Tag: बावर

त्यूणी की रुचिका चौहान बनीं आयकर अधीक्षक, बावर क्षेत्र में खुशी की लहर

त्यूणी की रुचिका चौहान बनीं आयकर अधीक्षक, बावर क्षेत्र में खुशी की लहर

देहरादून
 नीरज उत्तराखंडी, त्यूणी (देहरादून)जनपद देहरादून के त्यूणी क्षेत्र के बावर की प्रतिभाशाली बेटी रुचिका चौहान ने आयकर विभाग में आयकर अधीक्षक (IT Superintendent) पद पर चयनित होकर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है. उनकी इस उपलब्धि से कोटी गांव सहित पूरे बावर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है.रुचिका चौहान, राजेन्द्र चौहान की पुत्री हैं. सीमित संसाधनों और पहाड़ी क्षेत्र की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कड़ी मेहनत, अटूट लगन और निरंतर संघर्ष के दम पर यह मुकाम हासिल किया. उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास सच्चे हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती. संघर्ष से सफलता तक का सफर ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी रुचिका ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालय से पूरी की. पढ़ाई के प्रति समर्पण और अनुशासन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ाया. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन...
गज्जू-मलारी वीडियो एल्बम का लोकार्पण

गज्जू-मलारी वीडियो एल्बम का लोकार्पण

देहरादून
विकासनगर. जौनसार-बावर की लोक संस्कृति पर आधारित जौनसारी बोली भाषा में निर्मित गज्जू-मलारी के वीडियो एल्बम का लोकार्पण जौनसार बावर भवन में किया गया. गज्जू-मलारी वीडियो एल्बम के लोकार्पण अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए कालसी के क्षेत्रीय वन अधिकारी ज्वाला प्रसाद ने कहा कि जौनसार—बावर, जौनपुर—रवांई की संस्कृति आपसी प्रेम और सौहार्द की संस्कृति है. इस क्षेत्र का खानपान, रीति रिवाज, परंपरा व रहन-सहन अद्भुत है. इसलिए यहां पर जो गीत बनाए जा रहे हैं उन्हें लोग खूब पसंद करते हैं.कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित हुए विधानसभा के पूर्व सूचना अधिकारी भारत चौहान ने कहा कि जौनसार बावर की लोक संस्कृति केवल गीत और नृत्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां के लोगों के अंदर सहकारिता की भावना कूट-कूट कर भरी हुई है, आपसी सहयोग से सभी समुदाय को साथ लेकर चलना यह भी एक संस्कृति का अंग है. उ...
ढांटू: रवांई—जौनपुर एवं जौनसार-बावर में सिर ढकने की अनूठी परम्‍परा

ढांटू: रवांई—जौनपुर एवं जौनसार-बावर में सिर ढकने की अनूठी परम्‍परा

साहित्‍य-संस्कृति
निम्मी कुकरेतीउत्तराखंड के रवांई—जौनपुर एवं जौनसार-बावर because क्षेत्र में सिर ढकने की एक अनूठी परम्‍परा है. यहां की महिलाएं आपको अक्‍सर सिर पर एक विशेष प्रकार का स्‍कार्फ बाधे मिलेंगी, जो बहुत आकर्षक एवं मनमोहक लगता है. स्थानीय भाषा में इसे ढांटू कहते हैं. यह एक विशेष प्रकार के कपड़े पर कढ़ाई किया हुआ या प्रिंटेट होता है, जिसमें तरह—तरह की कारीगरी आपको देखने को मिलेगी. यहां की महिलाएं इसे अक्सर किसी मेले—थौले में या ​की सामूहिक कार्यक्रम में अक्सर पहनती हैं.उत्तराखंड ढांटू का इतिहास यहां के लोगों का मानना है कि वे because पांडवों के प्रत्यक्ष वंशज हैं. और ढांटू भी अत्यंत प्राचीन पहनावे में से एक है. इनके कपड़े व इन्हें पहनने का तरीका अन्य पहाड़ियों या यूं कहें कि पूरे भारत में एकदम अलग व बहुत सुंदर है. महिलाएं इसे अपनी संस्कृति और सभ्यता की पहचान के रूप में पहनती हैं. आज भी इ...