December 6, 2020
Home Posts tagged स्वाँग
संस्मरण

रत्याली के स्वाँग

‘बाटुइ’ लगाता है पहाड़, भाग—7 रेखा उप्रेती ‘रत्याली’ मतलब रात भर चलने वाला गीत, नृत्य और स्वाँग. लड़के की बरात में नहीं जाती थीं तब महिलाएँ. साँझ होते ही गाँव भर की इकट्ठी हो जातीं दूल्हे के घर और फिर घर का चाख बन जाता रंगमंच… ढोलकी बजाने वाली बोजी बैठती बीच में और बाकी […]