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शांति और मानवीय-चेतना के अभ्यासी आचार्य विनोबा भावे

शांति और मानवीय-चेतना के अभ्यासी आचार्य विनोबा भावे

स्मृति-शेष
विनोबा भावे की 125वीं जयंती  पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र एक ओर दुःस्वप्न जैसा कठोर यथार्थ और दूसरी ओर कोमल आत्म-विचार! दोनों को साथ ले कर दृढ़ता पूर्वक चलते हुए अनासक्त भाव से जीवन के यथार्थ से becauseजूझने को कोई सदा तत्पर रहे यह आज के जमाने में कल्पनातीत ही लगता है. परंतु ‘संत’ और ‘बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध भारतीय स्वातंत्र्य की गांधी-यात्रा के अनोखे सहभागी शांति के अग्रदूत श्री बिनोवा भावे की यही एक व्याख्या हो सकती है. but वे मूलतः एक देशज चिंतक थे जिन्होने स्वाध्याय और स्वानुभव के आधार पर अपने विचारों का निर्माण किया था. उनका गहरा सरोकार अध्यात्म से था पर उनका अध्यात्म जीवंत और लोक-जीवन से जुड़ा था. वे अपनी अध्ययन-यात्रा के दौरान विभिन्न धर्म-परम्पराओं के सिद्धांतों और अभ्यासों से परिचित होते रहे. अनेक भाषाएँ सीखीं और साधारण जीवन का अभ्यास किया. यात्रा उनकी अविचल निष्ठा लौ...