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आस्था के पथ पर मेरी गोमुख यात्रा…

आस्था के पथ पर मेरी गोमुख यात्रा…

ट्रैवलॉग
यात्रावृत्तांत डॉ कपिल पंवार गंगा नदी, सांस्कृतिक वैभव, श्रद्धा एवं आस्था की प्रतीक मानी जाती हैं. सदियों से भारतीय समाज के हर वर्ग और समुदाय ने अपनी भावनात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानकर गंगा की स्तुति की. पौराणिक काल से ही गंगा, ममतामयी माँ के रूप में पूजनीय है. गंगा, श्रद्धा और विश्वास के रूप में  पतित पावनी है तो जलापूर्ति के रूप में  जीवनदायनी भी. गंगा आदिकाल से ही भारत की आस्था, श्रद्धा का केंद्र होने के साथ ही दिव्य मंगलमयी कामना की पुण्यसलिला रही है. इसी आस्तिक अवधारणा का भाव लिए श्रद्धालु एक बार उस स्थान तक अवश्य पहुंचना चाहता है जहाँ से गंगा का उद्गम है. श्रद्धालु गंगोत्री धाम से 18 किमी की पैदल दूरी तय करके गोमुख तक पहुंचता है. गोमुख तक की यह यात्रा वही श्रद्धालु करता है, जो उच्च हिमालयी क्षेत्र के कारण आक्सीजन की कमी और पैदल यात्रा की चुनौती के लिए शारीरिक रूप से सक्षम हो ले...