Tag: पेंटिंग

दादी के कैनवास से शुरू हुई पेटिंग की शुरुआत…

दादी के कैनवास से शुरू हुई पेटिंग की शुरुआत…

उत्तरकाशी
आशिता डोभाल उत्तराखंड देवभूमि ऋषिमुनियों की तपस्थली होने के साथ साथ मां गंगा-यमुना का उद्गम स्थल ही नही बल्कि कुछ ऐसे साधकों की जन्मभूमि और कर्मभूमि भी है जो आज इक्कसवीं सदी में भी अपनी थाती माटी प्रेम से ओत प्रोत होकर सिर्फ यहां को संस्कृति और कला को देश दुनिया में पहचान दिला रहे हैं, उन साधकों में एक नाम है मुकुल बडोनी, जो मूल रूप से कांदला बड़ेथी चिन्यालीसौड़ के एक साधारण परिवार में जन्मे हैं, जिनके पिता एक निजी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं और माताजी कुशल गृहणी. विद्यार्थी जीवन में अव्वल रहने वाला मुकुल हमेशा अध्यापकों के चहेते विद्यार्थियों में रहता था. स्नातकोत्तर चित्रकला से करने के बाद बीएड किया व तत्पश्चात पिट्स बीएड कॉलेज उत्तरकाशी में चित्रकला प्रशिक्षक के रूप में तैनात हैं. मुकुल बताते हैं कि अपनी थाती और माटी से जो उन्हे लगाव हुआ उसमे उनके परिवार का विशेष सहयोग रहा. घर ...
पेंटिंग की वैश्विक प्रदर्शनी में उत्तराखंड के तीन कलाकारों ने किया प्रतिनिधित्व

पेंटिंग की वैश्विक प्रदर्शनी में उत्तराखंड के तीन कलाकारों ने किया प्रतिनिधित्व

समसामयिक
हिमाँतर डेस्‍क उत्तराखंड के राजेश चंद्र की चित्रकला इनदिनों सुर्खियां बंटोर रही है. हाल ही में विश्व स्तर पर हुई एक प्रदर्शनी में उनकी पेंटिंग को खूब सराहा गया है. इस पेंटिंग में राजेश ने समुद्र बचाओ का संदेश दिया था. राजेश 24 साल के हैं और उनकी पेंटिंग्स को नमामि गंगे व जल शक्ति मंत्रालय भी सराह चुका है. राजेश की पेंटिंग की प्रदर्शनी यूनाइटेड नेशन वर्ल्ड ओसन डे ऑर्गनाइजेशन के वैश्विक स्तर पर हुए 'समुद्र बचाओ प्रदर्शनी'  में लगी थी. इस कार्यक्रम में उनके साथ ही विश्वभर के कई कलाकारों ने समुद्र बचाओ का संदेश दिया. राजेश के साथ ही इस प्रदर्शनी में उनके दो बाल कलाकारों शिवांश और मानव थापा की पेंटिंग भी प्रदर्शित की गई. इस वैश्विक प्रदर्शनी में भारत की तरफ से उत्तराखंड के तीन कलाकारों ने प्रतिनिधित्व किया. शिवांश ग्यारह और मानव महज सात साल के हैं जिनकी पेंटिंग इस प्रदर्शनी में प्रदर्...