
- नीरज उत्तराखंडी | हिमांतर ब्यूरो | उत्तरकाशी
आस्था और अटूट विश्वास के बीच जनपद उत्तरकाशी स्थित दोनों धामों में चारधाम यात्रा का संचालन सुगम एवं सुव्यवस्थित ढंग से जारी है। कपाट खुलने के बाद से ही श्री गंगोत्री एवं श्री यमुनोत्री धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार बना हुआ है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में भारी संख्या में पहुंच रहे तीर्थयात्रियों की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से संचालित की जा रही हैं, जिससे यात्रा सुरक्षित, सुव्यवस्थित और निर्बाध रूप से आगे बढ़ रही है।
तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखी गई हैं। रविवार सायं 6:30 बजे तक दोनों धामों में कुल 36,186 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इनमें श्री यमुनोत्री धाम में 18,885 तथा श्री गंगोत्री धाम में 17,301 श्रद्धालु शामिल रहे। इसके साथ ही चालू यात्रा सीजन में अब तक दोनों प्रमुख धामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की कुल प्रगतिशील संख्या 7,44,379 तक पहुंच गई है।

श्रद्धालुओं के साथ-साथ वाहनों के आवागमन को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। आज दोनों धामों के लिए कुल 3,590 वाहनों (986 बड़े एवं 2,604 छोटे वाहन) का सुरक्षित संचालन किया गया। इनमें यमुनोत्री धाम के लिए 1,940 तथा गंगोत्री धाम के लिए 1,650 वाहन रवाना हुए। अब तक यात्रा मार्ग पर 72,440 वाहनों के माध्यम से यात्रियों को सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी है। जिलाधिकारी के निर्देशानुसार यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने हेतु संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल एवं नोडल अधिकारियों की तैनाती की गई है।
यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार हेल्थ स्क्रीनिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर संचालित किए जा रहे हैं। आज दोनों धामों में कुल 8,829 यात्रियों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई, जबकि 187 यात्रियों का विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें यमुनोत्री मार्ग पर 5,868 तथा गंगोत्री मार्ग पर 2,961 यात्रियों की स्क्रीनिंग की गई। अब तक क्रमिक रूप से 1,91,926 श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग एवं 16,601 यात्रियों का सफल स्वास्थ्य परीक्षण किया जा चुका है, जिससे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में यात्रियों को संभावित चिकित्सीय असहजताओं से बचाया जा सके।
