
- नीरज उत्तराखंडी, पुरोला
उत्तराखंड के जनपद उत्तरकाशी के पुरोला विकासखंड स्थित सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत सांखाल में स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव की एक मार्मिक घटना सामने आई है. गांव की निवासी इन्द्री देवी का अचानक स्वास्थ्य बिगड़ने पर ग्रामीणों को उन्हें डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ा.
सड़क सुविधा के अभाव में पैदल ले जानी पड़ी मरीज
सांखाल गांव में मोटर मार्ग न होने के कारण परिजन और ग्रामीण इन्द्री देवी को डंडी-कंडी के सहारे घेडिया बैंड तक लेकर पहुंचे. ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों और संकरी पगडंडियों के बीच यह सफर जोखिम भरा रहा. ग्रामीणों ने बारी-बारी से डंडी संभालते हुए मरीज को सुरक्षित सड़क मार्ग तक पहुंचाया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर यह प्रयास नहीं किया जाता तो मरीज की स्थिति और गंभीर हो सकती थी.
निजी वाहन से बर्निगाड़, फिर 108 एम्बुलेंस सेवा
घेडिया बैंड पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने निजी वाहन की व्यवस्था कर मरीज को बर्निगाड़ पहुंचाया. वहां से 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव ले जाया गया. प्राथमिक जांच के बाद चिकित्सकों ने हालत नाजुक बताते हुए बेहतर उपचार के लिए दून अस्पताल रेफर कर दिया.

पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और सड़क संकट उजागर
यह घटना एक बार फिर उत्तरकाशी जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को उजागर करती है. आपातकालीन परिस्थितियों में आज भी कई गांवों के लोग मरीजों को कई किलोमीटर पैदल ढोने को मजबूर हैं.
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सांखाल जैसे गांवों को शीघ्र मोटर मार्ग और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा से जोड़ा जाए.
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रस्तावित मार्ग
क्षेत्रीय विधायक दुर्गेश लाल के अनुसार प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के अंतर्गत गढ़सार–कामरा–सांखाल–मटियलोड़ सड़क मार्ग प्रस्तावित है और इसकी प्रक्रिया जारी है.
ग्राम प्रधान ने दोहराई सड़क निर्माण की मांग
ग्राम प्रधान सांखाल पिंकी वर्मा ने कहा कि मोटर मार्ग और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि गांव के लोग पिछले कई वर्षों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में कई बार शासन-प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपे गए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है.
पहाड़ की सामाजिक एकजुटता बनी सहारा
कठिन परिस्थितियों के बावजूद ग्रामीणों की तत्परता और सामूहिक प्रयास ने यह साबित किया कि पहाड़ की सामाजिक एकजुटता आज भी मजबूत है. समय रहते अस्पताल पहुंचाने से एक बड़ी अनहोनी टल गई.
