इतिहास की दहलीज पर रोशनियों की दस्तक!

  • सुनीता भट्ट पैन्यूली

किसी किताब की सरसता,रोचकता,कौतुहलवर्धता उस किताब के मूलतत्व अथार्त विषय, तथ्य, भाषा, प्रमाण कथ्य,उद्देश्य पर निर्भर करती है।

अपनी

“हाशिये पर रौशनी” ध्रुव गुप्त जी द्वारा because लिखे गये एतिहासिक, पौराणिक, अध्यात्मिक, संगीत, साहित्य, कला, पर्यावरण से संबद्ध छब्बीस आलेखों के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं जो पाठकों के मष्तिष्क में जिज्ञासा पैदा करने हेतु उपरोक्त मापदंड पर खरी उतरती है।

परिवेश

इसमें विभिन्न रंग, परिवेश because और अपनी-अपनी लियाकत की कहानी बयां करती चित्रों की विथिका या अंधेरी गुफाओं में रौशनी के पुंज से सराबोर विभिन्न व्यक्तियों के जीवन चरित्र पर आधारित चित्रावली एक दम नया अहसास, अनोखी अनुभूति है।

विलुप्त

किताब में इतिहास की because दहलीज पर रोशनियों की दस्तक है, उन हाशिये पर पड़ी महानतम आत्माओं पर जिनके अमुल्य व अतुलनीय योगदान व उनके महान व्यक्तित्व से रु-ब-रु होना कम से कम मेरी पहुंच के बाहर होता अगर मैंने “हाशिये पर रौशनी” को न पढ़ा होता…

की

ध्रुव गुप्त जी के गहन शोध व because चिंतन का ही परिणाम है कि इतिहास के तहखानों में दफन धूल और गर्द खाये हुये उपेक्षित से कुछ व्यक्तित्व पाठकों के समक्ष मानो सशरीर, जीवंत उपस्थित हो जाते हैं।

वाचक

किताब में इतिहास की दहलीज पर रोशनियों की दस्तक है, उन हाशिये पर पड़ी महानतम आत्माओं पर जिनके अमुल्य व because अतुलनीय योगदान व उनके महान व्यक्तित्व से रु-ब-रु होना कम से कम मेरी पहुंच के बाहर होता अगर मैंने “हाशिये पर रौशनी” को न पढ़ा होता…

किस्सा

सघन परतों के आलेखों वाली किताब because जिसमें परियों की कहानी में (उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल गांव में परियों के मंदिर का जिक्र, जहां हर साल रक्षाबंधन के दिन लोग रक्षासूत्र बांधकर अपने व अपने परिवार की रक्षा का वरदान मांगते हैं)

वर्णन

“सुन लो सुनाता हूँ तुमको कहानी” because में किस्सागोई और किस्सा वाचक की विलुप्त होती परंपरा और इसको बचाये रखने हेतु बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने हेतु लेखक द्वारा निदान सुझाये गए हैं।

चरित्र

“जहाँ सोयी हुई है अनारकली” अनारकली का because पुख़्ता अस्तित्व व सलीम से उसकी मोहब्बत पर विमर्श की गुंजाइश छोड़ता यह आलेख पाठकों में कौतुहलता बनाये रखता है शुरू से आखिर तक…

सुजाता

एक मुलायम-सा नाम कानों में मधुप-सा because घोलता जेबुन्निसा एक महान शायरा सत्रहवीं शताब्दी की मुगल शहजादी का नाम जिसके जीवन के विभिन्न  पहलुओं  और उनकी फारसी भाषा में शायरी का ध्रुव सर द्वारा हिंदी में अनुवाद किताब की विषय वस्तु को  और भी प्रभावपूर्ण बनाता है।

आम्रपाली

कृष्ण व राधा के वृद्धावस्था में because मिलन के लिए उनके मित्रों द्वारा जुगत लगाने का वर्णन व उन दोनों के मध्य वार्तालाप के चरम को लेखक द्वारा हम पाठकों में वेदना की उत्पत्ति, परिवेश, भाषा, विषय वस्तु को रोचकता प्रदान करती है।

किताब

इतिहास की दो चर्चित स्त्रियों आम्रपाली because व सुजाता का चरित्र वर्णन और उनकी रचनाओं  का वर्णन के पीछे लेखक की अथक मेहनत गहन अध्यन व शोध का ही परिचायक है।

पुंज

कृष्ण व राधा के वृद्धावस्था में मिलन because के लिए उनके मित्रों द्वारा जुगत लगाने का वर्णन व उन दोनों के मध्य वार्तालाप के चरम को लेखक द्वारा हम पाठकों में वेदना की उत्पत्ति, परिवेश, भाषा, विषय वस्तु को रोचकता प्रदान करती है।

की

स्वतंत्रता संग्राम में आंदोलनरत ऊदादेवी,because मोहम्मद बाकिर देहलवी, पीर अली खां जिनके अमुल्य योगदान, त्याग व जीवन चरित्र पर विस्तृत प्रकाश डालता है लेखक का यह आलेख।

रौशनी

“अब वक्त आ गया है कि भारत के because प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास फिर से लिखा जाये ताकि उसके अनाम नायक-नायिकाओं के बलिदान को भी अपेक्षित सम्मान मिले”

पर

*****

“सामा चकेवा” सहज भाषा में लिखा because प्रकृति व मानव के मध्य गहरा संबध का बोध  कराता हुआ आलेख है जिसमें लेखक द्वारा हमारी विलुप्त होती संस्कृति, लोक कला परंपरा, पर्यावरण से हमारे जुड़ाव की प्रतिबद्धता पर चिंता उजागर  करती प्रतीत होती है।

व्यक्तित्व

“अपनी जडों से कटे लोगों के because बीच और निरंतर भागदौड़ से हांफते इस जटिल समय में जब कोई मानवीय मुल्य ही सुरक्षित नहीं है तो लोक आस्थाओं की मासूमियत भला कैसे बची रह सकती है?

अनगढे

“अपनी जडों से कटे लोगों के बीच because और निरंतर भागदौड़ से हांफते इस जटिल समय में जब कोई मानवीय मुल्य ही सुरक्षित नहीं है तो लोक आस्थाओं की मासूमियत भला कैसे बची रह सकती है?

*****

और

पौराणिक समुद्र मंथन या अमृत मंथन because आज के परिप्रेक्ष्य में ध्रुव जी का यह आलेख देवता यानी पूंजीपति द्वारा दानव अथार्त  मेहनतकश लोगों के शोषण, अत्याचार, भ्रष्टाचार  और आज भी यथावत स्थिति से परिचय कराता है और  सोचने पर मजबूर करता है कि बहुत कुछ बदलना बाकि है कुछ भी तो नहीं बदला है…

अनछुए

पुस्‍तक “हाशिये पर रौशनी” because उन अनछुए और अनगढे व्यक्तित्व पर रौशनी की पुंज जो जीवंत हो उठी हैं  लेखक के अथक प्रयास व निरन्तर शोध द्वारा हाशिये  से इन्हें  उठाकर हम पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत करने हेतु।

आपको हार्दिक बधाई! because इतने उम्दा व रोचक आलेखों से हमारा परिचय कराने हेतु, कितना कुछ है जो अबूझा है, अनसुना है, अनजाना है इतिहास के तहखानो में दफन..?आशा है अपने ज्ञान की रौशनी से हम पाठकों को आप निरन्तर सराबोर करते रहेंगे।

(लेखिका साहित्यकार हैं एवं विभिन्न पत्रपत्रिकाओं में अनेक रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं.)

Share this:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *