Tag: आस्था

बौल्याधार में गूंजा लोक संस्कृति का रंग, देव डोलियों के सानिध्य में थिरके कदम

बौल्याधार में गूंजा लोक संस्कृति का रंग, देव डोलियों के सानिध्य में थिरके कदम

उत्तरकाशी, लोक पर्व-त्योहार
  हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मेले में उमड़ा आस्था और परंपरा का सैलाबनीरज उत्तराखंडी, उत्तरकाशीगाजणा क्षेत्र के ठांडी गांव स्थित बौल्याधार में आयोजित तीन दिवसीय ऐतिहासिक एवं पौराणिक मेला रविवार को पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों और लोक संस्कृति के रंगों के बीच संपन्न हुआ। 4 से 6 सितंबर तक चले इस मेले में क्षेत्र की लोक आस्था, देव परंपरा, पशुपालन और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। हर तीसरे वर्ष आयोजित होने वाला यह मेला गाजणा क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी माना जाता है। मेले में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु पहुंचे तथा देवडोलियों के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।देवडोलियों के सानिध्य में हुए धार्मिक अनुष्ठान मेले में...
हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

हिलजात्रा हमारी आस्था, विश्वास और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक : मुख्यमंत्री धामी

देहरादून
  मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को किया संबोधितहिमांतर ब्यूरो, देहरादून/पिथौरागढ़मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास से पिथौरागढ़ में आयोजित ऐतिहासिक हिलजात्रा महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर पिथौरागढ़ की जनता को हिलजात्रा पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम जाखनी, पिथौरागढ़ स्थित बाबा गंगनाथ मंदिर के सौंदर्यीकरण की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिलजात्रा उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण पर्व है। घर-घर में मां गौरा और भगवान महेश्वर की पारंपरिक पूजा के साथ सातू-आठू पर्व से हिलजात्रा की भक्ति धारा प्रवाहित होती है। उन्होंने कामना की कि इसी प्रकार सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और ...
चांदणी धार पूजन : जहां पक्षियों से संवाद करती है आस्था

चांदणी धार पूजन : जहां पक्षियों से संवाद करती है आस्था

पर्यावरण, लोक पर्व-त्योहार
  तुंगनाथ घाटी : लोकज्ञान, पर्यावरण और विज्ञान का अद्भुत संगमआशिता डोभाल उत्तराखंड का पहाड़ केवल भौगोलिक संरचना भर नहीं है, बल्कि यह प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व का जीवंत दर्शन है। यहां की जीवनशैली में जल, जंगल, जमीन, जानवर और जन—इन ‘5 ज’ का गहरा रिश्ता है। यही कारण है कि पर्वतीय समाज ने प्रकृति को संसाधन नहीं, बल्कि संबंध माना है। इस संबंध की एक अनूठी मिसाल रुद्रप्रयाग जिले की तुंगनाथ घाटी में आज भी जीवित है—चांदणी धार पूजन। विरासत में मिली पर्यावरण चेतना तुंगनाथ बाबा का शीतकालीन प्रवास स्थल मक्कूमठ केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय चेतना के केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। यह क्षेत्र वन आंदोलनों की भूमि रहा है। यहाँ की लोकमानस में गूंजने वाला नारा— “मौण द्यौला पर बौण ना” (गर्दन कटवा देंगे, पर जंगल नहीं कटने देंगे) यह सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति...
श्राद्ध की आस्था में पर्यावरण व जीवन

श्राद्ध की आस्था में पर्यावरण व जीवन

समाज
सुनीता भट्ट पैन्यूली पितृपक्ष या श्राद्ध हमारे अपने जो अब जीवित नहीं हैं या हमारे पास नहीं हैं. because उनको याद करने का अवसर हैं. हमारी हिंदू परंपरा में इन दिनों दिवंगत  पूर्वजों का श्राद्ध व पिंडदान किया जाता है.ऐसा माना जाता है कि पितरों की पूजा अर्चना करने से उनकी हम पर विशिष्ट कृपा बनी रहती है.ज्योतिष हमारा यह भी विश्वास है कि अपने पितरों को श्राद्ध देकर हम उनके निमित्त जो भी because ब्राह्मण को दे रहे हैं वह उन तक ज़रूर पहुंच जायेगा. यह तो हम नहीं जानते है कि पहुंचता है या नहीं किंतु यह निश्चित है कि  सच्चे हृदय से पितरों को याद करके जब उनको तर्पण दिया जाता है तो हमारी श्रद्धाऐं उन तक तो ज़रूर पहुंचती ही होंगी.ज्योतिष पितृ ऋण को चुकाने because और कृतज्ञता प्रकट करने का कर्म भी है श्राद्ध श्राद्ध में गाय, कुत्ता, कौऐ को खिलाने का विधान भी है यह प्रशंसनीय है कि  because इसम...