
12 किमी रोड शो में उमड़ा जनसैलाब, पीएम बोले– “देवभूमि हमेशा देती है नई ऊर्जा”
- हिमांतर ब्यूरो, देहरादून
देवभूमि उत्तराखंड ने एक बार फिर ऐतिहासिक पल का साक्षी बनते हुए विकास और जनभावना का अद्भुत संगम देखा। जब नरेंद्र मोदी ने दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण किया, तो यह सिर्फ एक सड़क परियोजना का उद्घाटन नहीं था, बल्कि पहाड़ के भविष्य की नई दिशा का उद्घोष भी था।
करीब 12 किलोमीटर लंबा रोड शो- जो डाट काली मंदिर से शुरू होकर देहरादून कैंट तक पहुंचा-जनसमर्थन के लिहाज़ से ऐतिहासिक बन गया। सड़क के दोनों ओर उमड़ी भीड़, गूंजते नारों और हाथों में तिरंगा लिए लोगों ने इस पल को जनउत्सव में बदल दिया।
“जनता का स्नेह ही मेरी ताकत है” – पीएम मोदी
रोड शो के बाद जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने भावुक स्वर में कहा- “देवभूमि उत्तराखंड हमेशा मुझे नई ऊर्जा देती है। यहां के लोगों का स्नेह मुझे देश के विकास के लिए और अधिक प्रेरित करता है।”
उन्होंने मुस्कुराते हुए यह भी जोड़ा- “आज आपका प्यार इतना अधिक था कि मैं समय पर सभा स्थल तक नहीं पहुंच पाया। इसके लिए मैं आपसे क्षमा मांगता हूं।”
स्थानीय संस्कृति से जुड़ाव दिखाते हुए प्रधानमंत्री ने ‘भुला’, ‘भुली’, ‘आमा’ और ‘बाबा’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया और सिर पर ब्रह्मकमल टोपी पहनकर मंच पर पहुंचे- एक ऐसा दृश्य जिसने लोगों के दिलों को छू लिया।

“युवा नेतृत्व में तेजी से बदल रहा उत्तराखंड” – पीएम मोदी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पुष्कर सिंह धामी की सराहना करते हुए कहा- “धामी जी एक युवा, कर्मठ और लोकप्रिय मुख्यमंत्री हैं। उनके नेतृत्व में उत्तराखंड तेजी से विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है।”
उन्होंने ‘डबल इंजन सरकार’ की अवधारणा को दोहराते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के तालमेल से प्रदेश में विकास कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है।
एक्सप्रेस–वे: दूरी नहीं, संभावनाएं घटाएगा
213 किलोमीटर लंबा दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेस-वे अब यात्रा को सिर्फ 2.5 घंटे तक सीमित कर देगा। लेकिन यह परियोजना सिर्फ समय बचाने तक सीमित नहीं- यह पर्यटन, उद्योग, और निवेश के नए द्वार खोलने जा रही है।
“यह एक्सप्रेस-वे उत्तराखंड के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आएगा- रोजगार, पर्यटन और व्यापार के रूप में,” प्रधानमंत्री ने कहा।
प्रकृति के साथ संतुलन: वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बना मिसाल
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर है, जो एशिया का सबसे लंबा बताया जा रहा है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान की देखरेख में विकसित इस कॉरिडोर ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया है।
“हम विकास चाहते हैं, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं,” यह संदेश इस कॉरिडोर के हर हिस्से में दिखाई देता है।
हाथी, तेंदुआ, सांभर जैसे वन्यजीव अब सुरक्षित रूप से अपने प्राकृतिक मार्गों पर आवागमन कर पा रहे हैं—बिना किसी बाधा के।

सड़क, रेल, हवाई और रोपवे: बहुआयामी कनेक्टिविटी
उत्तराखंड में कनेक्टिविटी अब बहुआयामी रूप ले रही है-
- चारधाम ऑल वेदर रोड से तीर्थ यात्रा आसान
- ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन से पहाड़ रेल नेटवर्क से जुड़ेगा
- उड़ान योजना से दूरस्थ क्षेत्रों तक हवाई सेवाएं
- पर्वतमाला परियोजना के तहत रोपवे नेटवर्क
“हमारा लक्ष्य है- पहाड़ का हर गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़े,” प्रधानमंत्री ने कहा।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी बल
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने पंच बदरी, पंच केदार, नंदा राजजात और हरिद्वार कुंभ का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा को रेखांकित किया।
“यह सिर्फ देवभूमि नहीं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति की जीवंत पहचान है,” उन्होंने कहा।

एक नई उड़ान की शुरुआत
इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि उत्तराखंड अब केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक नहीं, बल्कि आधुनिक विकास और संतुलित प्रगति का मॉडल बन रहा है।
दिल्ली–दून एक्सप्रेस-वे इस बदलाव का प्रतीक है- जहां सड़कें सिर्फ शहरों को नहीं, बल्कि संभावनाओं को जोड़ती हैं।
और जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा- “उत्तराखंड का विकास, भारत के विकास की नई दिशा तय करेगा।”
