मेरे पांव में चमचाते शहर की बेड़ियां

मेरे पांव में चमचाते शहर की बेड़ियां

ललित फुलारा युवा पत्रकार हैं। पहाड़ के सवालों को लेकर मुखर रहते हैं। इस लेख के माध्यम से वह पहाड़ से खाली होते गांवों की पीड़ा को बयां कर रहे हैं। शहर हमें अपनी जड़ों से काट देता है. मोहपाश में जकड़ लेता है. मेरे पांव में चमचाते शहर की बेड़ियां हैं. आंगन विरान पड़ा […]

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 अभिनेता और नाट्य निर्देशक भूपेश जोशी को मिलेगा 2018 का सफदर हाशमी पुरस्कार

अभिनेता और नाट्य निर्देशक भूपेश जोशी को मिलेगा 2018 का सफदर हाशमी पुरस्कार

हिमांतर ब्यूरो  अपने अभिनय से किसी भी किरदार को सांरग बनाने और निर्देशन के जरिए नाटकों को समसामयिक मुद्दों और परिस्थियियों से जोड़ने में माहिर रंगकर्मी भूपेश जोशी को उत्तर प्रदेश की संगीत नाटक अकादमी की तरफ से ‘सफदर हाशमी पुरस्कार 2018’ दिए जाने की घोषणा हुई है। उन्हें यह पुरस्कार नाट्य निर्देशन की श्रेणी […]

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 जनाधिकारों के लिए संघर्षरत एक लोककवि !

जनाधिकारों के लिए संघर्षरत एक लोककवि !

व्योमेश जुगरान आज हिमालै तुमुकै धत्यूं छौ,  जागो – जागो ओ मेरा लाल बरसों पहले पौड़ी के जिला परिषद हॉल में गिरीश तिवाड़ी ‘गिर्दा’ को पहली बार सुना था। खद्दर का कुर्ता पहने घने-लटदार बालों वाले इस शख़्स की बात ही कुछ और थी। उन्होंने माहौल से हटकर फ़ैज साहब का मशहूर कौमी तराना ‘दरबार-ए-वतन […]

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 तिलाड़ी कांड: जब दहाड़ उठी रवाँई घाटी

तिलाड़ी कांड: जब दहाड़ उठी रवाँई घाटी

उत्तराखंड का जलियावाला बाग तिलाड़ी कांड सकलचन्द रावत आज रवाँई जौनपुर की नई पीढ़ी के किशोर कल्पना ही नहीं कर सकते कि सन 1930 में रवाँई की तरुणाई को आजादी की राह पर चलने में कितनी बाधाओं का सामना करना पड़ा था। because पौरुष का इतिहास खामोश था, वक्त की वाणी मूक थी, लेखक की कृतियां […]

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 ‘तेरी सौं’ से ‘मेरु गौं’ तक…

‘तेरी सौं’ से ‘मेरु गौं’ तक…

व्योमेश जुगरान ‘तेरी सौं’ का वह युवा जो तब मैदान में पढ़ाई छोड़ एक जज्बाती हालात में उत्तराखंड आंदोलन में कूदा था, आज अधेड़ होकर ठीक वैसी ही भावना के वशीभूत पहाड़ की समस्याओं से जूझने को अभिशप्त है। पलायन की त्रासदी पर बनी गंगोत्री फिल्मस् की ‘मेरु गौं’ को कसौटी पर इसलिए भी कसा […]

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 जहां ढोल की थाप पर अवतिरत होते हैं देवता

जहां ढोल की थाप पर अवतिरत होते हैं देवता

हमारी संस्कृति हमारी विरासत उत्तराखंड का रवांई क्षेत्र अपने सांस्कृतिक वैशिष्टय के लिए सदैव विख्यात रहा है. लोकपर्व, त्योहार, उत्सव, मेले—थोले यहां की संस्कृति सम्पदा के अभिन्‍न अंग रहे हैं. कठिन दैनिकचर्या के बावजूद ये लोग इन्हीं अवसरों पर अपने आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, मेल-मिलाप हेतु वक्त चुराकर न केवल शारीरिक, मानसिक थकान मिटाकर तन-मन में नयी […]

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 सुरक्षा कवच के रूप में द्वार लगाई जाती है कांटिली झांड़ी

सुरक्षा कवच के रूप में द्वार लगाई जाती है कांटिली झांड़ी

आस्था का अनोख़ा अंदाज  – दिनेश रावत देवलोक वासिनी दैदीप्यमान शक्तियों के दैवत्व से दीप्तिमान देवभूमि उत्तराखंड आदिकाल से ही धार्मिक, आध्यात्मिक, वैदिक एवं लौकिक विशष्टताओं के चलते सुविख्यात रही है। पर्व, त्यौहार, उत्सव, अनुष्ठान, मेले, थौलों की समृद्ध परम्पराओं को संजोय इस हिमालयी क्षेत्र में होने वाले धार्मिक, अनुष्ठान एवं लौकिक आयोजनों में वैदिक […]

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 नए कलेवर के साथ हिमांतर देखें वीडियो

नए कलेवर के साथ हिमांतर देखें वीडियो

आपका अपना हिमांतर अब नए कलेवर में आपके सामने मौजूद है। हम वीडियो के जरिए भी आपके साथ बात करेंगे। हिमालय के ज्वलंत मुद्दों को उठाएंगे। आप हमें यूट्यूब पर भी देख सकते हैं।

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 आदमी को भूख जिंदा रखती है

आदमी को भूख जिंदा रखती है

–  नीलम पांडेय “नील” ना जाने क्यों लगता है कि इस दुनिया के तमाम भूखे लोग लिखते हैं,  कविताएं या कविताओं की ही भाषा बोलते हैं। जो जितना भूखा, उसकी भूख में उतनी ही जिज्ञासाएं और उतने ही प्रश्न छिपे होते हैं। अक्सर कविताएं भी छुपी होती हैं। ताज्जुब यह भी है कि उस भूखे […]

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