• हिमांतर ब्‍यूरो, देहरादून

उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवम् अनुसंधान केन्द्र (यूसर्क) देहरादून द्वारा हिमालयन अध्ययन मिशन परियोजना द्वारा वित्त पोषित परियोजना के अन्तर्गत बाँस के सांसाधन को काश्तकारों की आजीविका का प्रमुख संसाधन बनाने हेतु इसके नये उत्पाद बनाने, because बाजारी करण एवं संरक्षण पर कार्य किया जा रहा है. इसके पूर्व में यूसर्क द्वारा महिला समूह को आत्मनिर्भर बनाने हेतु बाँस के विभिन्न नये उत्पाद बनाने पर सात दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया था. अतः उत्पाद बनाने के लिये बाँस के संसाधन की उपलब्धता बनाने हेतु यूसर्क द्वारा स्थानीय निवासियों एवं महिला समूह की भागीदारी के द्वारा ग्राम नागल जवालापुर, डोईवाला ब्‍लॉक में वृहद स्तर पर सामुदायिक बाँस वृक्षारोपण कार्यक्रम किया जा रहा है.

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बाँस के वृक्षारोपण कार्यक्रम के प्रथम दिवस में यूसर्क because की वैज्ञानिक एवं परियोजना अन्वेषक डा. मन्जु सुन्दरियाल द्वारा बाँस की उपयोगिता पर प्रकाश डाला तथा इसे आजीविका का महत्वपूर्ण संसाधन बताते हुये इसके संरक्षण को अति आवश्यक बताया गया. बाँस के उद्यम के जरिये ग्रामीण बेरोजगारी की समस्या पर भी काफी हद तक काबू पाया जा सकता है. अतः बाँस की निरन्तर उपलब्धता बनाये रखने हेतु यूसर्क द्वारा दो दिवसीय वृक्षारोपण कार्यक्रम समुदाय के सहयोग से किया जा रहा है.

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वृक्षारोपण कार्यक्रम के प्रथम दिवस में यूसर्क की निदेशक प्रोफेसर (डॉ) अनीता रावत ने ग्राम नागल जवालापुर, डोईवाला ब्‍लॉक के मंदिर परिसर में पौधारोपण कर सभी महिला समूह को पौधे की जिम्मेदारी देकर उसकी सारसंभाल रखने का संकल्प दिलाया. उन्होनें अपने संबोधन में कहा कि  वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, because जैसी वर्तमान वैश्विक समस्या से सबसे अधिक ग्रामीण जनजीवन एवं गरीब तबके के लोग ही प्रभावित हो रहे हैं तो इनके दुष्प्रभावों को कम करने में सामूदायिक वानिकी कार्यक्रम एक महत्त्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकती है. बाँस का वृक्षारोपण कर मृदा संरक्षण एवं जल संरक्षण व मृदा की उर्वरता को बढ़ाने वाले प्राकृतिक कारकों को बढावा देना हैं.

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महिलाओं को वृक्षारोपण कार्यक्रम में योगदान देने हेतु सराहा गया व बताया गया गया कि वृक्षारोपण के द्वारा हम पर्यावरण संरक्षण में अहम योगदान दे सकती हैं व इसे समय because की आवश्कता बताया. साथ ही समस्त महिलाओं को वृक्षारोपण करने के लिये आगे-आने को कहा. वृक्षारोपण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डा. गीता खन्ना, निदेशक कृष्णनन मेडिकल सेन्टर, देहरादून द्वारा महिलाओं को स्वास्थ्य सम्बन्धी व पर्यावरण को स्वच्छ एव संरक्षित रखने के लिये महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान करायी गयी उन्होंने बताया कि एक स्वस्थ जीवन के लिए चारों तरफ का वातावरण संतुलित एवं स्वच्छ होना आवश्यक है.

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पर्यावरण की स्वच्छता एवं स्वास्थ का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है. उन्होने प्रदूषित पर्यावरण व प्रदूषित जल जनित बीमारियों एवं उनके निवारण के बारे में विस्तार से समझाया साथ में because रस्वच्छ पर्यावरण को मानव स्वास्थ्य के लिये अति आवश्यक बताया. अतः पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए सभी लागों की जिम्मवारी बतायी उनके द्वारा यूसर्क द्वारा किये जा रहे वृक्षारोपण कार्यक्रम को महत्वपूर्ण बताया गया. नागल ज्वालापुर की  ग्राम प्रधान के द्वारा सभी महिलाओं से पौधो की सुरक्षा के लिए आहवान किया.

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यूसर्क के वैज्ञानिक डा. ओपी नौटियाल के द्वारा स्वच्छ पर्यावरण के लिए बास के वृक्षारोपण  को महत्वपूर्ण बताया. तत्पश्चात डा. बिपीन सती, रिसर्च एसोसिएट के द्वारा सभी लोगों को वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहयोग देने को धन्यवाद देते हुये वृक्षारोण आरम्भ करने हेतु आग्रह किया गया. वृक्षारोपण कार्यक्रम में  यूसर्क  की वैज्ञानिक एवं परियोजना अन्वेषक डा. मन्जु सुन्दरियाल, डा. ओपी नौटियाल, श्रीमती बीना,  समाजसेवीका श्रीमती रजनी अग्रवाल, डा. बिपीन सती, because राजीव मोहन बहुगुणा, राधिका सूद एवं समस्त ग्रामवासियों द्वारा बढ़ चढ़ कर प्रतिभाग किया गया.

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हिमालय की धरोहर को समेटने का लघु प्रयास

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