Tag: Tribute

Himalayan LEAF ने वीरों को पौधों से दी श्रद्धांजलि

Himalayan LEAF ने वीरों को पौधों से दी श्रद्धांजलि

देहरादून
  कारगिल विजय दिवस पर 'एक पौधा वीरों के नाम' अभियानहिमांतर ब्यूरो, देहरादूनहरभजवाला (देहरादून)। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर सामाजिक संस्था Himalayan LEAF द्वारा हरभजवाला क्षेत्र में "एक पौधा वीरों के नाम" अभियान के तहत वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में संस्था के पदाधिकारियों, बच्चों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए और उनके संरक्षण एवं नियमित देखभाल का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके अदम्य साहस, वीरता और सर्वोच्च बलिदान को नमन किया।इस अवसर पर संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष हरीश सनवाल ने कहा कि कारगि...
नहीं रहे मशहूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव, कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

नहीं रहे मशहूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव, कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

देश—विदेश
मशहूर हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव अब इस दुनिया में नहीं रहीं रहे, उनका निधन हो गया. उनको 10 अगस्त को जिम में वर्कआउट दौरान राजू को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद उन्हें एम्स में भर्ती करवाया गया था. पिछले 41 दिन से वे वेंटिलेटर पर मौत से जंग लड़ रहे थे।राजू श्रीवास्तव के मौत की खबर सामने आने के बाद से ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है. हर कोई नम आंखों से अपने हास्य कलाकार को श्रद्धांजलि दे रहा है....
बुझ गई पहाड़ पर लालटेन…

बुझ गई पहाड़ पर लालटेन…

स्मृति-शेष
अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि : प्रसिद्ध कवि और लेखक मंगलेश डबराल का निधन  चारु तिवारीबहुत विचलित करने वाली खबर आ रही है. हमारे अग्रज, प्रिय कवि, जनसरोकारों के लिये प्रतिबद्ध मंगलेश डबराल जी जिंदगी की जंग हार गये हैं. पिछले दिनों वे बीमार हुये तो लगातार हालत बिगड़ती गई. बीच में थोड़ा उम्मीद बढ़ी थी लेकिन आज ऐसी खबर मिली जिसे हम सुनना नहीं चाहते. उनका निधन हम सबके लिये आघात है. मंगलेश डबराल जी को विनम्र श्रद्धांजलि.बीमार यह 1998 की बात है. वे मुझे अचानक भरी बस में मिल गये. नोएडा से दिल्ली आते वक्त. उन दिनों शाहदरा से नोएडा के लिये एक बस लगती थी. इसे शायद एक नंबर बस कहते थे. यह हमेशा खचाखच भरी रहती थी. पांव रखने की जगह नहीं होती. शाम के समय तो बिल्कुल नहीं. मैं जहां से बस लगती थी, वहीं से बैठ गया था. दो-तीन स्टॉप के बाद वो भी बस में चढ़े. मेरी सीट के बगल में लोगों से पिसकर खड़े हो गय...