September 19, 2020
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संस्मरण

‘हे दरी हिमाला दरी ताछुम’

डॉ. अमिता प्रकाश “हे दरी हिमाला दरी ताछुम-ताछुमा-छुम. दरी का ऐंगी सौदेर दरी ताछुम-ताछुमा-छुम”.. हाथों से एक दूसरे की बाँह पकड़कर घेरे में गोल-गोल घूमकर दो कदम आगे बढ़ाते हुए धम्म से कूदती हुई लड़कियों को देखकर छज्जे में बैठी मेरी नानी, मामी और दूसरी लड़कियों की दादी, बोडी (ताई), काकी (चाची) की टिप्पणियाँ हमें […]
किस्से/कहानियां

खनार

कहानी डॉ. कुसुम जोशी रमा कान्त उर्फ रमदा के बिल्कुल सड़क से सटे घर के आंगन में कार को पार्क कर उनकी छोटी सी परचून की दुकान में उनसे मुलाकात करने के लिये आगे बढ़ गया. बचपन में एक ही स्कूल में पढ़ते थे हम. दो साल सीनियर थे मुझसे, पढ़ने में अच्छे थे पर […]
इतिहास

‘करो या मरो’ अगस्त क्रांति का बीजमंत्र

9 अगस्त ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज नौ अगस्त को देश ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन की 78वीं वर्षगांठ मना रहा है.नौ अगस्त 1942 का दिन भारत की आजादी का एक ऐतिहासिक दिन है. इसी दिन गांधी जी ने अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के लिए “भारत छोड़ो आंदोलन” के […]
उत्तराखंड

रिंगाल: उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हरा सोना

जे. पी. मैठाणी पहाड़ की अर्थव्यवस्था के साथ रिंगाल का अटूट रिश्ता रहा है. रिंगाल बांस की तरह की ही एक झाड़ी है. इसमें छड़ी की तरह लम्बे तने पर लम्बी एवं पतली पत्तियां गुच्छी के रूप में निकलती है. यह झाड़ी पहाड़ की संस्कृति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण वनस्पति समझी जाती है. पहाड़ के […]
संस्मरण

कंकट सिर्फ लकड़ी नहीं बल्कि पहाड़ की विरासत का औज़ार है

मेरे हिस्से और पहाड़ के किस्से भाग—41 प्रकाश उप्रेती पहाड़ जरूरत और पूर्ति के मामले में हमेशा से उदार रहे हैं. वहाँ हर चीज की निर्मिति उसकी जरूरत के हिसाब से हो जाती है. आज जरूरत के हिसाब से इसी निर्मिति पर बात करते हैं. यह -“कंकट” है. इसका शाब्दिक अर्थ हुआ काँटा, काटने वाला. […]
साहित्यिक हलचल

इजा! नि थामि तेरी कईकई, सब जगां रई तेरी नराई

(शम्भूदत्त सती का व्यक्तित्व व कृतित्व-3) डॉ. मोहन चंद तिवारी कुमाऊं के यशस्वी साहित्यकार शम्भूदत्त सती की रचनाधर्मिता से पहाड़ के स्थानीय लोग प्रायः कम ही परिचित हैं किन्तु पिछले तीन दशकों से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक आंचलिक कुमाऊंनी साहित्यकार के रूप में सती जी ने अपनी एक खास पहचान बनाई है. शम्भूदत्त […]
किस्से/कहानियां

गोधूलि का दृश्य

लघुकथा अनुरूपा “अनु” गोधूलि का समय था. गाय बैल भी जंगल की ओर से लौट ही रहे थे.मैं भी घर के पास वाले खेत में नींबू के पेड़ की छांव में कलम और कागज लेकर बैठ गई.सोच रही थी कुछ लिखती हूं. क्योंकि उस पल का जो दृश्य था वह बड़ा ही लुभावना लग रहा […]
इतिहास

गढ़वाल उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई तीलू रौतेली

वीरांगना तीलू रौतेली की जन्मजयंती पर विशेष डॉ. मोहन चंद तिवारी आज 8 अगस्त को गढ़वाल उत्तराखंड की लक्ष्मी बाई के नाम से प्रसिद्ध तीलू रौतेली की जन्मजयंती है. इतिहास के पन्नों में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई दिल्ली की रजिया सुल्ताना, बीजापुर की चांदबीबी,मराठा महारानी ताराबाई,चंदेल की रानी दुर्गावती आदि वीरांगनाओं के बारे में बहुत […]
समसामयिक

आखन देखी

ललित फुलारा जब मैं यह लिख रहा हूं.. जुलाई बीत चुका है. फुटपाथ, सड़कें, गली-मोहल्ले कोरोना से निर्भय हैं! जीवन की गतिशीलता निर्बाध चल रही है. लोगों के चेहरों पर मास्क ज़रूर हैं, पर भीतर का डर धीरे-धीरे कम होने लगा है. रोज़मर्रा के कामकाज़ पर लौटे व्यक्तियों ने आशावादी रवैये से विषाणु के भय […]