Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
‘प्रकृति को पूजने और पर्यावरण सुरक्षा की प्रेरणा देता है उत्तरायणी पर्व’

‘प्रकृति को पूजने और पर्यावरण सुरक्षा की प्रेरणा देता है उत्तरायणी पर्व’

लोक पर्व-त्योहार
पर्वतीय लोकविकास समिति द्वारा 19 वें उत्तरायणी महोत्सव का आयोजनहिमांतर ब्यूरोदक्षिण दिल्ली के पालम क्षेत्र के डीडीए ग्राउंड साध नगर में पर्वतीय लोकविकास समिति द्वारा राष्ट्रीय उतरायणी अभियान के अंतर्गत 19 वें उत्तरायणी महोत्सव का आयोजन किया गया.आचार्य महावीर नैनवाल और पं. ओम नारायण शुक्ला द्वारा सर्वप्रथम प्रकृति के सम्मान,पर्यावरण चेतना और विश्व शांति के लिए सृष्टि रक्षा महायज्ञ किया गया. समारोह का उद्घाटन करते हुए दक्षिण दिल्ली के सांसद श्री रमेश विधूड़ी ने कहा कि उत्तरायणी पर्व हमें प्रकृति को पूजने और पर्यावरण सुरक्षा की प्रेरणा देता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व को भारत के इस संदेश और प्रतिबद्धता को धरातल पर उतारते हुए 2030 तक कार्बन उत्सर्जन से मुक्त करने का लक्ष्य रखा है.इस अवसर पर आयोजित गोष्ठी के मुख्य वक्ता चार्टर्ड अकाउंटेंट राजेश्वर पैन्यूली ने कहा कि उत्तरा...
गणतंत्र दिवस परेड: उत्तराखंड की झांकी ‘मानसखंड’ को मिला पहला पुरस्कार

गणतंत्र दिवस परेड: उत्तराखंड की झांकी ‘मानसखंड’ को मिला पहला पुरस्कार

देहरादून
टीम लीडर केएस चौहान की मेहनत रंग लाई, अब कर चुके हैं 13 झांकियों का नेतृत्व  देहरादून. गणतंत्र दिवस की परेड में कर्तव्य पथ पर शामिल उत्तराखंड की मानसखंड झांकी को पहला पुरस्कार मिला है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि हम सबके लिए गौरवशाली पल है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराणों में गढ़वाल का केदारखंड और कुमाऊं का मानसखंड के रूप में वर्णन किया गया है. स्कंदपुराण में मानसखंड के बारे में बताया गया है. जागेश्वर मंदिर की बहुत धार्मिक मान्यता है. गणतंत्र दिवस परेड को अभी तक राजपथ के नाम से जाना जाता था, किंतु इस वर्ष उसका नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखा गया है. नाम बदलने के बाद कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस की यह. पहली परेड थी, जिसमे उत्तराखंड की झांकी मानसखंड को देश मे प्रथम स्थान मिलने से इतिहास में उत्तराखंड राज्य का नाम दर्ज हो गया है....
अवैज्ञानिक और अनियोजित विकासकार्यों का नतीजा है जोशीमठ भू-धसाव

अवैज्ञानिक और अनियोजित विकासकार्यों का नतीजा है जोशीमठ भू-धसाव

चमोली
उत्तराखंड के जनपद चमोली के सीमांत विकासखंड जोशीमठ में लगातार हो रहे भू-धसाव और भूस्खलन की प्रक्रिया से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. जोशीमठ नगर भारत सुदूर उत्तर में चीन से सीमा से लगा सबसे पुराना नगर है, जिसका 1500 वर्ष पुराना क्रोनोलॉजिकल इतिहास है. यह नगर भारत की आजादी के बाद के वर्ष 1975 से क्रीपिंग मूवमेंट के साथ ऑली से लेकर अलकनंदा नदी तट के पास स्थित सेमा-कमद गांव के साथ-साथ प्रति वर्ष कुछ सेंटीमीटर अलकनदां में समा रहा है. इस क्षेत्र का 1996-97 से लेकर वर्तमान तक विभिन्न भूगर्भीय एवं पर्यावरणीय अध्ययनों पर कार्य कर रहे जे.पी. मैठाणी, हिमांतर के माध्यम से  जोशीमठ भू-धसाव की कहानी बयां कर रहे हैं- प्रस्तुत है जोशीमठ भू-धसाव पहली कड़ी. फोटोग्राफ- अनुज नंबूदरी, नितिन सेमवाल और जयदीप किशोर. देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को दूरभाष पर ...
मूली की ‘थिचवानी’: एक स्वादिष्ट पहाड़ी व्यंजन 

मूली की ‘थिचवानी’: एक स्वादिष्ट पहाड़ी व्यंजन 

अल्‍मोड़ा, हिमालयन अरोमा
डॉ. मोहन चंद तिवारीअपने गांव जोयूं जब भी जाता हूँ तो मूली की थिच्वानी मुझे बहुत पसंद है. हमारे पड़ोस के गांव मंचौर की मूली की तो बात ही और है. दिल्ली जब आता हूं तो पहाड़ की मूली लाना कभी नहीं भूलता. सर्दियों में तो यह मूली की थिच्वानी स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभकारी है. मूली तो मैदानों की भी बहुत लाभकारी है किंतु पहाड़ों की शलगमनुमा मूली की बात ही कुछ और है. इसमें हिमालय की वनौषधि के गुण समाविष्ट रहते हैं जो मैदानों में कैमिकल खाद से पैदा हुई मूली में नहीं मिलते. हमारे इलाके मंचौर की मूली इस दृष्टि से भी बहुत प्रसिद्ध है कि वहां की ताजी-ताजी मूली मिलती बड़ी मुश्किल से है क्योंकि पैदा ही बहुत कम होती है.आज मैं अपने इस लेख द्वारा पहाड़ी मूली से बनने वाली सब्जी 'थिचवानी' पर कुछ जानकारी शेयर करना चाहुंगा.कुमाऊं के स्थानीय व्यंजनों में एक स्थानीय कहावत है मनुवौ रवॉट, झुंगरौ भात, मुअकि थेच...
बसंत पंचमी: कला का सदुपयोग व आत्मनवीनीकरण…

बसंत पंचमी: कला का सदुपयोग व आत्मनवीनीकरण…

लोक पर्व-त्योहार
सुनीता भट्ट पैन्यूली एक साहित्यिक उक्ति के अनुसार,“प्राण तत्व ‘रस' से परिपूर्ण रचना ही कला है" इसी कला की प्रासंगिकता के परिप्रेक्ष्य में कहा जा सकता है कि सृष्टि की रचना, अनादिशक्ति ब्रहमा का अद्भुत चमत्कार है और उसमें अप्रतिम रंग,ध्वनि,वेग,स्पंदन व चेतना का स्फूरण मां सरस्वती की कलाकृति. यही कला का स्पर्श हमें उस चिरंतन ज्योतिर्मय यानि कि मां सरस्वती से एकाकार होने का अनुभूति प्रदान करता है. क्योंकि यही देवी सरस्वती ही ज्ञान, कला, विज्ञान, शब्द-सृजन, व संगीत की अधिष्ठात्री हैं.  सरस्वती मां को मूर्तरुप में ढूंढना उनकी व्यापकता को बहुत संकुचित करता है. दरअसल जहां-जहां कला अहैतुकि,नि:स्वार्थ एवं जगत कल्याण के लिए सजग व सक्रिय है सरस्वती का वहीं वास है. जहां सात्त्विक जीवन,कला के विभिन्न रूपों का अधिष्ठान, अध्यात्म, गहन चिंतन, विसंगति के वातावरण में रहकर भी आंतरिक विकास और ऊंचाई पर पहुंच...
गणतंत्र का आह्वान सुनें!

गणतंत्र का आह्वान सुनें!

देश—विदेश
26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर विशेषप्रो. गिरीश्वर मिश्र  चौहत्तर साल पहले आज ही के दिन भारत की संसद ने देश की शासन व्यवस्था चलाने के लिए एक संविधान स्वीकार किया था जिसने भारत सरकार अधिनियम-1935 की जगह ली. इस संविधान का आरम्भ उसकी उद्देशिका (प्रिएम्बल) के साथ होता है और उद्देशिका का आरम्भ संविधान को लेकर कुछ आधारभूत स्थापनाओं के लिए भारतीय समाज की प्रतिश्रुति के साथ होता है. ये प्रतिश्रुतियाँ संविधान का आधार बनती है और उसके प्रयोग की सम्भावनाओं और सीमाओं को भी रेखांकित करती हैं. न्याय , स्वतंत्रता , समता  और बंधुत्व के चार मानवीय और सभ्यतामूलक लक्ष्यों को समर्पित ये प्रतिश्रुतियाँ भारतीय समाज की उन भावनाओं के सार तत्व को प्रतिबिम्बित करती हैं जो एक आधुनिक राष्ट्र की परिकल्पना को मूर्त आकार देती हैं. एक तरह से पूरा संविधान ही इन्हीं प्रतिश्रुतियों को व्यवहार में लाने की व्यवस्था का विस्तार ...
राग-बसंत बहार  और बावरा बैजू

राग-बसंत बहार  और बावरा बैजू

ट्रैवलॉग
मंजू काला मूलतः उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से ताल्लुक रखती हैं. इनका बचपन प्रकृति के आंगन में गुजरा. पिता और पति दोनों महकमा-ए-जंगलात से जुड़े होने के कारण, पेड़—पौधों, पशु—पक्षियों में आपकी गहन रूची है. आप हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन करती हैं. आप ओडिसी की नृतयांगना होने के साथ रेडियो-टेलीविजन की वार्ताकार भी हैं. लोकगंगा पत्रिका की संयुक्त संपादक होने के साथ—साथ आप फूड ब्लागर, बर्ड लोरर, टी-टेलर, बच्चों की स्टोरी टेलर, ट्रेकर भी हैं.  नेचर फोटोग्राफी में आपकी खासी दिलचस्‍पी और उस दायित्व को बखूबी निभा रही हैं. आपका लेखन मुख्‍यत: भारत की संस्कृति, कला, खान-पान, लोकगाथाओं, रिति-रिवाजों पर केंद्रित है. इनकी लेखक की विभिन्न विधाओं को हम हिमांतर के माध्यम से ‘मंजू दिल से…’ नामक एक पूरी सीरिज अपने पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. पेश है मंजू दिल से… की 26वीं किस्त…म...
हिमांतर के नए अंक ‘हिमालयी लोक समाज व संस्कृति’ का विमोचन

हिमांतर के नए अंक ‘हिमालयी लोक समाज व संस्कृति’ का विमोचन

साहित्‍य-संस्कृति
हिमांतर ब्यूरो, हरिद्वार-देहरादूनहिमांतर का नया अंक आ गया है. हर बार की तरह यह अंक भी कुछ खास और अलग है. हिमांतर केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि हिमालयी सरोकारों, संस्कृति और लोक जीवन का दर्पण बनती जा रही है. अब तक के जितने भी अंक प्रकाशित हुए हैं. हर अंक ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. इस बार का अंक भी पहले के अंकों से अलग है. लेकिन, हर अंक की तरह ही इसकी आत्मा भी हिमालयी लोक समाज में बसती है. खास बात यह है कि इस बार के अंक नाम भी हिमालयी लोक समाज व संस्कृति रखा गया है. हरिद्वार में आयोजित रवांल्टा सम्मलेन में हिमांतर के नए अंक का विमोचन किया गया. हिमांतर की खास बात यह है कि इसमें हिमालयी सरोकारों और हिमालयी समाज को केवल छूया भर नहीं जाता, बल्कि गंभीरता से हर पहलू को सामने लाया जाता है. इस बार के अंक के अतिथि संपादक रचनात्मकता के लिए पहचाने जाने वाले राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता शिक्षक और साह...
पिंक प्लाजो नहीं, परंपरागत परिधान में दिखी महिलाएं

पिंक प्लाजो नहीं, परंपरागत परिधान में दिखी महिलाएं

हरिद्वार
हिमांतर ब्यूरो, हरिद्वारजब अपने गांव से दूर दूसरे शहर में रहते हैं, तो हम अपने बार-त्योहार और संस्कृति से भी दूर हो जाते हैं. हालांकि, किसी ना किसी रूप में हम गांव से जुड़े तो रहते हैं. लेकिन, शहरों में नौकरी की मजबूरी और दो वक्त की रोटी के लिए अक्सर व्यस्त रहते हैं और इस व्यस्तता के बीच यह भी भूल जाते हैं कि जिस शहर में हम रह रहे हैं, वहां मेरे गांव, गांव के पास के दूसरे गांव के लोग भी रहते हैं.इनमें कुछ नौकरी में साथ हैं. कुछ दूसरे विभागों में तैनात हैं. कुछ का रोज मिलना हो जाता है, जबकि कुछ चाहकर भी एक-दूसरे से मिल पाते हैं. इसी दूरी को मिटाने के लिए हरिद्वार में रह रहे राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता उत्तरकारी जिले के नौगांव ब्लॉक की बनाल पट्टी के रचनात्मक शिक्षक दिनेश रावत भी शिक्षा विभाग में तैनात हैं. उनकी पत्नी भी यहीं पुलिस विभाग में कार्यरत हैं. दिनेश रावत ने हमेशा की तरह ...
रोचकता आद्यान्त बनाये रखता है उपन्यास, अपनी तरफ खिंचती है इसकी भाषा शैली

रोचकता आद्यान्त बनाये रखता है उपन्यास, अपनी तरफ खिंचती है इसकी भाषा शैली

पुस्तक-समीक्षा
हिमांतर ब्यूरो, नई दिल्लीराष्ट्रवाक् पत्रिका के फेसबुक पेज पर पिछले दिनों ललित फुलारा के पहले उपन्यास ‘घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी’ पर ऑनलाइन परिचर्चा हुई. यह उपन्यास साल 2022 में प्रकाशित हुआ और साल के अंत तक इस उपन्यास को साहित्य आज तक ने वर्ष के युवा लेखकों की शीर्ष 10 पुस्तकों में शामिल किया. यह उपन्यास यश पब्लिकेशंस से प्रकाशित हुआ और इसने पाठकों का वृहद ध्यान अपनी तरफ खिंचा है. कैंपस केंद्रित इस उपन्यास को अच्छी खासी पाठकीय प्रशंसा मिली है. उपन्यास के छपने के सालभर बाद पहली बार इस पर ऑनलाइन परिचर्चा रखी गई थी. जिसमें इंडियाडॉटकॉम के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार सुनील सीरीज, चर्चित लेखक, आईटीबीपी में डिप्टी कमांडेंट, एवं राष्ट्रवाक् पत्रिका के संपादक कमलेश कमल  व शिक्षाविद् एवं दिल्ली सरकार में उप शिक्षा निदेशक डॉक्टर राजेश्वरी कापड़ी ने इसके कथानक, भाषा शैली और शिल्प पर अपने विचार र...