September 23, 2020
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किस्से/कहानियां

गोधूलि का दृश्य

लघुकथा अनुरूपा “अनु” गोधूलि का समय था. गाय बैल भी जंगल की ओर से लौट ही रहे थे.मैं भी घर के पास वाले खेत में नींबू के पेड़ की छांव में कलम और कागज लेकर बैठ गई.सोच रही थी कुछ लिखती हूं. क्योंकि उस पल का जो दृश्य था वह बड़ा ही लुभावना लग रहा […]
इतिहास

गढ़वाल उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई तीलू रौतेली

वीरांगना तीलू रौतेली की जन्मजयंती पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज 8 अगस्त को गढ़वाल उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई के नाम से प्रसिद्ध तीलू रौतेली की जन्मजयंती है. इतिहास के पन्नों में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई दिल्ली की रजिया सुल्ताना, बीजापुर की चांदबीबी,मराठा महारानी ताराबाई,चंदेल की रानी दुर्गावती आदि वीरांगनाओं के बारे में बहुत […]
समसामयिक

आखन देखी

ललित फुलारा जब मैं यह लिख रहा हूं.. जुलाई बीत चुका है. फुटपाथ, सड़कें, गली-मोहल्ले कोरोना से निर्भय हैं! जीवन की गतिशीलता निर्बाध चल रही है. लोगों के चेहरों पर मास्क ज़रूर हैं, पर भीतर का डर धीरे-धीरे कम होने लगा है. रोज़मर्रा के कामकाज़ पर लौटे व्यक्तियों ने आशावादी रवैये से विषाणु के भय […]
शिक्षा

पृष्ठभूमि को नया विस्तार और आयाम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भाग-1 डॉ. अरुण कुकसाल ‘‘लोकतंत्र में नागरिकता की परिभाषा में कई बौद्धिक, सामाजिक एवं नैतिक गुण शामिल होते हैं: एक लोकतांत्रिक नागरिक में सच को झूठ से अलग छांटने, प्रचार से तथ्य अलग करने, धर्मांधता और पूर्वाग्रहों के खतरनाक आकर्षण को अस्वीकार करने की समझ एवं बौद्धिक क्षमता होनी चाहिए….वह न तो […]
उत्तराखंड

पहाड़ी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से अधिक फायदेमंद है बड़ी इलायची का उत्पादन

डॉ. राजेंद्र कुकसाल बड़ी इलायची या लार्ज कार्डेमम को मसाले की रानी कहा जाता है. इसका उपयोग भोजन का स्वाद बढाने के लिए किया जाता है साथ ही इसमें औषधीयय गुण भी होते है. बड़ी इलायची से बनने वाली दवाईयों का उपयोग पेट दर्द, वात, कफ, पित्त, अपच, अजीर्ण, रक्त और मूत्र आदि रोगों को […]
शिक्षा

टैगोर का शिक्षादर्शन- ‘असत्य से संघर्ष और सत्य से सहयोग’

रवीन्द्र नाथ टैगोर की पुण्यतिथि (7 अगस्त,1941) पर विशेष डॉ. अरुण कुकसाल ‘किसी समय कहीं एक चिड़िया रहती थी. वह अज्ञानी थी. वह गाती बहुत अच्छा थी, लेकिन शास्त्रों का पाठ नहीं कर पाती थी. वह फुदकती बहुत सुन्दर थी, लेकिन उसे तमीज नहीं थी. राजा ने सोचा ‘इसके भविष्य के लिए अज्ञानी रहना अच्छा […]
उत्तराखंड

संकट में सीमांत

सुमन जोशी बरसात का मौसम है. खिड़कियों के शीशों पर पड़ी बूंदों को देखते हुए अदरक-इलायची वाली चाय की चुस्कियों के बीच अपनी पसंदीदा किताब पढ़ने के दिन. और उसी के साथ म्यूजिक स्टोर से, “रिम-झिम गिरे सावन,  सुलग-सुलग जाए मन,  भीगे आज इस मौसम में,  लगी कैसी ये अगन”. गीत सुनते-सुनते कहीं पहाड़ों व बचपन […]