वे अनुशासनप्रिय छात्र माने जाते थे।...

