
अपना स्वभाव पहचानने की जरूरत और योग का महत्व
योग दिवस (21 जून, 2026) पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र
शिक्षाविद् एवं पूर्व कुलपति, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा
आज की डिजिटल और दौड़-धूप वाली ज़िन्दगी में हम ख़ुद को भी वस्तुओं की भीड़ में खड़े पाते हैं। उस भीड़ में हम खोते जा रहे हैं और कभी-कभी अपने को भी पहचानना कठिन हो रहा है। घटनाओं का द्रुतगामी आवेग ऐसा हो रहा है कि हमारे जीवन का क्षण-क्षण कुछ नया पुराना जोड़ता जा रहा है और हम सब परिवर्तन के तनाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में जब कभी अपने स्वभाव को समझने चलते हैं तो अपने को एक बड़ी जटिल संरचना से मुखातिब पाते हैं जिसमें मन और शरीर दोनों हैं जो सोचने और करने के दायित्व को निभाने का काम करते हैं। यह संरचना जटिल होते हुए भी सहज है क्योंकि उसके सारे अवयव एक संगति और लय में काम करते हैं। और तो और वे परस्पर निर्भर होने के कारण एक-दूसरे के पूरक भी हैं। बात...

