Tag: रवांई घाटी

नौगांव कृषि मंडी एक साल बाद भी बंद, काश्तकारों में बढ़ा आक्रोश

नौगांव कृषि मंडी एक साल बाद भी बंद, काश्तकारों में बढ़ा आक्रोश

उत्तरकाशी
  10 करोड़ की लागत से बनी मंडी में 16 दुकानें आवंटन की प्रतीक्षा में,टमाटर और सेब सीजन से पहले संचालन शुरू करने की मांगनीरज उत्तराखंडी | नौगांव | उत्तरकाशीरवांई घाटी के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और बिचौलियों की भूमिका कम करने के उद्देश्य से नौगांव के भारी वल्ली क्षेत्र में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कृषि मंडी समिति का संचालन एक वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। मंडी भवन और उससे जुड़ी अधिकांश व्यवस्थाएं तैयार होने के बावजूद संचालन में हो रही देरी से क्षेत्र के काश्तकारों में भारी नाराजगी है। मंडी परिसर में फल एवं सब्जियों के भंडारण और विपणन के लिए निर्मित 16 दुकानें अभी तक आवंटन की प्रतीक्षा कर रही हैं। किसानों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन मंडी को संचालित करने के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई। इसक...
तिलाड़ी कांड की 96वीं बरसी आज: रवांई घाटी के शहीदों को नमन, ‘गढ़वाल का जलियांवाला बाग’ आज भी रुला देता है इतिहास

तिलाड़ी कांड की 96वीं बरसी आज: रवांई घाटी के शहीदों को नमन, ‘गढ़वाल का जलियांवाला बाग’ आज भी रुला देता है इतिहास

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी | रवांई घाटी/उत्तरकाशीजनपद उत्तरकाशी की रवांई घाटी में यमुना नदी के तट पर स्थित तिलाड़ी मैदान आज भी उस दर्दनाक इतिहास का मौन साक्षी है, जिसने पूरे गढ़वाल को झकझोर दिया था। आज तिलाड़ी कांड की 96वीं बरसी है। 30 मई 1930 को टिहरी रियासत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ अपने हक-हकूकों की रक्षा के लिए एकत्रित निहत्थे ग्रामीणों पर की गई अंधाधुंध गोलीबारी में अनेक लोगों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। इतिहास में यह घटना ‘गढ़वाल के जलियांवाला बाग’ के नाम से दर्ज है। आज भी जब तिलाड़ी कांड का जिक्र होता है, तो रवांई घाटी के लोगों की आंखें नम हो जाती हैं और उस दिन की भयावह स्मृतियां लोगों को भीतर तक झकझोर देती हैं।वन बंदोबस्त बना आंदोलन की वजह टिहरी रियासत ने वर्ष 1927 में रवांई क्षेत्र में वन बंदोबस्त लागू किया था। इसके तहत ग्रामीणों के जंगलों पर पारंपरिक अधिकार सीम...
खलाड़ी में जागमाता महाअनुष्ठान संपन्न: पांच दिवसीय पूजा में उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंज उठी रवांई घाटी

खलाड़ी में जागमाता महाअनुष्ठान संपन्न: पांच दिवसीय पूजा में उमड़ा आस्था का सैलाब, जयकारों से गूंज उठी रवांई घाटी

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोलाप्राचीन धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था का अद्भुत संगम एक बार फिर रवांई घाटी में देखने को मिला। खलाड़ी गांव में आयोजित जागमाता का पांच दिवसीय विशेष पूजा एवं महाअनुष्ठान सोमवार को पूर्ण विधि-विधान, गहरे धार्मिक उत्साह और भव्यता के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालु विभिन्न क्षेत्रों से यहां पहुंचे और माता के जयकारों से पूरी घाटी भक्तिमय माहौल में डूबी रही। समुद्र तल से लगभग 1772 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खलाड़ी गांव का यह प्राचीन शक्तिपीठ आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं और इतिहासकारों के अनुसार यह स्थल 15वीं शताब्दी से भी पूर्व का है। शक्तिपीठ परिसर के आसपास नेपाल और विक्टोरिया काल के प्राचीन सिक्कों के रोपित होने की मान्यता इस क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को दर्शाती है। महाअनुष्ठान क...
कंडियाल गांव में आज भी जीवित है शेर-भालू का पौराणिक नृत्य

कंडियाल गांव में आज भी जीवित है शेर-भालू का पौराणिक नृत्य

उत्तरकाशी
  मुखौटे पहनकर जीवंत होती लोककथा ढोल-दमाऊ की थाप पर पीढ़ियों से निभाई जा रही अनूठी परंपरा, लोकसंस्कृति को सहेज रहे ग्रामीणनीरज उत्तराखंडी, पुरोला/उत्तरकाशीरवांई घाटी की समृद्ध लोकसंस्कृति आज भी अनेक प्राचीन परंपराओं के माध्यम से जीवंत दिखाई देती है. विकासखंड पुरोला के कंडियाल गांव में आज भी मुखौटे पहनकर शेर और भालू का पौराणिक लोकनृत्य प्रस्तुत किया जाता है. यह अनूठा नृत्य गांव की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है और पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को ग्रामीण आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं. गांव में विशेष अवसरों, पारंपरिक उत्सवों और सामुदायिक आयोजनों के दौरान युवक शेर और भालू के रूप में सजे विशेष मुखौटे पहनकर नृत्य करते हैं. ढोल-दमाऊ और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर होने वाला यह नृत्य पूरे वातावरण को उत्साह और रोमांच से भर देता है. नृत्य के दौरान कलाकार शेर ...
रवांई घाटी में आज से देवलांग पर्व का आगाज़

रवांई घाटी में आज से देवलांग पर्व का आगाज़

उत्तरकाशी
  सांस्कृतिक धरोहर और वीरता की मिसालेंनीरज उत्तराखंडी, पुरोला-उत्तरकाशीरवांई घाटी-अपनी अनूठी लोक परंपराओं, अद्भुत सांस्कृतिक जीवट और देव-अनुष्ठानों के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखने वाला यह पर्वतीय क्षेत्र-आज एक बार फिर देवत्व और लोकश्रद्धा के महासंगम का साक्षी बनेगा. गैर बनाल स्थित प्राचीन रघुनाथ देवता मंदिर परिसर में आज से प्रसिद्ध देवलांग महापर्व का भव्य आयोजन आरंभ हो रहा है, जिसे उत्तराखंड सरकार राजकीय मेला घोषित कर चुकी है. तैयारियाँ चरम पर हैं और श्रद्धालुओं में उत्साह का आलम देखते ही बनता है. मेला समिति की ओर से विशाल भंडारे की भी विशेष व्यवस्था की गई है. मंगसीर की दीपावली: विरासत की अनोखी रोशनी जहाँ देशभर में दीपावली कार्तिक मास में मनाई जाती है, वहीं यहाँ की परंपरा में दीपपर्व एक माह बाद मंगसीर की बग्वाल के रूप में हर्षोल्लास से मनाया जाता है. मान्यता है कि भगव...
रवांई घाटी की बेटी दिव्या ज्योति बिजल्वाण जाएंगी ब्राज़ील, करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

रवांई घाटी की बेटी दिव्या ज्योति बिजल्वाण जाएंगी ब्राज़ील, करेंगी भारत का प्रतिनिधित्व

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, पुरोला (उत्तरकाशी)उत्तरकाशी जनपद की रवांई घाटी स्थित पोरा गांव की बेटी दिव्या ज्योति बिजल्वाण ने प्रदेश ही नहीं, पूरे देश का मान बढ़ाया है. दिव्या ज्योति का चयन ब्राजील में आयोजित होने वाले 20वें यूनाइटेड क्लाइमेट चेंज कॉन्फ्रेंस ऑफ चिल्ड्रन एंड यूथ (COY20) में भारत के प्रतिनिधि के रूप में हुआ है. यह प्रतिष्ठित सम्मेलन 6 से 8 नवंबर 2025 तक फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ पारा, बेलेम (ब्राजील) में आयोजित किया जाएगा. यह आयोजन संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा सम्मेलन (UNFCCC) के तत्वावधान में होता है, जिसमें दुनिया भर के युवा जलवायु परिवर्तन पर अपने विचार, अनुभव और समाधान साझा करते हैं. ग्राम पोरा निवासी गुरु प्रसाद बिजल्वाण की सुपुत्री दिव्या ज्योति की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पुरोला विधायक दुर्गेश्वर लाल, तथा क्षेत्र के अन्य जनप्रति...
पुरोला : टैक्सी स्टैंड पर निर्मित सैल्फी प्वाइंट बना आकर्षण का केन्द्र

पुरोला : टैक्सी स्टैंड पर निर्मित सैल्फी प्वाइंट बना आकर्षण का केन्द्र

उत्तरकाशी
नीरज उत्तराखंडीयूं तो रवांई घाटी की रमणीयता सबका मन मोह लेती हैं, पग-पग पर प्रकृति ने यहां अपनी अनुपमा छटा बिखेरी है. जो यहां आता है वह यहां रम जाता है. यही इसके नामांकरण को सार्थक करता है. बावजूद इसके आजकल नगरपालिका परिषद पुरोला के तहसील मुख्यालय प्रवेश द्वार के निकट टैक्सी स्टैंड के छोर पर बना सैल्फी प्वाइंट राहगीरों यात्रियों एवं पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र बना हुआ है.शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जो पुरोला आगमन पर यहां अपनी सैल्फी या फोटो न खींचता हो. पुरोला आगमन पर अपनी यादों को संजोए रखने के लिए सैल्फी प्वाइंट  पर अपने मोबाइल फोन पर सैल्फी खींचने का अवसर शायद ही कोई खोना चाहता हो. शहर के सौंदर्यीकरण के लिए नगर पालिका परिषद पुरोला द्वारा शहर के प्रवेश द्वार पर सेल्फी प्वाइंट का निर्माण किया गया है जो आजकल दर्शकों एवं पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र बिंदु बना हुआ है. पालिका ...
जन से विरक्ति और धन लोलुपता की परिणिति : तिलाड़ी ढंढक

जन से विरक्ति और धन लोलुपता की परिणिति : तिलाड़ी ढंढक

उत्तरकाशी
तिलाड़ी कांड 30 मई, 1930 पर विशेषध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’ 1803 से 1815 के मध्य के क्रूर गोरखा शासन के उपरांत महाराजा सुदशर्न शाह ने कंपनी सरकार की मद्द पाकर अपना पैतृक गढ़वाल राज्य वापस ले तो लिया किन्तु बदले में आधा राज्य भी गवांना पड़ा और सन् 1815 में उन्हें एक छोटी सी रियासत टिहरी गढ़वाल राज्य की गद्दी को पाकर ही संतुष्ठ होना पड़ा था। सन् 1824 को रवांई परगना जहां के निवासी स्वछन्द जीवन जीने के अभ्यासी थे उसे भी कम्पनी सरकार ने महाराजा सुदर्शन शाह को सौंप दिया। जनता अपने ऊपर हुए क्रूर अनैतिक आचरण और शोषण के पश्चात अपने महाराजा की खबर से सुकून की सांस लेने लगी थी। महाराजा के सम्मुख चुनौतियों का बड़ा पहाड़ खड़ा था। राज्य का खजाना बिल्कुल भी खाली था। राजस्व में वृद्धि के लिए अनेकों प्रकार के ‘टैक्स’ लगाये गये। किन्तु राज्य की जो सबसे बड़ी सम्पत्ति और आय का एक मात्र स्रोत राज्य के वन ही थे। इन...
जौनसार : 18 गांवों की शादी में नहीं बजेगा DJ, फास्ट फूड भी बैन और भी कई फैसले

जौनसार : 18 गांवों की शादी में नहीं बजेगा DJ, फास्ट फूड भी बैन और भी कई फैसले

उत्तराखंड हलचल
देहरादून : पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी की रवांई घाटी से शादियों में डीजे, शराब और चाइनीज फूड पर बैन की शुरू हुई मुहिम अब जौनसार में भी पहुंच गई है। जौनसार के खत फरटाड़ से जुड़े 18 गांवों में शादी में डीजे बजाने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही इन गांवों में बीयर पीने और फास्ट फूड पर भी रोक दी है। बता दें कि रविवार को हुई महापंचायत में खत फरटाड़ से जुड़े 18 गांवों के लिए ये फैसला लिया गया है।जौनसार के खत फरटाड़ से जुड़े 18 गांवों की डिंयूडीलानी में रविवार को महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसमें शादी समारोह में बीयर पीने व डीजे बजाने पर पूरी तरह रोक लगाने के साथ ही कई अन्य फैसले लिए गए। इसके साथ ही सभी ग्रामीणों से पारित नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। इसके साथ ही ये कहा गया है कि नियमों का पालन ना करने पर संबंधित परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। महापंचायत में फरटाड़ खत से ज...
उत्तरकाशी: देवलांग महापर्व मड़केश्वर मंदिर में हवन के संपन्न

उत्तरकाशी: देवलांग महापर्व मड़केश्वर मंदिर में हवन के संपन्न

उत्तरकाशी
उत्तरकाशी। रवांई घाटी के गैर बनाल में देवलांग का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। देवलांग का यह पर्व रवांई घाटी की बनाल पट्टी के गैर गांव में राजा रघुनाथ मंदिर में मनाया जाता है। देवलांग उत्सव में शामिल होने के लिए ग्रामीणों का भारी हुजूम उमड़ा। रात भर ग्रामीण देवलांग के पारंपरिक गीतों पर नाचते रहे। बुधवार सुबह पौ फटने के साथ देवलांग को खड़ा प्रज्वलित किया गया। जिसके बाद देवलांग उत्सव में हजारों श्रद्धालु झूम उठे। देवलांग उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में रवांई के खास त्योहार में शामिल है। जो आज भी अपनी पौराणिकता को समेटे हुए है। इस पर्व को मनाने की परंपराएं ही इसे खास बनाती है। यूं तो इस उत्सव की तैयारियां एक माह पहले से हो जाती हैं। परंतु इस उत्सव की तिथि मंगसीर अमावस्या है।यानि मंगलवार की सुबह (12 दिसंबर की रात 13 दिसंबर की सुबह) को देवलांग उत्सव शुरू हुआ। इस उत्सव की तैयारियों के सभी क...