हिटो फल खाला…

हिटो फल खाला…

‘बाटुइ’ लगाता है पहाड़, भाग—14 रेखा उप्रेती “कल ‘अखोड़ झड़ाई’ है मास्साब, छुट्टी चाहिए.” हमारा मौखिक प्रार्थना-पत्र तत्काल स्वीकृत हो जाता. आखिर पढ़ाई जितनी ही महत्वपूर्ण होती अखोड़ झड़ाई… गुडेरी गद्ध्यर के पास हमारे दो अखरोट के पेड़ थे, बहुत पुराने और विशालकाय. ‘दांति अखोड़’ यानी जिन्हें दांत से तोड़ा जा सके. दांत से तो […]

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 घुल्यास की दुनिया

घुल्यास की दुनिया

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—28 प्रकाश उप्रेती आज बात- ‘घुल्यास’ की. घुल्यास मतलब एक ऐसी लकड़ी जो पहाड़ की जिंदगी में किसी बड़े औजार से कम नहीं थी. लम्बी और आगे से मुड़ी हुई यह लकड़ी खेत से जंगल तक हर काम में आगे रहती थी. बगीचे से आम, माल्टा, और अमरूद की […]

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