Author: Himantar

हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास
लापता व्यक्ति के शव को SDRF ने किया बरामद

लापता व्यक्ति के शव को SDRF ने किया बरामद

पौड़ी गढ़वाल
कल दिनाँक 13 जुलाई 2023 को कोतवाली द्वारा SDRF टीम को सूचित किया गया था कि कोटद्वार मोटाढांग का पुल टूटने से एक व्यक्ति बह गया है, जिसकी सर्चिंग हेतु SDRF टीम की आवश्यकता है. उक्त सूचना पर SDRF टीम मुख्य आरक्षी महावीर सिंह के हमराह मय रेस्क्यू उपकरणों के तत्काल घटनास्थल के लिए रवाना हुई. SDRF टीम द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुये तत्काल घटनास्थल पर पहुँचकर सर्चिंग अभियान चलाया गया, परन्तु देर रात तक सर्चिंग के बाद भी लापता व्यक्ति का कोई पता नही लग पाया. आज प्रातः पुनः SDRF द्वारा सर्चिंग अभियान चलाया गया. सभी संभावित स्थानों पर सर्चिंग के दौरान लगभग 07 किलोमीटर चलकर नदी किनारे देखा गया कि उक्त व्यक्ति का शव नदी के बीच पत्थरो में फंसा हुआ है. SDRF टीम द्वारा रोप व लाइफ जैकेट के माध्यम से शव तक पहुँच बनाकर शव को नदी से बाहर निकालकर जिला पुलिस के सुपुर्द किया गया. स्थानीय लोगो द्वारा SDRF...
अधिमास और सावन में पार्थिव पूजन

अधिमास और सावन में पार्थिव पूजन

लोक पर्व-त्योहार
भुवन चंद्र पंत इस वर्ष अधिकमास अथवा पुरूषोत्तम मास सावन के महीने में पड़ रहा है. सावन का महीना हर सनातनी के लिए शिवार्चन अथवा पार्थिव पूजन का पवित्र महीना माना जाता है. लेकिन इस माह में अधिकमास होने से कई लोगों में यह शंका होना स्वाभाविक है कि क्या इस साल श्रावण माह में शिवार्चन अथवा पार्थिव पूजा की जा सकेगी अथवा नहीं? पुरोहितवर्ग में मतैक्य न होने से लोग भ्रमित हैं. पुरोहितों का एक वर्ग कहता है कि इस बार श्रावण माह में शिवार्चन नहीं किया जा सकेगा, जब कि दूसरा वर्ग कहता है कि जो नियमित रूप से करते आये हैं, वे तो शिवार्चन कर सकते हैं जब कि जो पहली बार शिवार्चन की शुरुआत कर रहे हों, वे अधिकमास से शिवार्चन की शुरुआत न करें. दूसरी ओर पुरोहितों का एक बड़ा वर्ग का कहना है कि अधिकमास यदि श्रावण माह में पड़ रहा है, तो यह शिवार्चन के लिए सबसे उपयुक्त काल व अधिक पुण्य व फलदायी है. क्योंकि मांगलिक कार्...
प्राकृतिक रंग आधारित आजीविका के लिए वरदान है – आसाम नील पौधे की खेती

प्राकृतिक रंग आधारित आजीविका के लिए वरदान है – आसाम नील पौधे की खेती

खेती-बाड़ी
अनीता मैठाणी हिमालय क्षेत्र में प्राकृतिक रंग देने वाले कई पेड़ पौधे और झाड़ियाँ हैं. दूसरी तरफ पूरी दुनिया में नेचुरल कलर को लेकर - प्राकृतिक रंगों की बहुत मांग बढ़ गयी है. कुछ वर्षों तक हम उत्तरखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में - सेमल के फूल, सकीना (हिमालयन इंडिगो), रुइन के फल (सिन्दूर)  काफल की छल, किल्मोड की जड़ो, बुरांस के फूलों आदि को प्राकृतिक रंग के लिए उपयोग करते थे. लेकिन 5-6 वर्ष पूर्व - पहाड़ के हश्तशिल्प प्राकृतिक रंगों पर काम कर रही - सामाजिक संस्था अवनी को नार्थ ईस्ट के एक पौधे - आसाम नील के बारे में पता चला. अवनी संस्था की निदेशक श्रीमती रश्मि जी ने बताया कि, आसाम नील पौधे जिसको अंग्रेजी में - Strobilanthes Cusia कहते हैं, आसाम में सिर्फ नील कहते हैं , इस पौधे के प्राकृतिक रंग की पूरी दुनिया में बहुत मांग है, लेकिन ये पौधा अभी उत्तराखंड में सबसे पहले अवनी संस्था ही लाई - अवनी 7-8 स...
लोकरंग सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ

लोकरंग सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ

दिल्ली-एनसीआर
"लोकरंग सांस्कृतिक व साहित्यिक उत्थान समिति", शालीमार गार्डन, साहिबाबाद, गाजियाबाद के तत्वावधान में आयोजित लोकरंग सांस्कृतिक कार्यशाला का शुभारंभ आज रविवार 9 जुलाई, में सेंट एंड्रयूज पब्लिक स्कूल, सी-ब्लाॅक, शालीमार गार्डन में क्षेत्र की पूर्व पार्षद व समाज सेवी श्रीमती सुनीता रावत रेड्डी जी के द्वारा किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा उत्तराखण्ड के पारम्परिक शकुनाखर (मांगल गीत) के साथ हुआ.शकुनाखर को उमा पाण्डेय, नीमा अकोलिआ, मधु बहुखंडी व गायत्री घुघत्याल ने अपने स्वरों मे पिरोया.आगामी तीन माह तक चलने वाली यह सांस्कृतिक कार्यशाला प्रत्येक रविवार आयोजित की जाएगी जहां कलाकारों को उत्तराखण्ड के लोक कला, लोक नृत्य-संगीत, लोक भाषा, लोक कथा व लोक नाट्य की बारिकियां विभिन्न कला विशेषज्ञों द्वारा सीखायी जाएंगी. मुख्य अतिथि श्रीमती सुनीता रावत रेड्डी ने आयोजक टीम की सराहना करते...
शहीद राइफलमैन मनदीप सिंह रावत की पांचवी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा

शहीद राइफलमैन मनदीप सिंह रावत की पांचवी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा

पौड़ी गढ़वाल
पहाड़ों में जन्मा था वह जवान, मां कहती तू ही त छे मेरु लाल देश का करता था जो सम्मान, नहीं देख पाया आतंकियों का वार भारत मां ने था जिसे बुलाया, मना वह नहीं कर पाया दिया उसने मुंहतोड़ जवाब हुआ बलिदान वह इस देश को अमर हो गया है वह जवान मनदीप सिंह रावत था जिसका नाम मां कहती तू ही त छे मेरु लाल कुछ इन्हीं भावों के साथ आज दिनांक 7 अगस्त 2023 को मेहरबान सिंह कंडारी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज कोटद्वार परिसर में विद्यालय परिवार एवं ग्रीन आर्मी देवभूमि उत्तराखंड के स्वयंसेवकों के द्वारा मरणोपरांत सेना मेडल शहीद राइफलमैन मनदीप सिंह रावत की पांचवी पुण्यतिथि के उपलक्ष में विद्यालय परिवार में परिसर में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें शहीद मनदीप रावत जी की माताजी श्रीमती सुमा देवी एवं श्री किशोर कुमार लखेडा जी एवं विद्यालय गुरुजनों एवं स्वयंसेवकों द्वारा श्रद्धा सुमन अर्पित किया ...
‘उत्तरायण’ के पर्याय थे बंशीधर पाठक ‘जिज्ञासु’

‘उत्तरायण’ के पर्याय थे बंशीधर पाठक ‘जिज्ञासु’

स्मृति-शेष
हमारी लोक विधाओं को नया आयाम देने वाले बंशीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ जी की पुण्यतिथि पर उन्हें याद करते हुएचारु तिवारी उन दिनों हम लोग बग्वालीपोखर में रहते थे. यह बात 1976-77 की है. आकाशवाणी लखनऊ से शाम 5.45 बजे कार्यक्रम आता था- ‘उत्तरायण.’ शाम को  ईजा स्कूल के दो-मंजिले की बड़ी सी खिड़की में बैठकर रेडियो लगाती. हम सबका यह पसंदीदा कार्यक्रम था. हम किसी भी हालत में इसे मिस नहीं होने देते. हमें नहीं पता था कि इस कार्यक्रम को संचालित करने वाले हमारे ही बगल के गांव नहरा (कफड़ा) के वंशीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ जी हैं. बहुत बाद में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को जानने का मौका मिला. उन्होंने कुमाउनी भाषा और साहित्य के लिये अपना जो अमूल्य योगदान दिया उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा. जिज्ञासु जी ने आकाशवाणी लखनऊ में रहते ‘उत्तरायण’ के माध्यम से जिस तरह कुमाउनी-गढ़वाली भाषा के संवर्धन और नाटकों की शुरुआत की उस...
राग मल्हार : करे, बादरा, घटा घना घोर

राग मल्हार : करे, बादरा, घटा घना घोर

ट्रैवलॉग
मंजू दिल से… भाग-30मंजू कालापावस ऋतु में मल्हार अंग के रागों का गायन-वादन अत्यन्त सुखदायी होता है. वर्षाकालीन सभी रागों में सबसे प्राचीन राग मेघ मल्हार माना जाता है. काफी थाट का यह राग औड़व-औड़व जाति का होता है, अर्थात इसके आरोह और अवरोह में 5-5 स्वरों का प्रयोग होता है. गांधार और धैवत स्वरों का प्रयोग नहीं होता. समर्थ कलासाधक कभी-कभी परिवर्तन के तौर पर गांधार स्वर का प्रयोग करते हैं. भातखंडे जी ने अपने ‘संगीत-शास्त्र’ ग्रंथ में भी यह उल्लेख किया है कि कोई-कोई कोमल गांधार का प्रयोग भी करते हैं. लखनऊ के वरिष्ठ संगीत-शिक्षक और शास्त्र-अध्येता पंडित मिलन देवनाथ के अनुसार लगभग एक शताब्दी पूर्व राग मेघ में कोमल गांधार का प्रयोग होता था. आज भी कुछ घरानों की गायकी में यह प्रयोग मिलता है.. ऋतुओं में से पावस एक महत्वपूर्ण व उपयोगी ऋतु है. यह जीवन दायिनी ऋतु है. अन्न-जल और धान्य का बरखा...
पुरोला : बाइक रपटने से युवक की मौत

पुरोला : बाइक रपटने से युवक की मौत

उत्तरकाशी
नगर पंचायत के अंतर्गत छाड़ा खड्ड के पास आज सुबह बाइक रपटने से एक युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र ले गयीण् जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. खबर की सूचना परिजनों को दे दी गई है. हादसे के बाद से परिजनों का रो–रोकर बुरा हाल है. थानाध्यक्ष पुरोला अशोक कुमार चक्रवर्ती ने जानकारी देते बताया कि आज सुबह डिग्री कॉलेज रोड से मार्केट की तरफ आ रही बाइक संख्या (UK16D7251) छाड़ा खड्ड के पास फिसलन गई. हादसे में विकासखंड मोरी के कुनारा गांव निवासी रोहित (25) पुत्र मेंबर सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. सूचना पर पहुंची पुलिस ने युवक को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया है. थानाध्यक्ष ने बताया कि युवक का पंचनामा भर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है....
उत्तराखंड के पहले हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र का शुभारंभ

उत्तराखंड के पहले हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र का शुभारंभ

देहरादून
मुख्यमंत्री ने हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र में स्थापित वृहद संग्रहालय, प्रेक्षागृह, वाह्य व आन्तरिक कलादीर्घा पुस्तकालय एवं नाट्यशाला का किया अवलोकन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नीबूवाला गढ़ी कैन्ट, देहरादून में संस्कृति विभाग द्वारा निर्मित उत्तराखण्ड के प्रथम हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र का शुभारंभ किया. मुख्यमंत्री ने 4 दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव निनाद का भी शुभारंभ कर हिमालयन सांस्कृतिक केन्द्र में स्थापित वृहद संग्र्रहालय, प्रेक्षागृह, वाह्य व आन्तरिक कलादीर्घा पुस्तकालय एवं नाट्यशाला का अवलोकन किया तथा परम्परागत ढ़ोल वादन कर लोकवाद्यो का सम्मान भी बढ़ाया. असम के लोक कलाकारों द्वारा बिहु नृत्य का प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री को सम्मानित भी किया गया. फिल्म जगत से जुड़े प्रदेश के फिल्मकारों, छायाकारों एवं गायकों को भी सम्मानित किया उनमें फिल्मकार संतोष रावत, फिल्म छायाकार कमलजीत नेगी,...
पुरोला—मोरी: भेड़ पालकों का जीवन बीमा करने की मांग!

पुरोला—मोरी: भेड़ पालकों का जीवन बीमा करने की मांग!

उत्तरकाशी
नीरज  उत्तराखंडीभेड़ पहाड़ की  आर्थिकी की रीढ़ है लेकिन उचित  प्रोत्साहन न मिलने से भेड़ -बकरी पालन व्यवसाय  दम तोड़ता  नजर आ रहा है. आधुनिक सुख सविधाओं की ओर दौड़ती युवा पीढ़ी पारम्परिक व्यवसाय भेड़ बकरी पालन से विमुख होती जा रही है. जिसकी एक बडी वजह भेड़ पालकों की सरकारी अनदेखी भी शामिल है. उचित सहयोग प्रोत्साहन न मिले से युवा पीढ़ी इस पुश्तैनी  व्यवसाय  से  मुख मोड़ने लगी है. पहाड़ की जवानी रोटी रोजगार की तलाश  में  मैदान  की खाक छान रही है.आज के युवक भेड़ पालन व्यवसाय पर रुचि नहीं ले रहे हैं. जिससे लगातार भेड़-बकरी व्यवसायियों की संख्या में भारी गिरावट आ रही है. उच्च हिमालय की  सुन्दर घाटियों में समुद्रतल से  3566 मीटर (11700 फीट) की ऊंचाई पर भेड़ पालक बेखौफ मौसम की मार झेल कर  भेड़ बकरी व्यवसाय पालन करते है. प्रतिकूल परिस्थितियों में धूप, बारिश, सर्दी  आसमानी  बिजली  के संकट से जूझ...