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स्मृति-शेष

और, उसके बाद उन्होने जीवन में अंग्रेजी में बात नहीं की

प्यारी दीदी एलिजाबेथ व्हीलर  डॉ. अरुण कुकसाल ‘‘जीवन तो मुठ्ठी में बंद रेत की तरह है, जितना कसोगे उतना ही छूटता जायेगा. होशियारी इसी में है कि जिन्दगी की सीमायें खूब फैला दो, तभी तुम जीवन को संपूर्णता में जी सकोगे. डर कर जीना तो रोज मरना हुआ.’’ एलिजाबेथ व्हीलर दीदी ने इसी जीवन-दर्शन को […]