Tag: भगवान महावीर

सदियों पुरानी परम्परा है दीपावली उत्सव मनाने की 

सदियों पुरानी परम्परा है दीपावली उत्सव मनाने की 

लोक पर्व-त्योहार
दीपावली पर विशेष डॉ. विभा खरे जी-9, सूर्यपुरम्, नन्दनपुरा, झाँसी-284003 दीपावली का उत्सव कब से मनाया जाता है? इस प्रश्न का कोई निश्चित उत्तर पौराणिक और ऐतिहासिक ग्रंथों में नहीं मिलता हैं, लेकिन अनादि काल से भारत में कार्तिक because मास की अमावस्या के दिन दीपावली के उत्सव को मनाने की परम्परा हैं. कई पुरा-कथाएँ, जो नीचे उल्लिखित हैं, इस उत्सव को मनाने की पुरातन परम्परा पर प्रकाश डालती हैं, जिनसे विदित होता हैं कि सत्य-युग से इस उत्सव को मनाने का प्रचलन रहा हैं. भगवान विष्णु द्वारा बलि पर विजय दैत्यों को पराजित करने के उद्देश्य से वामन रूपधारी भगवान विष्णु ने जब दैत्यराज बलि से सम्पूर्ण धरती लेकर उसे पाताल लोक जाने को विवश किया तथा उसे वर माँगने के लिये कहा, तब दैत्यराज बलि ने भगवान विष्णु से वर माँगा कि प्रतिवर्ष धरती पर उसका राज्य तीन दिनों तक रहे तथा देवी लक्ष्मी उसके साथ हो, जि...
भगवान महावीर का पुण्य स्मरण 

भगवान महावीर का पुण्य स्मरण 

अध्यात्म
महावीर जयंती पर विशेष प्रो. गिरीश्वर मिश्र ‘जैन’ वह है जो ‘जिन’ का अनुयायी हो और जिन वह होता है जो राग-द्वेष से मुक्त हो. जैन साधु निर्ग्रन्थ  होते हैं यानी अपने पास गठरी में रखने योग्य कुछ भी नहीं रखते. निवृत्ति  और मोक्ष पर बल देने वाली श्रमण ज्ञान परम्परा  सांसारिक जीवन को चक्र की तरह  उत्थान पतन के  क्रम में चलता हुआ देखती  है  जिसमें  अपने कर्म से अलग किसी  ईश्वर की भूमिका नहीं है. ‘तीर्थ’ जन्म मृत्यु के चक्र से उद्धार के  मार्ग को कहते हैं और तीर्थंकर वह होता है  जो उस मार्ग को प्रशस्त करे. श्री ऋषभ देव वर्तमान जैन परम्परा के प्रथम तीर्थंकर थे.  तेइसवें पार्श्वनाथ थे और इस श्रृंखला में अंतिम तीर्थंकर वर्धमान महावीर हुए . तीर्थंकर छठीं सदी ईसा पूर्व आज के बिहार के में पटना के निकट कुंडलपुर में तकालीन विदेह के इक्ष्वाकु राजवंश में सिद्धार्थ और त्रिशला के पुत्र के रूप में इन...