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उत्तराखंड में विलुप्त होती काष्ठ तकली और कंघी: पारंपरिक शिल्पकार देख रहे संरक्षण की राह

उत्तराखंड में विलुप्त होती काष्ठ तकली और कंघी: पारंपरिक शिल्पकार देख रहे संरक्षण की राह

उत्तरकाशी
 नीरज उत्तराखंडी, पुरोलापारंपरिक काष्ठ शिल्प की एक अनमोल धरोहर आज गुमनामी की कगार पर है। बाज़ार में काष्ठ निर्मित तकली और कंघी बेचते हुए श्रीकोट (पुरोला) निवासी केशवानंद, पुत्र जीतराम, मिले—जो वर्षों से इस पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं।जिज्ञासावश जब उनसे पूछा गया कि ये तकली किस लकड़ी की बनी है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए बताया कि तकली चुल्लू के पेड़ की लकड़ी से तैयार की जाती है, जबकि कंघी मोल यानी कैंथ की लकड़ी से बनाई जाती है। उनके अनुसार इन दोनों वस्तुओं को तैयार करने में काफी मेहनत और समय लगता है। लकड़ी का चयन करना, उसे सुखाना, तराशना और फिर महीन घिसाई कर उपयोगी आकार देना—पूरी प्रक्रिया अत्यंत श्रमसाध्य होती है।केशवानंद बताते हैं कि पहले गांव-गांव में काष्ठ से बनी तकली और कंघियों की अच्छी मांग रहती थी, लेकिन अब प्लास्टिक और मशीन निर्मित वस्तुओं ने इन पारंपरिक ...