रैबार-5 : सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध : सीएम धामी

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उत्तराखंड की तीन हवाई पट्टियों को टेकओवर करेगी सेना : CDS अनिल चौहान

नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में शनिवार को रैबार कार्यक्रम हुआ. जिसमें उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल और वरिष्ठ बीजेपी नेता भगत सिंह कोश्यारी, सीडीएस अनिल चौहान, बीजेपी नेता अनिल बलूनी, स्वर्गीय जनरल बिपिन सिंह रावत की बेटी तारिणी रावत, पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अनिल भट्ट और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी, एनटीआरओ के पूर्व प्रमुख अनिल धस्माना, वाईस एडिमिरल संदीप नैथानी, एनडीएमए मेंबर राजेंद्र सिंह, ओएनजीसी की डारेक्टर सुषमा रावत सहित कई गणमान्य शख्सियतों ने शिरकत की और मंच से अपने विचारों को साझा किया.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड के विकास का महायज्ञ जारी है. उन्होंने कहा कि भगवान से प्रार्थना करता हूं कि सिल्क्यारा में फंसे हमारे मजदूर भाई जल्द बाहर निकले. रेस्क्यू का कार्य बहुत कठिन परिस्थितियों में किया जा रहा है. नजदीक पहुंच रह गए हैं लेकिन कुछ न कुछ दिकक्तें आ रही हैं.  उन्होंने कहा- मैं खुद के एक सैनिक का पुत्र हूं. हमारी सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूर दृष्टि का विश्व में कोई सानी नहीं है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इस बार 56 लाख तीर्थयात्रियों ने चार धाम में दर्शन करके नया रिकॉर्ड बनाया है.

सीडीएस अनिल चौहान ने कहा कि 2047 तक हमें विकसित देश बनना है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी यही सपना है. उन्होंने कहा कि मैं भारतीय सेना का सिपाही हूं. हमारा स्टेट देव भूमि है, इसे आप सैन्य भूमि भी कह सकते हैं. हर परिवार से उत्तराखंड में एक सैनिक जरूर है. अभी तक सैनिकों के नाम के स्मारक बनते थे अब उत्तराखंड में धाम बन रहा है जो कि बहुत बड़ी बात है. उन्होंने कहा कि पिछले साल से सेना ने ऑपरेशन सद्भभावना का दायरा बढ़ाया है. सेना अब उत्तराखंड और हिमाचल के स्थानीय उत्पादों को खरीद रही है जिससे लोगों को रोजगार मिल रहा है.

बीजेपी नेता अनिल बलूनी ने कहा कि देश में वन नेशन वन इलेक्शन होना चाहिए इससे देश तरक्की और विकास करेगा. उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में आबादी के हिसाब से उत्तराखंड के लोगों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है.

कार्यक्रम में पूर्व डीजी कोस्ट गार्ड और मेंबर एनडीएमए राजेंद्र सिंह ने कहा कि सिल्क्यारा में 41 मजदूरों को निकालने की मुहिम चल रही है. 25 एजेंसियां लगी हुई हैं. सूबे की सरकार के साथ ही केंद्र सरकार भी स्थिति को मॉनिटर कर रही है. पीएमओ स्थित पर नजर बनाए हुए है. कार्यक्रम में रिटायर लेफ्टिनेंट अनिल भट्ट ने कहा कि एक दिन आदमी को चांद में रखेंगे ये सपना एलन मस्क का है.

संदीप नैथानी ने कहा कि हमारा सूबा धार्मिक महत्व के लिए फेमस है. उत्तराखंड के लोग सीधे सादे होते हैं. वो दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड समुद्र में नेवी के मिशन में योगदान देगा.उत्तराखंड की स्ट्रेंथ है इमानदारी, वफादारी और एजुकेशन है.

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इंडियन इंटरनेशनल सेंटर में हुए रैबार कार्यक्रम में पूर्व रॉ और एनटीआरओ चीफ अनिल कुमार धस्माना ने कहा कि उत्तराखंड में सतत विकास हो रहा है. विकास के प्रयास भी हो रहे हैं लेकिन हमें सुनियोजित विकास की तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा- हम उत्तराखंड को स्विट्जरलैंड क्यों नहीं बना पाये हमें इस पर सोचना चाहिए. पहाड़ों में होने वाले वनों के कटाव और खनन पर रोक लगानी होगी नहीं तो भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि हमें बड़े हाइड्रो प्रोजक्ट की जगह छोटे हाइड्रो प्रोजेक्ट लगाने चाहिए. होम स्टे को पहाड़ों की संस्कृति से जोड़ना चाहिए. हमें उसे बेचना चाहिए जो हमारी स्ट्रेंथ थी.

वहीं, प्रोफेसर गोविंद सिंह ने कहा कि उत्तराखंड में विकास हो रहा है लेकिन यह विकास अनप्लांड है. इसके पीछे विजन और दृष्टि नजर नहीं आती है. राज्य बनने के बाद पहचान तो मिली, और लाभ भी हो रहा है लेकिन विकास में प्लानिंग नजर नहीं आती है. पूरे सालभर उत्तराखंड में कुछ न कुछ संकट आता रहता है. अब पहाड़ों में आग और बाढ़ की समस्या ज्यादा होने लगी है. उन्होंने कहा कि नया राज्य बनने के बाद पहाड़ों में सबसे ज्यादा पलायन बढ़ा है. तीन हजार से ज्यादा गांव खाली और बंजर हो गए हैं. उत्तराखंड में शहरों का अनियोजित विकास हो रहा है जिसका कोई मतलब नहीं है. पहाड़ों में विकास योजनाबद्ध तरीके से होना चाहिए.

महेंद्र इंद्रेश अस्पताल में एडवाइजर वीएम चमोला ने कहा कि कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा सीएसआर में पैसा खर्च करना चाहिए. उत्तराखंड की बर्बादी में चीड़ का बहुत बड़ा योगदान है. पहाड़ों में ज्यादा से ज्यादा बाज के पेड़ लगाने चाहिए. चीड़ की वजह से ही पहाड़ों में विपदाएं आ रही हैं. ओएनजीसी (ONGC) में डायरेक्टर सुषमा रावत ने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास को डॉक्यूमेंट फॉर्म में लाने का प्रयास होना चाहिए. इससे बच्चों को अपने पूर्वजों के बारे में पता चलेगा. ओएनजीसी इसमें मदद करने के लिए तैयार है.

हिल-मेल द्वारा पहली बार रैबार कार्यक्रम का आयोजन 2017 में उत्तराखंड राज्य के स्थापना दिवस के अवसर पर देहरादून में किया गया था. 2019 में रैबार कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड के टिहरी झील, 2021 में ऋषिकेश और 2022 में दिल्ली में हुआ. रैबार का उद्देश्य प्रबुद्ध लोगों के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाना है.

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