उत्तरकाशी की एएनएम पूजा राणा को राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया सम्मानित

Pooja Rana Parmar Naugaon Uttarkashi

हिमांतर ब्यूरो, नौगांव (उत्तरकाशी)

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) नौगांव में तैनात एएनएम पूजा राणा को अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस के अवसर पर देश के सर्वोच्च नर्सिंग सम्मान National Florence Nightingale Award से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया।

पूजा राणा इस सम्मान को प्राप्त करने वाली उत्तराखंड की पहली और अब तक की एकमात्र एएनएम बन गई हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे उत्तरकाशी जनपद सहित राज्यभर में खुशी की लहर है।

पूजा राणा ने अपने सेवाकाल के दौरान दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। COVID-19 के दौरान उन्होंने जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में गांव-गांव पहुंचकर टीकाकरण अभियान चलाया और शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर एक मिसाल पेश की। इसके अलावा आपदा प्रबंधन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित प्रसव, नियमित टीकाकरण तथा मरीजों की देखभाल में उनकी सेवाएं अत्यंत सराहनीय रही हैं।

उत्कृष्ट कार्यों के लिए पूजा राणा को पूर्व में राज्य स्तर पर ‘सर्वश्रेष्ठ एएनएम’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान उनकी वर्षों की निष्ठा, समर्पण और सेवा भावना का प्रमाण है।

सीएचसी नौगांव के चिकित्साधीक्षक डॉ. रोहित भंडारी ने कहा कि पूजा राणा की उपलब्धि पूरे स्वास्थ्य विभाग के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पूजा राणा ने हमेशा अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता दी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित की।

मूल रूप से खांसी गांव की बहू पूजा राणा को यह सम्मान मिलने पर उनके पिता गिरवीर परमार, माता शकुंतला परमार, जिला पंचायत सदस्य विजय बंधानी, ग्राम प्रधान सूर्यपाल रावत, क्षेत्र पंचायत सदस्य राजेश राणा तथा महिला मंगल दल अध्यक्ष पवना राणा सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने प्रसन्नता व्यक्त की।

ग्रामीणों का कहना है कि पूजा राणा की यह सफलता न केवल उत्तरकाशी बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण है। उनकी उपलब्धि से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अन्य कर्मियों को भी प्रेरणा मिलेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत नर्सिंग स्टाफ का मनोबल बढ़ेगा।

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