January 28, 2021
Home Posts tagged कबूतरी देवी
पुस्तक समीक्षा

‘लोक में पर्व और परम्परा’

‘जी रया जागि रया, यो दिन यो मास भेंटने रया, दुब जस पनपी जाया’ अरुण कुकसाल हिमालयी क्षेत्र एवं समाज के जानकार लेखक चन्द्रशेखर तिवारी की नवीन पुस्तक ‘लोक में पर्व और परम्परा’ कुमाऊं अंचल के सन्दर्भ में एक सामाजिक, सांस्कृतिक so और पर्यावरणीय विवेचन प्रस्तुत करती है. कुमाऊंनी जनजीवन के
संस्मरण

दो देशों की साझा प्रतिनिधि थीं कबूतरी देवी

पुण्यतिथि पर (7 जुलाई) विशेष हेम पन्त नेपाल-भारत की सीमा के पास लगभग 1945 में पैदा हुई कबूतरी दी को संगीत की शिक्षा पुश्तैनी रूप में हस्तांतरित हुई. परम्परागत लोकसंगीत को उनके पुरखे अगली पीढ़ियों को सौंपते हुए आगे बढ़ाते गए. शादी के बाद कबूतरी देवी अपने ससुराल पिथौरागढ़ जिले के दूरस्थ गांव क्वीतड़ (ब्लॉक […]
संस्मरण

तीजन बाई या बेगम अख्तर नहीं कबूतरी देवी थी वो

पुण्यतिथि (7 जुलाई) पर विशेष मीना पाण्डेय कबूतरी देवी तीजन बाई नहीं है, न ही बेगम अख्तर. हो ही नहीं सकती. ना विधा में, न शैली में. उनकी विशेष खनकदार आवाज उत्तराखंड की विरासत है. अपनी विभूतियों को इस तरह की उपमाओं से नवाजा जाना हमारे समाज की उस हीनता ग्रंथि को प्रर्दशित करता है […]