
स्वई-भाटी गांव में कॉलर शीथ रॉट (Collar Sheath Rot) और ब्लास्ट के लक्षण, बालियों और दाना बनने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है असर; कृषि विभाग की टीम ने खेतों का किया निरीक्षण
- हिमांतर ब्यूरो, पुरोला (उत्तरकाशी)
रवांई की पहचान और किसानों की आर्थिकी से जुड़ी पारंपरिक लाल धान की फसल पर रोग का खतरा मंडराने लगा है। पुरोला क्षेत्र के स्वई-भाटी गांव में धान के पौधों पर कॉलर शीथ रॉट और ब्लास्ट रोग के लक्षण मिलने से किसान चिंतित हैं। बीमारी के फैलाव से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका के बीच कृषि विभाग की टीम ने गांव पहुंचकर खेतों का निरीक्षण किया और किसानों को रोग की रोकथाम के लिए जरूरी उपाय अपनाने की सलाह दी।
कृषि विभाग की टीम ने प्रभावित खेतों में पौधों और बालियों का बारीकी से निरीक्षण कर रोग के लक्षणों की जानकारी जुटाई। किसानों से बीमारी के फैलाव और फसल को अब तक हुए नुकसान के बारे में भी जानकारी ली गई। अधिकारियों ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही विभाग से संपर्क करने को कहा।
बालियों के विकास और उत्पादन पर पड़ सकता है असर
कृषि अधिकारियों के मुताबिक कॉलर शीथ रॉट और ब्लास्ट फफूंदजनित रोग हैं, जो धान के पौधों को कमजोर कर सकते हैं। रोग का प्रकोप बढ़ने पर पौधों की वृद्धि के साथ बालियों के विकास और दाना बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। समय रहते नियंत्रण नहीं होने पर उत्पादन में गिरावट की आशंका है।

विभागीय टीम ने किसानों को खेतों में साफ-सफाई रखने, खरपतवार समय पर हटाने और अत्यधिक नमी की स्थिति से बचाव के उपाय करने की सलाह दी। रोग की स्थिति को देखते हुए अनुशंसित मात्रा में हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशक के छिड़काव की सलाह भी दी गई। साथ ही मिट्टी की जांच के आधार पर एनपीके का संतुलित प्रयोग करने पर जोर दिया गया।
लक्षण दिखें तो खुद न करें दवाओं का प्रयोग
कृषि तकनीकी अधिकारी निकेश तोमर ने किसानों से फसल की नियमित निगरानी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रोग के लक्षण दिखाई देने पर किसान अपने स्तर पर अनावश्यक दवाओं का प्रयोग न करें। कृषि विभाग से तकनीकी सलाह लेने के बाद ही फसल और रोग की स्थिति के अनुरूप उपचार किया जाए।
उन्होंने बताया कि रोग की समय रहते पहचान और उचित प्रबंधन से फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विभाग प्रभावित क्षेत्रों में फसल की स्थिति पर नजर रखने के साथ किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन देता रहेगा।

रवांई की कृषि विरासत है लाल धान
लाल धान रवांई क्षेत्र की पारंपरिक कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह स्थानीय किसानों की आजीविका और आय से भी जुड़ा है। ऐसे में फसल में रोग के लक्षण मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों ने कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों की नियमित निगरानी करने और रोग नियंत्रण के लिए समय पर तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की है।
निरीक्षण के दौरान किसान बिजेंद्र पंवार, देवेंद्र हिर, प्रवेश कुमार, सुरौल कुमार, मुधामा प्रसाद और धर्मवीर सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
