April 13, 2021
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संस्मरण

जाड़ों की बरसात में जब पड़ते ‘घनगुड़’ थे

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—2 प्रकाश उप्रेती आज बात– ‘घनगुड़’ की. पहाड़ों पर जाड़ों में जब बरसात का ज़ोर का गड़म- गड़ाका होता था तो ईजा कहती थीं “अब घनगुड़ पडील रे”. मौसम के हिसाब से पहाड़ के जंगल आपको कुछ न कुछ देते रहते हैं. बारिश तो शहरों में भी होती है […]