September 20, 2020
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संस्मरण

खाँकर खाने चलें…!!

‘बाटुइ’ लगाता है पहाड़, भाग—11 रेखा उप्रेती शुरू जाड़ों के दिन थे वे. बर्फ अभी दूर-दूर पहाड़ियों में भी गिरी नहीं थी, पर हवा में बहती सिहरन हमें छू कर बता गयी थी कि खाँकर जम गया होगा… इस्कूल की आधी छुट्टी में पाँचवीं कक्षा में पढ़ने वाले सीनियर्स ने प्रस्ताव रखा “हिटो, खाँकर खाने […]
संस्मरण

एक क्रांति का नाम – नईमा खान उप्रेती

पुण्यतिथि पर विशेष मीना पाण्डेय नईमा खान उप्रेती एक क्रांति का नाम था. एक तरफ उत्तराखंड के लोक गीतों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर लाने के लिए उन्होंने मोहन उप्रेती जी के साथ मिलकर एक बड़ी भूमिका निभाई. दूसरी ओर रंगमंच और लोक कलाओं में महिला भागीदारी के प्रति तत्कालीन समाज की जड़ मान्यताओं […]
समाज/संस्कृति

भारतीय परंपरा जल में ‘नारायण’ का वास मानती है

भारत की जल संस्कृति-4 डॉ. मोहन चन्द तिवारी (प्रस्तुत लेख 12 मार्च, 2014 को ‘उत्तराखंड संस्कृत अकादमी, हरिद्वार द्वारा ‘आईआईटी’ रुडकी में आयोजित विज्ञान से जुड़े छात्रों,शिक्षकों और जलविज्ञान के  विद्वानों के समक्ष मेरे द्वारा दिए गए वक्तव्य- “प्राचीन भारत में जल विज्ञान, जल संरक्षण और जल प्रबंधन” का सारगर्भित संशोधित  रूप है.पिछले वर्ष 11-12 […]
संस्मरण

गर्मियों की छुट्टी और रोपणी की बखत 

ममता गैरोला जून की भीषण गर्मी में पहाड़ स्वर्ग की सी अनुभूति है. खेतों की लहलहाती हवा, धारा (पानी का स्रोत) से बहता ठंडा पानी, लोगों में आपसी मेलजोल और साथ ही सांस्कृतिक रीति-रिवाज पहाड़ों की जीवन शैली का अद्भुत दर्शन कराती है और इस अनुभूति को हम सिर्फ तब ही नहीं महसूस करते जब […]
उत्तराखंड

लोक संस्कृति में रंग भरने वाला पहाड़ का चितेरा  

ललित फुलारा भास्कर भौर्याल बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. उम्र सिर्फ 22 साल है. पर दृष्टिकोण और विचार इतना परिपक्व कि आप उनकी चित्रकारी में समाहित लोक संस्कृति और आंचलिक परिवेश को भावविभोर होकर निहारते रह जाएंगे. उनके चटक रंग बरबस ही अपनी दुनिया में खोई हुई आपकी एकाग्रता, को अपनी तरफ खींच लेंगे. वो […]
संस्मरण

लोक की आवाज – हीरा सिंह राणा

मीना पाण्डेय आज से कुछ 18-20 साल पहले हीरा सिंह राणा जी से अल्मोड़ा में ‘मोहन उप्रेती शोध समिति’ के  कार्यक्रम के दौरान पहली बार मिलना हुआ. ‌तब उनकी छवि मेरे किशोर मस्तिष्क में ‘रंगीली बिंदी’ के लोकप्रिय गायक के रूप में रही. उसके बाद दिल्ली आकर कई कार्यक्रमों में लगातार मिलना हुआ. मध्यम कद-काठी […]
उत्तराखंड

बॅम्बूसा पॉलिमार्फा : एक बहुउपयोगी बांस

जे. पी. मैठाणी बांस के संसार में बांस की कुल प्रजातियों को वानस्पतिक वर्गीकरण के आधार पर दो प्रमुख भागों में बांटा गया है. प्रथम बॅम्बूसा प्रजातियां जैसे- बॅम्बूसा पॉलिमार्फा, बॅम्बूसा वल्गेरिस, बॅम्बूसा बैम्बूस, बॅम्बूसा टुल्डा, बॅम्बूसा बालकोआ, बॅम्बूसा मल्टिप्लैक्स आदि. डैन्ड्राकैलेमस की प्रजातियों में डैन्ड्राकैलेमस एस्पर, डैन्ड्राकैलेमस हैमल्टोनाई, डैन्ड्राकैलेमस
संस्मरण

पहाड़ों में ब्याह-बारात की सामूहिकता

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—21 प्रकाश उप्रेती आज बात उस पहाड़ की जो आपको अकेले होने के एहसास से बाहर रखता है. वो पहाड़ जो आपको हर कदम पर सामूहिकता का बोध कराता है. हमारे लिए ‘गौं में ब्याह’ (गाँव में शादी) किसी उत्सव से कम नहीं होता था. खासकर लड़की की शादी […]
उत्तराखंड

ना जाने कहां खो गई पोई और चुल्लू की महक

आशिता डोभाल पहाड़ों में बहुत—सी चीजें हमारे बुजुर्गों ने हमें विरासत के रूप में सौंपी हैं पर आज आधुनिकता की चमक—दमक और भागदौड़ भरी जीवनशैली में हम इन चीजों से कोसों दूर जा चुके हैं. हम अपनी पुराने खान—पान की चीजों को सहेजना और समेटना लगभग भूल ही गए हैं. अपने खान—पान में हमने पुराने […]
समसामयिक

पहाड़ की लोकसंस्कृति को पहचान दी लोक गायक हीरासिंह राणा ने

डॉ. मोहन चन्द तिवारी बहुत ही दुःख की बात है कि कोरोना काल के इस कठिन दौर में “लस्का कमर बांध, हिम्मत का साथ फिर भोल उज्याई होलि, कां ले रोलि रात”- जैसे अपने ऊर्जा भरे बोलों से जन जन को कमर कस के हिम्मत जुटाने का साहस बटोरने और रात के अंधेरे को भगाकर […]