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बड़कोट में ‘रवांई की लोक संस्कृति एवं पर्यटन’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण, संस्कृति संरक्षण पर जोर

बड़कोट में ‘रवांई की लोक संस्कृति एवं पर्यटन’ पुस्तक का भव्य लोकार्पण, संस्कृति संरक्षण पर जोर

उत्तरकाशी
 हिमांतर ब्यूरो, बड़कोट, उत्तरकाशीनगर पालिका परिषद बड़कोट में रविवार को शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’ की पुस्तक ‘रवांई की लोक संस्कृति एवं पर्यटन’ का भव्य लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र के शिक्षकों, साहित्य प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने पुस्तक को रवांई क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत है।अजीज प्रेम फाउंडेशन के खजान चौहान ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए इसे शोधपरक और उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि यह कृति क्षेत्र की संस्कृति, समाज और पर्यटन को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्राचार्य डॉ. सुबोध बिष्ट ने...
पाप और पुण्य

पाप और पुण्य

संस्मरण
रवांई के एक कृषक की ईमानदारी का फलध्यान सिंह रावत ‘ध्यानी’मुझे आरम्भ से ही बुजुर्गों के पास उठना-बैठना बहुत भाता रहा है. अपने दादा जी के पास बैठकर मैं अनेकों किस्से-कहानियाँ बड़े ही चाव से सुना करता था. एक दिन घर पर हमारे निकट के करीबी रिश्‍तेदार का आना हुआ जो तब करीब बयासी (82) वर्ष के थे अब इस दुनिया में नहीं हैं. स्व. सब्बल सिंह रावत. रात्रि को भोजन के उपरांत जब मैंने उनके लिए बिस्तर लगाया तो सोने से पूर्व उन्होंने तेल मांगा और अपनी कमीज उतार कर दाहिने हाथ की बाजू में मालिश करने लगे. मेरी नज़र उनके उस हाथ पर पड़ी तो मुझे लगा सम्भवतः इन्हें कभी इस हाथ में बहुत गहरी चोट लगी होगी. मुझ से रहा नहीं गया और मैं ने पूछ ही लिया-‘‘नाना जी आपके इस हाथ में क्या कभी कोई चोट लगी थी?’’ मेरी जिज्ञासा और उत्सुकता को भांपते हुए उन्होंने मुझे अपने पास बैठने को कहा. उसी रजाई का एक छोर निकाल कर मैं ...