October 29, 2020
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किस्से/कहानियां

‘गंगा’

कहानी सीता राम शर्मा ‘चेतन’ रात्रि के आठ बज रहे थे. हमारी कार हिमालय की चोटियों पर रेंगती हुई आगे बढ़ रही थी. नौजवान ड्राइवर मुझ पर झुंझलाया हुआ था – “मैनें आपसे कहा था भाई साहब, यहीं रूक जाओं, आपने मेरी एक ना सुनी, अब इस घाटी में दूर-दूर तक कोई होटल-धर्मशाला है भी […]
संस्मरण

पिता तो पिता है, हमसे कब वो जुदा है

पितृ दिवस पर विशेष डॉ. अरुण कुकसाल मानवीय रिश्तों में सबसे जटिल रिश्ता पिता के साथ माना गया है. भारतीय परिवेश में पारिवारिक रिश्तों की मिठास में ‘पिता’ की तुलना में ‘मां’ फायदे में रहती है. परिवार में ‘पिता’ अक्सर अकेला खड़ा नज़र आता है. तेजी से बदलती जीवनशैली में परिवारों के भीतर पिता का […]
आधी आबादी

माँ तुम झूठी हो!

डॉक्टर दीपशिखा जोशी माँ तुम ने विदाई के समय गले लगा बोला था, जा बिटिया वहाँ तुझे मिलेगी दूसरी माँ. मुझ में और उन में कभी अंतर ना करना. जा बिट्टो तुझे कभी ना खलेगी मेरी कमी, ना आएगी याद! कुछ समय लगेगा ज़रूर, मगर तू निभा लेगी मुझे पता है. मैं भी एक दिन […]