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फेसबुक सर्वेक्षण : कुमाऊं में मन्या अवशेष…

फेसबुक सर्वेक्षण : कुमाऊं में मन्या अवशेष…

धर्मस्थल
कुमाऊं में मनिया मंदिर: एक पुनर्विवेचना -3डॉ. मोहन चंद तिवारीद्वाराहाट के 'मनिया मंदिर समूह' के सन्दर्भ में पिछली दो पोस्टों में विस्तार से चर्चा की गई है.किंतु मन्याओं के बारे में इतिहास और पुरातत्त्व के विद्वानों द्वारा कोई खास जानकारी नहीं दी गई है. because इसी सन्दर्भ में फेसबुक के माध्यम से कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों में 'मन्या' सम्बन्धी जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया. चिंता का विषय है कि आज हमारे पास कत्युरी नरेश मानदेव के द्वारा जैन श्रावकों अथवा शिल्पकारों के माध्यम से निर्मित द्वाराहाट के 'मनिया मन्दिर समूह' के अतिरिक्त कोई भी जीवंत साक्ष्य नहीं हैं. अधिकांश मन्याएं नष्ट हो चुकी हैं,उनका कोई नामोनिशान नहीं बचा है. कुछ धार्मिक स्थलों की मन्याओं का पुनर्निर्माण हो चुका है.ज्योतिष 'कुमाऊंनी शब्द सम्पदा', 'कुमाऊंनी' और 'पहाड़ी फ़सक' ग्रुपों से मन्याओं के बारे में विभि...
मिलिए, उत्तराखंड के उस शख्स से जिनका पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में लिया नाम

मिलिए, उत्तराखंड के उस शख्स से जिनका पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में लिया नाम

बागेश्‍वर
ललित फुलाराप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में उत्तराखंड के बागेश्वर निवासी जगदीश कुन्याल के पर्यावरण संरक्षण और जल संकट से निजात दिलाने वाले because कार्यों की सराहना की. पीएम मोदी ने कहा कि उनका यह कार्य बहुत कुछ सीखाता है. उनका गांव और आसपास का क्षेत्र पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए एक प्राकृतिक जल स्त्रोत पर निर्भर था. जो काफी साल पहले सूख गया था. so जिसकी वजह से पूरे इलाके में पानी का संकट गहरा गया. जगदीश ने इस संकट का हल वृक्षारोपण के जरिए करने की ठानी. उन्होंने गांव के लोगों के साथ मिलकर हजारों की संख्या में पेड़ लगाए और सूख चुका गधेरा फिर से पानी से भर गया.कौन हैं जगदीश कुन्याल दरअसल, जगदीश कुन्याल पर्यावरण प्रेमी हैं और उन्होंने अपनी निजी प्रयास से इलाके में हजारों की संख्या में वृक्षारोपण किया जिसकी वजह से सूख चुके पानी के गधेरे में जल bec...