Tag: कोटद्वार

राष्ट्रीय फलक पर चमकेगी कोटद्वार की बेटियां

राष्ट्रीय फलक पर चमकेगी कोटद्वार की बेटियां

पौड़ी गढ़वाल
ग्वालियर में दिखाएंगी हॉकी का दम, तीन बालिकाओं का नेशनल टीम में चयन कोटद्वार (कण्वनगरी). कोटद्वार के खेल जगत के लिए यह अत्यंत हर्ष और गर्व का क्षण है. नगर की तीन प्रतिभावान बेटियों ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और फौलादी इरादों के बल पर उत्तराखंड की राष्ट्रीय हॉकी टीम में स्थान पक्का किया है. ये खिलाड़ी आगामी 2 से 7 जनवरी तक ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिता में देवभूमि उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी.इन्होंने बढ़ाया कोटद्वार का मान राष्ट्रीय स्तर पर चयनित इन बालिकाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बेटियां किसी भी मुकाम तक पहुँच सकती हैं—प्राची रावत (पुत्री श्री भारत सिंह रावत) – उत्तराखंड अंडर-14 टीम कल्पना (पुत्री श्री गजपाल सिंह) – उत्तराखंड अंडर-14 टीम पल्लवी (पुत्री श्री कुलदीप चंद) – उत्तराखंड अंडर-19 ...
पंडित नेहरू में क्यों जागी थी ‘कण्वाश्रम’ को जानने की रुचि

पंडित नेहरू में क्यों जागी थी ‘कण्वाश्रम’ को जानने की रुचि

पर्यटन
कण्वाश्रम एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसका प्राचीन और समृद्ध इतिहास रहा है. महर्षि कण्व के काल में कण्वाश्रम शिक्षा का प्रमुख केंद्र हुआ करता था. because उस समय वहां दस हजार छात्र शिक्षा लेते थे. वैदिक काल में कण्वाश्रम शिक्षा और संस्कृति कर बड़ा गढ़ था.स्वरोजगारविजय भट्टभारत की आजादी के बाद वर्ष 1955 में रूस दौरे पर गए भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने जब रूस में महर्षि कण्व ऋषि की तपस्थली because और चक्रवर्ती सम्राट भरत की जन्मस्थली कण्वाश्रम के बारे में सुना तो उनको इस ऐतिहासिक स्थल को जानने की जिज्ञासा हुई. स्वरोजगार हुआ यूं कि प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू1955 में रूस यात्रा पर गए थे. उस दौरान उनके स्वागत में रूसी कलाकारों ने महाकवि कालिदास रचित 'अभिज्ञान शाकुंतलम' की नृत्य नाटिका प्रस्तुत की. जिससे उन्हें भी इस ऐतिहासिक स्थल के जानने की जिज्ञासा हुई. वापस भ...
शहीद 30 ड्राइवर-कंडक्टर भाईयों को याद एवं नमन

शहीद 30 ड्राइवर-कंडक्टर भाईयों को याद एवं नमन

स्मृति-शेष
सतपुली त्रासदी की पुण्यतिथि (14 सितम्बर, 1951) पर विशेषडॉ. अरुण कुकसालद्वी हजार आठ भादों का मास, सतपुली मोटर बोगीन खास.... हे पापी नयार कमायें त्वैकू, मंगसीरा मैना ब्यो छायो मैकू....... मेरी मां मा बोल्यान नी रयीं आस, सतपुली मोटर बोगीन खास.सतपुली (सतपुली नयार बाढ़ दुर्घटना-गढ़माता के निरपराध ये वीर पुत्र मोटर मजदूर जन यातायात की सेवार्थ 14 सितम्बर, 1951 ई. को अपनी गाड़ियों सहित सतपुली नयार नदी की प्रचन्ड बाढ़ में सदैव के because लिए विलीन हो गये. यह स्मारक उन बिछड़े हुए साथियों की यादगार के लिए यातायात के मजदूरों के पारस्परिक सहयोग से गढ़वाल 14 सितम्बर मोटर मजदूर यूनियन द्वारा स्थापित किया गया है- गढ़वाल मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन द्वारा निर्मित.)नयार सतपुली बाजार से पूर्वी नयार नदी के दांये ओर बिजली दफ्तर परिसर में स्थापित स्मारक पर उक्त पंक्तियां लिखी हैं. आज से 69 सा...